Mahakumbh Sanatan Ved-Purana: महाकुंभ ने युवाओं को सनातन से जोड़ा, सोशल मीडिया पर वेद-पुराण की खोज में 300 गुना वृद्धि

Mahakumbh Sanatan Ved-Purana: महाकुंभ के पावन अवसर ने न केवल आध्यात्मिक जिज्ञासा को बढ़ावा दिया है, बल्कि युवाओं को सनातन संस्कृति और धर्म से गहराई से जोड़ने का काम किया है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि महाकुंभ के दौरान वेद, पुराण और भारतीय दर्शन से संबंधित खोजों में 300 गुना तक की वृद्धि हुई है।

Mahakumbh Sanatan Ved-Purana: महाकुंभ ने युवाओं को सनातन से जोड़ा, सोशल मीडिया पर वेद-पुराण की खोज में 300 गुना वृद्धि

हाइलाइट्स

  • महाकुंभ ने युवाओं को सनातन से जोड़ा
  • सोशल मीडिया पर वेद-पुराण की खोज में 300 गुना वृद्धि
  • संस्कृति और परंपराओं से जोड़कर एक नई पहचान

Mahakumbh Sanatan Ved-Purana: महाकुंभ के पावन अवसर ने न केवल आध्यात्मिक जिज्ञासा को बढ़ावा दिया है, बल्कि युवाओं को सनातन संस्कृति और धर्म से गहराई से जोड़ने का काम किया है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि महाकुंभ के दौरान वेद, पुराण और भारतीय दर्शन से संबंधित खोजों में 300 गुना तक की वृद्धि हुई है।

युवाओं की इस बढ़ती रुचि को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि महाकुंभ जैसे आयोजन ने डिजिटल युग में रह रहे युवाओं को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता से फिर से जोड़ने का काम किया है। सोशल मीडिया पर वेद, पुराण, सनातन_धर्म और महाकुंभ जैसे हैशटैग्स ट्रेंड कर रहे थे, जो युवाओं की बदलती मानसिकता को दर्शाते हैं।

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महाकुंभ का माहौल युवाओं को अपनी जड़ों की ओर लौटने के लिए प्रेरित

इस संबंध में धर्मगुरुओं का कहना है कि महाकुंभ का माहौल युवाओं को अपनी जड़ों की ओर लौटने के लिए प्रेरित करता है। वहीं, युवाओं का कहना है कि सोशल मीडिया और इंटरनेट ने उन्हें वेद, पुराण और भारतीय दर्शन को समझने और उससे जुड़ने का एक आसान माध्यम प्रदान किया है।

भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़कर एक नई पहचान

इस प्रकार, महाकुंभ ने न केवल आध्यात्मिकता को बढ़ावा दिया है, बल्कि युवाओं को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़कर एक नई पहचान दी है। यह परिवर्तन न केवल सामाजिक, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कब शुरू हुआ था महाकुंभ 

13 जनवरी से शुरू हुआ महाकुंभ 26 फरवरी तक चला, इन 45 दिनों में 65 करोड़ से अधि लोगों ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई,यह आंकड़ा अमेरिका की कुल आबादी से दोगुना है, जो इसे एक विश्व रिकॉर्ड बनाता है। इसके अलावा, इस महाकुंभ में कई और ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी दर्ज किए गए हैं। महाकुंभ, जो दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है, इस बार और भी भव्य रहा। इस बार के महाकुंभ में सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया, जो पिछले सभी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देता है। इसके अलावा, सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में भी यह आयोजन अब तक का सबसे बेहतरीन रहा।

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