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रिपोर्ट: मनोज सैनी, भोपाल
Ujjain Vaidyashala Astronomical Calendar: देश भर में मकर सक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। इसके पीछे एक वैज्ञानिक आधार भी है, जो उज्जैन की वेधशाला में दिखाई देता है।
ऐसा माना जाता है कि 22 दिसंबर से ही सूर्य उत्तरायण होना शुरू होता है और सूर्य के मार्ग परिवर्तन से ही मकर सक्रांति का यह पर्व जुड़ा हुआ है। इस पर बंसल न्यूज के एक्जिक्यूटिव एडिटर मनोज सैनी ने वेधशाला प्रभारी डॉ. राजेंद्र गुप्त से इस दिन का महत्व और खगोलीय घटनाओं को समझा और जाना।
शंकु यंत्र से सूर्य रेखा और राशियों की स्थिति देख सकते हैं
डॉ. राजेंद्र गुप्त उज्जैन वेधशाला के प्रमुख हैं। लंबे समय से इस पर अध्ययन भी करते रहे हैं। डॉ. राजेंद्र गुप्त कहते हैं कि कालगणना की प्राचीन समय से महत्वपूर्ण नगरी रही है उज्जैन, क्योंकि कर्क रेखा यहां से गुजरती रही है। साइन गणना के अनुसार अगर हम देखते हैं तो वेधशाला में शंकु यंत्र उपलब्ध है। जिसके माध्यम से हम सूर्य की रेखाओं पर स्थिति और राशियों पर स्थिति देख सकते हैं।
सूर्य की परछाई छोटी हो गई, सूर्य उत्तर की ओर आ गया
उन्होंने कहा कि यहां हम जैसे देख रहे हैं कि 22 दिसंबर को सूर्य मकर रेखा पर था तो, शंकु की परछाई पूरे दिन मकर रेखा पर गति करती हुई दिखाई दी। 14 जनवरी को परछाई काफी छोटी हो गई। मतलब सूर्य उत्तर की ओर आ गया है। ये साइन गणना के अनुसार निर्यन गणना के अनुसार आज सूर्य धनु से मकर में प्रवेश करेगा।
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हम उत्तरी गोलार्ध में हैं, अब सूर्य प्रकाश ज्यादा मिलेगा
डॉ. राजेंद्र गुप्त ने बताया कि साइन गणना प्रायोगिक रूप से दिखती है, मकर संक्रांति या हमारे यहां जो भी त्यौहार है वो, वास्तव में बहुत सटीकता और ऑब्जरवेशन के आधार पर है। सूर्य उत्तर की ओर आना शुरू हुआ। क्योंकि हम लोग उत्तरी गोलार्ध में रहते हैं। इसका मतलब क्या है? अब सूर्य का प्रकाश हमको ज्यादा समय के लिए मिलेगा।
एनर्जी किसी न किसी रूप में सूर्य से एकत्रित होती है
उन्होंने बताया कि 22 दिसंबर को दिन सबसे छोटा था। अब दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगेंगे। तो दिन बड़े होंगे, रातें छोटी होंगी, एनर्जी मिलेगी। क्योंकि सूर्य ऊर्जा का स्रोत है। जितना भी हम देखते हैं, एनर्जी किसी ना किसी रूप में सूर्य से ही एकत्रित होती है। जिससे हमारा जीवन चलता है।
खगोलीय गणना प्रैक्टिकल रूप से हम भी देख सकते हैं
सूर्य के स्वागत का त्यौहार है। हम स्वागत कर रहे हैं। अब सूर्य हमारे उत्तर की ओर आ रहा है तो, हम उसका स्वागत कर रहे हैं। इस रूप में इस त्यौहार को मनाया जाता है और ये जो खगोलीय गणना के अनुसार प्रैक्टिकल रूप से यंत्रों के माध्यम से इसको हम देख भी सकते हैं।
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