काले हिरण के शिकार केस में कोर्ट सख्त: डॉ. वसीम सहित 3 की जमानत खारिज, दलीलें नहीं आई काम, जेल भेजे गए आरोपी

सागर में काले हिरण शिकार मामले में कोर्ट ने मुख्य आरोपी डॉक्टर वसीम खान समेत तीन की जमानत याचिका खारिज कर उन्हें जेल भेज दिया है। कोर्ट ने आरोपियों की ओर से दी गई दलीलें कोर्ट ने अमान्य कर दीं।

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Sagar Blackbuck Poaching Case: सागर जिले के राहतगढ़ वन क्षेत्र में हुए सनसनीखेज काले हिरण शिकार मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपी डॉ. वसीम खान और उनके दो साथियों की जमानत याचिका को अपराध की गंभीरता देखते हुए खारिज कर दिया। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश सुधांशु सक्सेना की अदालत ने स्पष्ट किया कि वन्यजीवों के खिलाफ ऐसे जघन्य अपराधों में राहत नहीं दी जा सकती। सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

आरोपी डॉक्टर की दलीलें फेल, कोर्ट ने भेजा जेल

राहतगढ़ वन क्षेत्र में काले हिरण (Blackbuck) का अवैध शिकार करने वाले आरोपियों के लिए शनिवार का दिन भारी रहा। वन विभाग द्वारा पकड़े गए मुख्य आरोपी डॉक्टर वसीम खान और उनके सहयोगियों को कोर्ट में पेश किया गया था। बचाव पक्ष के वकीलों ने कोर्ट में मानवीय आधार और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देकर जमानत की पुरजोर कोशिश की, लेकिन सरकारी वकील और वन विभाग के पुख्ता सबूतों के आगे उनकी एक न चली।

'शेड्यूल-1' का हवाला और कड़ा विरोध

सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि काला हिरण वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की 'शेड्यूल-1' में आता है। कानूनन इसे बाघ के समान ही उच्च स्तरीय सुरक्षा और दर्जा प्राप्त है। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपियों ने जानते-बूझते हुए इस संरक्षित जीव की हत्या की है। वन विभाग ने कोर्ट के सामने तकनीकी साक्ष्य और मौके से बरामद अवशेषों की रिपोर्ट पेश की, जिससे आरोपियों की संलिप्तता प्राथमिक तौर पर सिद्ध हुई।

'जन्मदिन' के बहाने फंसाने की दलील खारिज

बचाव पक्ष के अधिवक्ता फिरोज खान ने दलील दी कि डॉ. वसीम खान केवल एक जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने सागर आए थे और उन्हें षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है। उन्होंने आरोपी की 9 वर्षीय पुत्री का हवाला देते हुए जमानत मांगी थी। हालांकि, अदालत ने अपराध की प्रकृति को अत्यधिक गंभीर माना और इन दलीलों को दरकिनार करते हुए आरोपियों को जेल भेजने का आदेश दिया।

बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा: IFS का खुलासा

इस मामले की जांच अब स्थानीय शिकार से निकलकर एक बड़े नेटवर्क की ओर मुड़ गई है। ट्रेनी आईएफएस (IFS) अधिकारी जयप्रकाश ने मीडिया को बताया कि आरोपियों के मोबाइल नंबरों की ट्रेसिंग और कॉल डिटेल्स (CDR) से कुछ नए संदिग्धों के नाम सामने आए हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह केवल एक बार का शिकार नहीं, बल्कि एक संगठित सिंडिकेट का काम हो सकता है। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम अब इस रैकेट के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

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