मध्यप्रदेश PWD में स्पेशल चेकिंग के खिलाफ बगावत: छतरपुर में जांच अफसरों को होटल में घेरा, सागर संभाग के इंजीनियर सामूहिक अवकाश पर

मध्यप्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री राकेश सिंह द्वारा शुरू कराई गई 'औचक निरीक्षण' की व्यवस्था ने विभाग के अंदर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सागर संभाग के सभी एसडीओ और सब-इंजीनियरों ने एक दिवसीय सामूहिक अवकाश का ऐलान कर दिया।

PWD Minister VS SDO Engineer

PWD Minister VS SDO Engineer: मध्यप्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री राकेश सिंह द्वारा शुरू कराई गई 'औचक निरीक्षण' की व्यवस्था ने विभाग के अंदर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।

सागर संभाग के PWD और पीआईयू (PIU) के सभी एसडीओ (SDO) और सब-इंजीनियरों ने विभागीय प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए एक दिवसीय सामूहिक अवकाश का ऐलान कर दिया।

होटल के कमरे में कैद हुए अफसर

PWD Minister VS SDO Engineer
इंदौर से आए चीफ इंजीनियर और ग्वालियर के एसआई को स्थानीय अधिकारियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा।

मंत्री राकेश सिंह के निर्देश पर निरीक्षण के लिए इंदौर से आए चीफ इंजीनियर जीएस बघेल और ग्वालियर के एसआई वसीम खान को स्थानीय अधिकारियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। आक्रोशित इंजीनियरों ने जांच दल के इन दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को एक होटल के कमरे में रोक दिया और उन्हें निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने जाने से रोक दिया।

डिप्लोमा एसोसिएशन के गंभीर आरोप

एमपी डिप्लोमा एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एसडी पटेल और अन्य पदाधिकारियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण में ठेकेदार घटिया निर्माण कार्य कर रहे हैं। जब जांच दल आता है, तो वह ठेकेदार के बजाय स्थानीय इंजीनियरों पर कार्रवाई कर उन्हें बलि का बकरा बनाता है।

मंत्री के भेजे अफसर स्टाफ को सता रहे

एक-एक उपयंत्री (Sub-Engineer) के पास 3 से 4 सेक्टरों का भार है, लेकिन उनके पास बुनियादी संसाधन तक उपलब्ध नहीं हैं।एसोसिएशन का दावा है कि मंत्री द्वारा भेजे गए अधिकारी स्थानीय फील्ड स्टाफ को बेवजह सता रहे हैं और उन पर दबाव बना रहे हैं।

फील्ड स्टाफ की काम बंद की चेतावनी

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की गुणवत्ता में सुधार के लिए कड़े निरीक्षण की बात के खिलाफ फील्ड स्टाफ ने काम बंद करने की चेतावनी दी है। इंजीनियरों का कहना है कि जब तक ठेकेदारों और वरिष्ठों की जवाबदेही तय नहीं होती, केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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