National Childrens Science Exhibition Bhopal: युवा वैज्ञानिक प्रदर्शनी में दिखे ऐसे इनोवेशन जिसे देख दंग रह जाएंगे आप

भोपाल में 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी चल रही है, जो 18-23 नवंबर तक रहेगी। श्यामला हिल्स स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में आयोजित इस छह दिवसीय कार्यक्रम में देश के 31 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आए 900 स्टूडेंट्स अपने नवाचारी विज्ञान मॉडल प्रस्तुत करेंगे।

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National Childrens Science Exhiition Bhopal


हाइलाइट्स        

  • तकनीक में बाल वैज्ञानिकों की शानदार भागीदारी
  • भोपाल में 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी 
  • 900 छात्रों ने पेश किए नवाचारी विज्ञान मॉडल  

रिपोर्ट - शिवानी द्विवेदी 

National Childrens Science Exhibition Bhopal: हमारी छोरी, छोरों से कम हें के...ये तो हमने सुना है, पर अगर ये कहा जाए कि हमारे भारत के युवा किसी से कम हें के, तो ये गलत नहीं होगा। हमारा देश तकनीकी क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ रहा है और अब बाल वैज्ञानिक भी इसमें अपना योगदान दे रहे हैं। बता दें, इस समय भोपाल में 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी चल रही है, जो 18 नवंबर से लेकर 23 नवंबर तक रहेगी। 

श्यामला हिल्स स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में आयोजित इस छह दिवसीय कार्यक्रम में देश के 31राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आए लगभग 900 स्कूली छात्र-छात्राएं अपने नवाचारी विज्ञान मॉडल प्रस्तुत कर रहे हैं। बंसल न्यूज़ ने छात्रों से बातचीत की और उनके बनाए मॉडल्स देखें और जाना कि कैसे बाल वैज्ञानिकों ने अपनी सूझ- बूझ से बेहतरीन प्रोजेक्टस पर काम किया जो आने वाले कल का चेहरा बदल सकती है। आइए छात्रों द्वारा बनाए गए प्रोजेक्टस पर आपको विस्तार से  बताते हैं।

जंगली जानवरों को ट्रेंकुलाइज करेगा यह रोबोट 

उत्तर प्रदेश के सीतापुर से आए युवा वैज्ञानिक उत्कर्ष वर्मा ने जंगली जानवरों को ट्रेंकुलाइज करने के लिए अनोखा मॉडल तैयार किया है। उत्कर्ष ने अपने मॉडल के बारे में बात करते हुए बताया कि उसका बनाया हुआ यह मॉडल वाइल्ड एनिमल एंड ह्यूमन सेफ्टी एडवांस एआई विज़न है। अगर कोई जंगली जानवर जंगल या गांवों में छिपा हुआ या घूमता पाया जाता है तो ड्रोन उसपर कड़ी निगरानी रखेगा और तुरंत ट्रेस करके रोबोट को सिग्नल देगा, और रोबोट तुरंत आकर जंगली जानवरों को ट्रेंकुलाइज़ कर लेगा। 

विकलांग व्यक्तियों के लिए बनाई ये स्मार्ट व्हील चेयर

ओडिशा की छात्रा ने विकलांग व्यक्तियों के लिए एक बहुत ही अनूठी स्मार्ट व्हील चेयर इनोवेट की है, जिसे अस्पताल, घर या बाहर जाते समय भी यूज़ कर सकते हैं। छात्रा ने बताया कि इसे अस्पताल में व्हील चेयर, स्ट्रैचर और बैड जैसे भी इस्तेमाल कर सकते हैं साथ ही इसकी सबसे खास बात यह है कि इस स्मार्ट व्हील चेयर को विकलांग व्यक्ति खुद मोबाइल के वॉइस कमांड  से आगे-पीछे चला सकता है। और अगर आप हैंडीकैप पर्सन को इस व्हील चेयर पर बाहर लेकर जाएं, और अचानक बारिश हो जाए तो तो घबराने की बात नहीं है क्योंकि इसमें एक वॉटर सेंसर लगा हुआ है जिससे सिर्फ एक बटन दबाने से ऊपर एक प्लास्टिक की कवर व्यक्ति को ढक देगी।madhya pradesh news

ब्लाइंड व्यक्तियों को मिलेगी तीसरी आंख

उत्तर प्रदेश के दो छात्रों ने ब्लाइंड व्यक्तियों के लिए थर्ड आई विजुअली इम्पेयर्ड मॉडल तैयार किया, जिसमें उन्होनें एक ऐसा गॉगल्स तैयार किया हैं, जो 70 मीटर की रेंज पर मौजूद ऑब्जेक्ट के बारे में व्यक्ति को साउंड सिग्नल देता है ताकि विजुअली इम्पेयर्ड पर्सन अलर्ट हो जाएं। इसके साथ ही छात्रों ने 'लाइव डेमो' देकर भी दिखाया कि आखिर ये चश्मा कैसे काम करता है। Shyamla hills

अब स्कूटी को बोलिए बाय-बाय...

आंध्र प्रदेश के एक छात्र ने 3 इन वन बाइसिकल बनाई, जो सोलर पैनल और बैटरी से चार्ज होती है, और अगर रास्ते में कहीं चार्जिंग खत्म हो जाए, तो आप पैडल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। बता दें, इसकी कीमत 25,000 है। छात्र ने बताया कि चार्ज करने के बाद अगर आप 30 किमी तक इससे कहीं जाते हैं, तो 3 घण्टे तक इसकी बैटरी चलेगी। छात्र ने साइकिल में एक गोल राउंड लगाकर भी दिखाया, और बताया कि कैसे इसमें स्कूटी जैसे चाबी लगाकर एक्सीलेटर देकर हमें इसे स्टार्ट कर सकते हैं।MP

हिमाचल की कृतिका ने बनाया इको-फ्रेंडली सेनेटरी पैड

हिमाचल प्रदेश की कृतिका ने लड़कियों की हेल्थ को ध्यान में रखते हुए इको-फ्रेंडली सेनेटरी पैड तैयार किए हैं, कृतिका ने बताया कि यह पैड  मार्केट के पैड से काफी अलग है, जो पैड मार्केट में मिलते हैं वो मिट्टी में डिस्पोज़ नहीं होते हैं और उसमें काफी हार्मफुल केमिकल्स होते हैं जो हमारी बॉडी के लिए सही नहीं होते है। कृतिका और उनकी साथी का ऐसा कहना है कि उनका यह पैड बनाना फैब्रिक से बनाया हुआ है, जो पूरे तरीके से नेचुरल है और इसे सिर्फ 2 से 3 बार यूज़ किया जा सकता है। 

इन बच्चों के कमाल के प्रोजेक्ट देखकर साफ लगता है कि हमारा भारत का भविष्य बहुत चमकदार है। छोटे-छोटे बच्चे अपनी समझ और मेहनत से ऐसे आइडिया बना रहे हैं जो इंसानों, जानवरों, पर्यावरण, सबकी मदद करेंगे। सच में, अगर आज ये बच्चे इतना कर सकते हैं, तो आने वाले समय में ये देश को एक नई ऊँचाई पर ले जाएंगे। 

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