मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: एमपी में अप्रैल से गेस्ट टीचर भर्ती, स्कूटी, लैपटॉप, यूनिफार्म मिलेंगे, आदिशंकराचार्य गुरुकुलम की तैयारी

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग की नई कार्ययोजना के तहत प्रदेश में 'त्रि-भाषा फॉर्मूला' को जमीन पर उतारने से लेकर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने तक के लिए टाइम लाइन फिक्स कर दी गई है।

MP School Education Department Mission 2028

MP School Education Department Mission 2028: मध्यप्रदेश में स्कूली शिक्षा का स्वरूप अब नए शैक्षणिक सत्र में पूरी तरह बदलने जा रहा है।

मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग की नई कार्ययोजना के तहत प्रदेश में 'त्रि-भाषा फॉर्मूला' को जमीन पर उतारने से लेकर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने तक के लिए टाइम लाइन फिक्स कर दी गई है। मध्यप्रदेश सरकार के दो साल का कार्यकाल पूरा होने के अवसर पर MP स्कूल शिक्षा व परिवहन विभाग मंत्री राव उदय प्रताप सिंहने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकार दी।

1. एमपी में गुरुकुल और रिसर्च सेंटर

राज्य सरकार का लक्ष्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना है। इसके लिए दो बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो रहा है।

आदिशंकराचार्य गुरुकुलम: प्रथम चरण में राजगढ़ और नरसिंहपुर जिलों में इनकी स्थापना की जाएगी। यहाँ छात्रों को संस्कृत, वेदों और योग की विशेष शिक्षा दी जाएगी।

गौ-अनुसंधान केंद्र: प्रदेश में गाय पर आधारित एक विशेष रिसर्च सेंटर भी बनाया जाएगा, जहां वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गाय के महत्व और उपयोगिता पर अध्ययन होगा।

2. 'सांदीपनि' स्कूल और इंफ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प

विभाग ने स्कूलों की सूरत बदलने के लिए त्रि-वर्षीय रोडमैप तैयार किया है:

सांदीपनि स्कूल: भविष्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हायर सेकेंडरी स्कूलों को 'सांदीपनि स्कूल' के रूप में नई पहचान दी जाएगी।

जीर्णोद्धार: प्रदेश के जर्जर स्कूल भवनों, बाउंड्रीवाल और शौचालयों का निर्माण अगले तीन वर्षों में पूरा किया जाएगा।

स्मार्ट लर्निंग: सत्र 2026-27 तक सभी स्कूलों में ICT लैब और स्मार्ट क्लासेस स्थापित करने का लक्ष्य है।

3. विद्यार्थियों के लिए संसाधनों की बौछार

अप्रैल 2026 में नया सत्र शुरू होने से पहले छात्रों को सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने का दावा किया गया है।

छात्रों को लैपटॉप, स्कूटी, यूनिफॉर्म, किताबें और साइकिल समय पर दी जाएंगी।

विकासखंड स्तर पर 'बुक फेयर' लगेंगे, जहां प्राइवेट स्कूल के बच्चों को भी कम दरों पर बैग और किताबें मिल सकेंगी।

4. शिक्षक भर्ती और छात्रावास प्रबंधन

अतिथि शिक्षक: पिछले साल के 76 हजार पदों की तर्ज पर इस बार 1 अप्रैल से ही अतिथि शिक्षकों की जॉइनिंग प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

डिजिटल हॉस्टल: छात्रावासों में प्रवेश और प्रबंधन को पारदर्शी बनाने के लिए नया सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है, जिससे ऑनलाइन मॉनिटरिंग होगी।

5. एग्जाम के लिए 'प्राइवेट कोचिंग' जैसी तैयारी

सरकारी स्कूलों का शैक्षणिक स्तर सुधारने के लिए अब प्राइवेट संस्थानों की रणनीति अपनाई जाएगी।

एडिशनल क्लासेज: छात्रों को परीक्षा के लिए अतिरिक्त कोचिंग दी जाएगी।

एग्जाम डे सपोर्ट: जिस दिन पेपर खत्म होगा, उसी दिन नियमित क्लास लगाकर छात्रों को अगले पेपर के लिए तैयार किया जाएगा।

6. व्यावसायिक शिक्षा और एग्रीकल्चर पर जोर

प्रदेश के 100% हायर सेकेंडरी स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने का लक्ष्य है।

पिछले वर्ष 690 स्कूलों में 'एग्रीकल्चर' विषय शुरू करने के बाद अब इसे प्रदेश भर में विस्तार दिया जाएगा।

7. 'डाइट' (DIET) बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

दूसरे चरण में प्रदेश के 10 जिलों- बालाघाट, पन्ना, नरसिंहपुर, उज्जैन, शाजापुर, शहडोल, सतना, उमरिया, दमोह की 'डाइट' का उन्नयन कर उन्हें 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' बनाया जाएगा।

8. भाषाई बाधा होगी दूर:

नई शिक्षा नीति के तहत अब छात्र अपनी मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।

क्षेत्रीय कनेक्ट: बुंदेलखंड में बुंदेलखंडी, मालवा में मालवी और निमाड़ में निमाड़ी भाषा में पुस्तकें उपलब्ध होंगी।

89 जनजातीय ब्लॉक: प्रदेश के 89 ट्राइबल विकासखंडों में 49 बुकलेट्स का 12 स्थानीय भाषाओं में अनुवाद कर उपलब्ध कराया गया है।

9. अब ऑनलाइन होगी स्कूलों की मान्यता

निजी स्कूल संचालकों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। विभाग एक एडवांस ऑनलाइन पोर्टल विकसित कर रहा है।

पारदर्शी प्रक्रिया: मान्यता (Recognition), निरीक्षण और अपील की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी।

दफ्तरों से मुक्ति: स्कूल संचालकों को अब भोपाल मुख्यालय या जेडी (JD) कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। सभी कार्य घर बैठे पोर्टल के जरिए पूरे किए जा सकेंगे।

10. भोपाल में बनेगा देश का मॉडल कार्यालय

भोपाल में एक अत्याधुनिक और भव्य प्रशासनिक भवन बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जो पूरे देश के लिए एक नजीर बनेगा:

22 मंजिला इमारत: स्कूल शिक्षा विभाग एक विशाल 22 मंजिला भवन बनाने की योजना पर काम कर रहा है।

यूनिफाइड ऑफिस: इस एक ही बिल्डिंग में शिक्षा विभाग के सभी बोर्ड और अनुभाग संचालित होंगे, जिससे समन्वय बेहतर होगा।

कमर्शियल स्पेस: इस बिल्डिंग के एक हिस्से में व्यावसायिक दुकानें भी बनाई जाएंगी, जिससे राजस्व प्राप्त हो सके।

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