MP CPCT एक्जाम का विरोध: डायरेक्ट रिक्रूटमेंट में लागू रखे सीपीसीटी, अनुकंपा और प्रमोट कर्मचारियों के लिए नहीं

मध्यप्रदेश के वन भवन मुख्यालय में कर्मचारियों ने सीपीसीटी परीक्षा के नियमों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।  तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि सीपीसीटी की शर्त अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले परिवारों के लिए जी का जंजाल बन गई है।

MP CPCT Exam

MP CPCT Exam: मध्यप्रदेश के वन भवन मुख्यालय में कर्मचारियों ने सीपीसीटी (Computer Proficiency Certification Test) परीक्षा के नियमों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। 

कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि सीपीसीटी की कठिन शर्तों के कारण कई परिवारों की रोजी-रोटी छिन रही है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि 26 फरवरी 2015 से लागू सीपीसीटी की शर्त अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले परिवारों के लिए जी का जंजाल बन गई है।

CPCT पास नहीं तो अनुकंपा कर्मियों को निकाल रहे

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विरोध प्रदर्शन में प्रदेश सहित जिले के पदाधिकारी शामिल हुए।

तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके आश्रित (पत्नी या बच्चे) को अनुकंपा नियुक्ति तो मिल जाती है, लेकिन परिवीक्षा अवधि (Probation Period) के भीतर सीपीसीटी पास न कर पाने पर उन्हें नौकरी से निकाला जा रहा है।

सेवा खत्म करने के नोटिस थमा दिए गए

वन विभाग सहित कई अन्य विभागों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है या उन्हें सेवा खत्म के नोटिस थमा दिए गए हैं। कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने दोहरी नीति अपनाने की मांग रखी है:

क्या है कर्मचारियों की प्रमुख मांग ?

सीधी भर्ती में रहे अनिवार्य: नई भर्ती (Direct Recruitment) के माध्यम से आने वाले उम्मीदवारों के लिए सीपीसीटी को लागू रखा जाए।

इनके लिए खत्म हो शर्त: चतुर्थ श्रेणी से सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नत (Promotion) होने वाले कर्मचारियों और अनुकंपा (Compassionate Appointment) के आधार पर नौकरी पाने वालों पर से यह अनिवार्यता तुरंत हटाई जाए।

मानसिक-आर्थिक तौर पर परेशान है कई परिवार

सभा को तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के संरक्षक एल.एन. कैलासिया, भोपाल जिला अध्यक्ष मोहन अय्यर, और महामंत्री मोहम्मद सलीम ने भी संबोधित किया। उन्होंने एक स्वर में कहा कि जो परिवार पहले ही मानसिक और आर्थिक पीड़ा से गुजर रहा है, उस पर इस तरह की परीक्षा थोपना अमानवीय है।

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