मध्यप्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण पर बड़ा अपडेट: पदोन्नति के लिए हर विभाग में बनेगी कमेटी, एमपी सरकार ने दिया जवाब, HC में फैसला सुरक्षित

रिपोर्ट: अमित सोनी, जबलपुर जबलपुर हाईकोर्ट में मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को सुनवाई हुई। जिसमें मध्यप्रदेश सरकार की ओर से अपना विस्तृत स्पष्टीकरण पेश किया। सरकार की ओर से बताया गया कि अब हर विभाग में प्रमोशन की प्रक्रिया के लिए अलग-अलग कमेटियां गठित की जाएंगी।

MP New Promotion Policy 2025

रिपोर्ट: अमित सोनी, जबलपुर

MP New Promotion Policy 2025: मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है।

जबलपुर हाईकोर्ट में मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को सुनवाई हुई। जिसमें मध्यप्रदेश सरकार की ओर से अपना विस्तृत स्पष्टीकरण पेश किया। सरकार की ओर से बताया गया कि अब हर विभाग में प्रमोशन की प्रक्रिया के लिए अलग-अलग कमेटियां गठित की जाएंगी। ये कमेटियां सुनिश्चित करेंगी कि प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े सभी नियमों और प्रावधानों का विधिवत पालन हो।

सपाक्स ने नई प्रमोशन पॉलिसी को दी चुनौती

सुनवाई के दौरान कर्मचारी संगठन सपाक्स ने राज्य सरकार की नई प्रमोशन पॉलिसी को अदालत में चुनौती दी, हालांकि, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अंतिम निर्णय कोर्ट के फैसले के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। एमपी के सभी सरकारी कर्मचारियों को कोर्ट के फैसले का इंतजार है।

जानें क्यों लगी थी प्रमोशन पर रोक ?

आरक्षण का प्रावधान: तत्कालीन राज्य सरकार ने साल 2002 में पदोन्नति के नियम बनाते हुए प्रमोशन में आरक्षण की व्यवस्था लागू की थी।
परिणाम: इस प्रावधान के चलते आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति मिलती रही, जबकि अनारक्षित वर्ग के कर्मचारी पीछे छूट गए।
कोर्ट में चुनौती: जब इस असंतुलन और विवाद ने तूल पकड़ा, तो कर्मचारी अदालत पहुँचे और उन्होंने प्रमोशन में आरक्षण को समाप्त करने की मांग की।
कर्मचारियों का तर्क: कोर्ट में यह तर्क दिया गया कि पदोन्नति का लाभ केवल एक ही बार दिया जाना चाहिए (न कि हर स्तर पर)।
हाईकोर्ट का निर्णय: इन तर्कों पर विचार करते हुए, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2016 को मप्र लोक सेवा (पदोन्नति) नियम 2002 को अमान्य (खारिज) कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में अपील: राज्य सरकार ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
वर्तमान स्थिति: शीर्ष कोर्ट ने मामले में ‘यथास्थिति बनाए रखने’ का आदेश दिया, जिसके कारण तब से लेकर अब तक (2016 से) प्रदेश में पदोन्नति पर रोक लगी हुई है।

ये है प्रमोशन की नई पॉलिसी

पदों का वर्गीकरण: उपलब्ध रिक्त पदों को अनुसूचित जाति (SC – 16%), अनुसूचित जनजाति (ST -  20%), और अनारक्षित वर्ग के हिस्सों में आनुपातिक रूप से विभाजित किया जाएगा।

भर्ती प्राथमिकता: पद भरने की प्रक्रिया में सबसे पहले SC और ST वर्ग के पद भरे जाएंगे।

शेष पदों के लिए: इन आरक्षित पदों को भरने के बाद, बचे हुए पदों के लिए सभी वर्गों के दावेदारों को मौका दिया जाएगा।

MP New Promotion Policy 2025

लिस्ट बनाने का आधार (श्रेणी 1): क्लास-1 स्तर के अधिकारियों (जैसे कि डिप्टी कलेक्टर) के लिए चयन सूची योग्यता (Merit) और वरिष्ठता (Seniority) दोनों के आधार पर तैयार की जाएगी।

लिस्ट बनाने का आधार (श्रेणी 2): क्लास-2 तथा उससे निचले स्तर के पदों के लिए वरिष्ठता (Seniority) को ही एकमात्र आधार बनाकर चयन सूची बनाई जाएगी।

खबर अपडेट की जा रही है...

ये भी पढ़ें: MP में प्रमोशन में आरक्षण का मामला: नई प्रमोशन पॉलिसी में SC की गाइडलाइन का कहां-कैसे पालन किया, HC ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

यह भी पढ़ें
Here are a few more articles:
Read the Next Article