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MP JUDA Strike: मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर प्रभावित हो रही हैं। लंबित स्टाइपेंड संशोधन और 2021 के समझौते को लागू करने की मांग को लेकर प्रदेश के करीब 8,000 जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। इस बीच, जबलपुर पहुंचे उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उन्हें काम पर लौटने की अपील की है।
स्टाइपेंड को लेकर जूडॉ की हड़ताल
मध्यप्रदेश में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JUDA) और सरकार के बीच तकरार बढ़ गई है। प्रदेश के रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न पिछले तीन दिनों से काली पट्टी बांधकर विरोध जता रहे थे, लेकिन मांगें पूरी न होने पर अब वे पूर्ण हड़ताल की ओर बढ़ गए हैं। हड़ताल का सबसे ज्यादा असर ओपीडी (OPD) और इलेक्टिव सर्जरी (पूर्व निर्धारित ऑपरेशन) पर पड़ रहा है। हालांकि, मानवता के नाते डॉक्टरों ने आपातकालीन सेवाओं को अभी सुचारू रखा है।
डॉक्टर्स प्रतिनिधिमंडल की मंत्री से मुलाकात
जबलपुर प्रवास के दौरान डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। मुलाकात के बाद मंत्री शुक्ल ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि, "जूनियर डॉक्टरों की समस्याओं का जल्द समाधान निकाला जाएगा। मेरी उनसे विस्तार से बातचीत हुई है और सरकार समाधान के लिए पूरी तरह प्रयासरत है।" उन्होंने डॉक्टरों से अपील की है कि मरीजों की सुविधा को देखते हुए वे जल्द काम पर वापस लौटें।
क्यों हो रही है हड़ताल?
जूनियर डॉक्टरों का मुख्य विरोध स्टाइपेंड संशोधन को लेकर है। दरअसल, राज्य सरकार ने 7 जून 2021 को एक आदेश जारी किया था। इसके तहत जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड (मानदेय) में महंगाई के आधार पर बढ़ोतरी की जानी थी, जिसे 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि समय बीत जाने के बाद भी न तो बढ़ा हुआ स्टाइपेंड मिला और न ही पिछले महीनों का बकाया (एरियर) दिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने कई बार सरकार और अधिकारियों को अपनी समस्या बताई, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो मजबूरन उन्हें हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा।
मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
डॉक्टरों के काम बंद करने से अस्पतालों में लंबी लाइनें देखी जा रही हैं। जूडा ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे ओपीडी सेवाएं नहीं देंगे। ऑपरेशन थिएटर (OT) में भी केवल उन्हीं मरीजों को प्राथमिकता दी जा रही है जो गंभीर स्थिति में हैं।
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