जबलपुर-दमोह फोरलेन का भारी विरोध: बेघर होने के डर से सड़कों पर उतरीं महिलाएं, ग्रामीणों और करणी सेना ने घेरा NHAI ऑफिस, 15 दिन का अल्टीमेटम

जबलपुर-दमोह फोरलेन के निर्माण के विरोध में बोरिया बस्ती के ग्रामीणों और करणी सेना ने NHAI कार्यालय का घेराव किया। करणी सेना ने बेघर हो रहे लोगों के हक में 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है।

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Jabalpur Damoh Fourlane Protest: जबलपुर-दमोह राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-34) को फोरलेन में बदले जाने की योजना अब विवादों के घेरे में आ गई है। परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की जद में आ रहे बोरिया बस्ती के सैकड़ों ग्रामीणों ने शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन करते हुए NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के कार्यालय का घेराव किया। करणी सेना के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि विकास के नाम पर गरीबों को बेघर करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। करणी सेना ने NHAI को 15 दिन का समय दिया है ताकि ग्रामीणों के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता निकाला जा सके।

NH-34 चौड़ीकरण को लेकर विवाद

जबलपुर से दमोह के बीच बनने वाले फोरलेन मार्ग के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होते ही ग्रामीणों का आक्रोश भड़क उठा है। बोरिया बस्ती के रहवासियों का कहना है कि सड़क को 70 फीट से बढ़ाकर 150 फीट किया जा रहा है, लेकिन अधिग्रहण केवल एक तरफ से किया जा रहा है। इस पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के कारण बस्ती के लगभग 50 से 70 पक्के मकान पूरी तरह जमींदोज हो जाएंगे और 150 से अधिक लोग बेघर हो जाएंगे।

बस्ती के लोगों ने खोला मोर्चा

प्रदर्शन के दौरान बोरिया बस्ती के निवासियों ने प्रशासन और NHAI पर गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि फोरलेन के लिए जमीन का अधिग्रहण न्यायसंगत तरीके से नहीं किया जा रहा है। सड़क को एक तरफा चौड़ा किया जा रहा है, जिससे केवल बस्ती के गरीबों के आशियाने उजड़ रहे हैं। महिलाओं ने कहा कि वे पीढ़ियों से यहाँ रह रही हैं, लेकिन अब बिना किसी ठोस पुनर्वास योजना या वैकल्पिक जमीन के उन्हें बेघर करने की साजिश रची जा रही है।

करणी सेना का अल्टीमेटम

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग प्रताप राघव ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लेकर चेतावनी देते हुए कहा "बेहद दुखद है कि क्षेत्रीय विधायक और मंत्री गरीबों की पीड़ा सुनने के लिए आगे नहीं आए। एक तरफ सरकार वन्यजीवों के लिए करोड़ों के कॉरिडोर बनाती है, तो दूसरी तरफ दशकों से बसे इंसानों को बिना किसी पुनर्वास योजना के उजाड़ा जा रहा है।" उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर ग्रामीणों के हित में ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो करणी सेना उग्र आंदोलन करेगी।

अधिग्रहण में पक्षपात के आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि रोड के सेंटर से दोनों तरफ बराबर भूमि अधिग्रहण करें। स्थानीय निवासी सतीश पटेल और सुनीता बर्मन ने आरोप लगाया कि सड़क के सेंटर पॉइंट से दोनों तरफ बराबर जमीन लेने के बजाय केवल बस्ती की तरफ दबाव बनाया जा रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि घनी बस्ती वाले इलाकों में सड़क की चौड़ाई 150 फीट के बजाय 120 फीट की जाए ताकि घर बच सकें। साथ ही, मुआवजे के साथ-साथ विस्थापितों को घर बनाने के लिए वैकल्पिक जमीन भी दी जाए।

NHAI का रुख: फिलहाल अधिग्रहण पर रोक

प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों ने बैकफुट पर आते हुए ग्रामीणों को शांत कराया। अधिकारियों ने स्पष्ट आश्वासन दिया कि वर्तमान में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को रोक दिया गया है। प्राधिकरण ने स्वीकार किया कि कोई भी कदम उठाने से पहले प्रभावित परिवारों के साथ बैठकर चर्चा की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना के ऐसे तकनीकी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है जिससे बस्ती को कम से कम नुकसान हो और ग्रामीणों के हितों की रक्षा की जा सके।

बायपास की जगह नहीं, चौड़ीकरण मजबूरी

NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए बताया कि नियमों के तहत फोरलेन के लिए 150 फीट भूमि का अधिग्रहण अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोरिया और उसके आसपास के गांवों की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि वहां 'बायपास' का कोई प्रावधान (प्रोविजन) संभव नहीं है, यही कारण है कि मौजूदा मुख्य मार्ग को ही चौड़ा करना पड़ रहा है। साहू ने आगे बताया कि इस क्षेत्र में ट्रैफिक सुगमता के लिए 'फ्लाईओवर' का निर्माण भी प्रस्तावित है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनता की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जो भी सर्वमान्य व तकनीकी रूप से सही विकल्प होगा, उसी पर काम आगे बढ़ाया जाएगा।

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