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रिपोर्ट: लीलाधर जाटव, कटनी
Katni Jila Panchayat Accountant Bribery Case: मध्यप्रदेश के कटनी जिला पंचायत कार्यालय के एक अकाउंटेंट को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने ट्रैप किया है।
दरअसल, कटनी जिले के बसाड़ी ग्राम पंचायत सचिव आशीष कुमार दुबे घूस लेने के मामले में निलंबित किया गया था। इस मामले में कागजी प्रोसेस आगे बढ़ाने के लिए पंचायत सचिव अकाउंटेंट सतेंद्र सोनी से मिला, लेकिन पिछले करीब एक साल से वह प्रोसेस आगे नहीं बढ़ा रहा था। यह अकाउंटेंट जिला पंचायत कार्यालय में कार्यरत हैं। अकाउंटेंट ने सस्पेंड पंचायत सचिव से एक महंगे मोबाइल की डिमांड कर डाली, फिर क्या अकाउंटेंट से 54 हजार रुपए की रिश्वत देने पर बात बनी। सस्पेंड पंचायत सचिव ने जबलपुर लोकायुक्त पुलिस को अकाउंटेंट की शिकायत कर दी। लोकायुक्त पुलिस ने सस्पेंड पंचायत सचिव की मदद से अकाउंटेंट को ट्रैप किया।
54 हजार रुपए कीमत का Vivo V-70 रिश्वत में मांगा
सस्पेंड सचिव आशीष कुमार दुबे ने मीडिया को बताया कि मेरी बहाल की फाइल आगे बढ़ाने के लिए जिला पंचायत कार्यालय के अकाउंटेंट सतेंद्र सोनी ने रिश्वत के तौर पर 54 हजार रुपए कीमत का Vivo V—70 मोबाइल मांगा था। मोबाइल महंगा होने से मैंने किस्तों में रिश्वत देने की बात कही। पहली किस्त के रूप में 5 हजार रुपए देने आया था।
बाड़ा जनपद के घूस केस में सह आरोपी था सचिव
सस्पेंड सचिव आशीष कुमार दुबे के मुताबिक, जून 2024 में बाड़ा जनपद में पदस्थ संजय चर्तुवेदी ने किसी पंचायत सचिव से रिश्वत की डिमांड की थी। उस संबंध में पंचायत सचिव जनपद कार्यालय पहुंचे। उस समय मैं संजय चर्तुवेदी के कार्यालय में बैठा था, जहां मेरी भी वाइस रिकार्ड हो गई थी। इस मामले में मुझे सह आरोपी बनाया गया था।
मुख्य आरोपी पर विभागीय कार्रवाई नहीं की गई
मुख्य आरोपी संजय चर्तुवेदी पर विभागीय कार्रवाई नहीं हुई। मुझे छह महीने बाद सस्पेंड किया था। विभागीय जांच भी बैठाई गई। मैंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने 30 दिन में कार्रवाई के आदेश जारी किए, लेकिन अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया।
मार्च 2025 में कोर्ट ने दिया था बहाली का आदेश
जबलपुर लोकायुक्त टीआई ब्रजमोहन नरवरिया के अनुसार, एक ट्रैप कार्रवाई में सह आरोपी के रूप में आशीष कुमार दुबे सस्पेंड चल रहे थे। कार्रवाई से बहाली के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। मार्च 2025 में कोर्ट ने बहाली का आदेश जारी किया। जिसके लिए जिला पंचायत अकाउंटेंट सतेंद्र सोनी से मिले। जहां अकाउंटेट सतेंद्र सोनी ने रिश्वत के रूप में Vivo V-70 मोबाइल मांगा था।
किस्तों में रिश्वत देने का सौदा ऐसे हुआ था तय
लोकायुक्त टीआई ब्रजमोहन नरवरिया के मुताबिक, आशीष कुमार दुबे की शिकायत पर सत्यापन में आरोप सही पाया गया। बातचीत के दौरान ये सामने आया कि आशीष ने कहा कि मेरे पास इतनी रकम नहीं है, लेकिन अकाउंटेंट में ये कहा कि आप किस्त में दीजिए। पहले 5 हजार, फिर 1 हजार और बहाले होने के बाद किस्तो में देते रहना। रिश्वत की पहली किस्त में 5 हजार रुपए लेते अकाउंटेंट को गिरफ्तार किया है।
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