MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: MPPSC में EWS कैंडिडेट्स 40 की उम्र के बाद भी कर सकेंगे आवेदन, इंदौर बेंच से उम्र सीमा में मिली आंतरिम राहत

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने आदेश जारी करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कैंडिडेट्स की उम्र सीमा में अंतरिम राहत दी है। इस आदेश के बाद से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कैंडिडेट्स में उम्मीद की किरण जगी है।

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MPPSC New Rules EWS Candidates: मध्यप्रदेश के प्रशासनिक क्षेत्र में नौकरी पाने का सपना देख रहे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कैंडिडेट्स के पक्ष में एक बड़ा फैसला आया है।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच से आदेश जारी करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कैंडिडेट्स की उम्र सीमा में अंतरिम राहत दी है। जारी आदेश के मुताबिक, अब ईडब्ल्यूएस के कैंडिडेट्स 40 वर्ष की उम्र के बाद भी राज्य सेवा परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। अदालत ने यह राहत गैर वर्दीधारी पदों के लिए आयु सीमा से आगे भी प्रोविजनल रूप से आवेदन और चयन प्रोसेस में हिस्सा लेने की अनुमति दी है। इस आदेश के बाद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कैंडिडेट्स में उम्मीद की किरण जगी है।

ऑनलाइन पोर्टल पर ही अयोग्य घोषित कर रहे

दरअसल, इंदौर के अभिषेक तिवारी ने असमानता को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास मिश्रा और अधिवक्ता धीरज तिवारी ने तर्क दिया कि योग्यता होने के बावजूद EWS अभ्यर्थी केवल 1 से 3 वर्ष अधिक उम्र के कारण ऑनलाइन पोर्टल पर ही अयोग्य घोषित कर दिए जा रहे हैं, जो समानता के संवैधानिक सिद्धांत के विरुद्ध है।

SC, ST, OBC, महिला समेत अन्य को छूट

याचिका में बताया कि MPPSC द्वारा 31 दिसंबर 2025 को जारी विज्ञापन में गैर-वर्दीधारी पदों के लिए 1 जनवरी 2026 की स्थिति में अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष तय की गई थी। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाएं, दिव्यांगजन, भूतपूर्व सैनिक और अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के पात्रों को आयु में छूट दी गई, लेकिन केवल EWS वर्ग को इससे वंचित रखा गया।

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राजस्थान में हजारों युवाओं को मिला संरक्षण

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राजस्थान जैसे राज्यों में EWS अभ्यर्थियों को आयु में छूट दी जा रही है, जहां पुरुष EWS को 5 वर्ष और महिला EWS को 10 वर्ष तक की राहत मिल रही है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि EWS को आयु छूट देना न केवल व्यवहारिक है, बल्कि प्रशासनिक रूप से स्वीकार्य भी है।

हस्तक्षेप न करते तो भर्ती प्रोसेस पूरी हो जाती

अदालत ने यह भी माना कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया जाता, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया पूर्ण हो जाती और याचिका निष्फल हो जाती, जिससे अभ्यर्थियों को अपूरणीय क्षति होती। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने EWS अभ्यर्थियों को अंतरिम संरक्षण प्रदान किया।

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