/bansal-news/media/media_files/2026/01/16/indore-high-court-decision-2026-01-16-09-51-53.jpg)
MP Women Reservation Decision Indore High Court: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के इंदौर बेंच की एकलपीठ ने सरकारी नौकरी में आरक्षण को लेकर एक बड़ा फैसला दिया है।
हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस जय कुमार पिल्लई की एकल पीठ ने स्पष्ट किया है कि अन्य राज्यों से ब्याह कर मध्यप्रदेश स्थायी रूप से बसने आईं महिलाओं को सरकारी नौकरी आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है। उसका जन्म दूसरे राज्य में होने की वजह से उसे Reservation से वंचित नहीं किया जा सकता।
एमपी में मूल निवासी, आरक्षित वर्ग की समानता जरूरी
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य राज्यों से आकर बस चुकी महिलाओं के प्रमोशन के लिए कुछ जरूरी शर्तें है, जिसमें कहा गया है कि जो महिला विवाह के बाद मध्यप्रदेश का मूल निवासी प्रमाण पत्र ले चुकी हैं। कैंडिडेट्स की जाति या समुदाय मूल राज्य और एमपी में समान आरक्षित श्रेणी यानी एससी, एसटी और ओबीसी में शामिल होना चाहिए।
कोर्ट ने कहा पात्र महिला कैंडिडेट्स को तत्काल नियुक्त करें
कोर्ट ने सख्त लहजे में यह भी कहा हैं कि भर्ती बोर्ड विज्ञापन में प्रकाशित शर्तों के अतिरिक्त अपनी ओर से कोई नई शर्त नहीं थोप सकता है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए भर्ती बोर्ड को निर्देश दिया है कि कि पात्र पाए जाने पर इन महिला अभ्यर्थियों को तत्काल नियुक्ति प्रदान की जाए। उन्हें वेतन, वरिष्ठता और सेवा से जुड़े सभी निहित लाभ उसी तिथि से दिए जाएं, जिससे अन्य सफल अभ्यर्थियों को मिले हैं।
क्यों और कैसे सामने आया यह पूरा मामला
यह विवाद उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान शुरू हुआ था। कुछ महिला कैंडिडेट्स ने आरक्षित वर्ग के तहत आवेदन कर लिखित परीक्षा पास की थी। हालांकि, दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) में चयन बोर्ड ने उनकी उम्मीदवारी यह कहकर निरस्त कर दी थी कि उनके जाति प्रमाण पत्र मध्यप्रदेश के बजाय उनके पैतृक राज्यों द्वारा जारी किए गए थे।
खबर अपडेट की जा रही
ये भी पढ़ें: मध्यप्रदेश में महंगी होगी शराब: अप्रैल से बढ़ेंगे देशी-विदेशी शराब के दाम, खजाना भरने के लिए ये कदम उठाएगी सरकार
/bansal-news/media/agency_attachments/2025/12/01/2025-12-01t081847077z-new-bansal-logo-2025-12-01-13-48-47.png)
Follow Us