/bansal-news/media/media_files/2026/02/07/indore-school-student-expelled-teachers-memes-supreme-court-notice-mp-govt-icse-hindi-news-zvj-2026-02-07-17-09-36.jpg)
Supreme Court Indore School Memes Case: इंदौर के एक प्रतिष्ठित स्कूल से निष्कासित (Expel) किए गए 14 वर्षीय छात्र के मामले में देश की सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। इंस्टाग्राम पर शिक्षकों के 'मीम्स' साझा करने के आरोप में स्कूल से निकाले गए 9वीं के छात्र के भविष्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी बच्चे की शिक्षा केवल इसलिए बाधित नहीं की जा सकती कि उसने डिजिटल मंच पर कोई गलती की है। अनुशासन के नाम पर बच्चे की शिक्षा नहीं रोकी जा सकती। कोर्ट ने MP सरकार और ICSE बोर्ड को 13 फरवरी तक जवाब देने को कहा है।
छात्र निष्कासन मामले में SC की टिप्पणी
मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित लिटिल वंडर्स कॉन्वेंट स्कूल के एक छात्र के निष्कासन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। जस्टिस बी.वी. नागरथना और जस्टिस उज्जल भुयान की खंडपीठ ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए मध्यप्रदेश सरकार, आईसीएसई (ICSE) बोर्ड और स्कूल प्रबंधन सहित सभी संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि यह मामला केवल स्कूल के नियमों और अनुशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बच्चे के मौलिक शिक्षा के अधिकार और उसके शैक्षणिक भविष्य से जुड़ा है। कोर्ट ने प्रशासन से पूछा है कि छात्र को बोर्ड परीक्षा में शामिल कराने के लिए क्या ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं? कोर्ट ने कहा- अनुशासन के नाम पर किसी बच्चे की शिक्षा बाधित करना स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने 13 फरवरी तक जवाब मांगा है कि छात्र की पढ़ाई जारी रखने के लिए क्या किया जा सकता है।
क्या है पूरा विवाद?
मामला तब शुरू हुआ जब 9वीं कक्षा के एक छात्र ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर इंस्टाग्राम पर एक प्राइवेट अकाउंट बनाया और शिक्षकों के कुछ 'आपत्तिजनक मीम्स' पोस्ट किए। स्कूल प्रबंधन को इसकी भनक लगते ही इसे 'चरित्रहीनता' और 'अनुशासनहीनता' करार देते हुए छात्र को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया। छात्र के परिजनों ने पहले इंदौर हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां से राहत न मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
वकील की दलील और निजता का सवाल
छात्र की ओर से एडवोकेट निपुण सक्सेना ने तर्क दिया कि 13-14 साल के बच्चे के कृत्य में 'आपराधिक मंशा' (Criminal Intent) देखना गलत है। उन्होंने दलील दी कि यदि स्कूलों को छात्रों की निजी डिजिटल लाइफ पर इतनी बड़ी कार्रवाई करने की छूट दी गई, तो यह बच्चों की निजता और उनके विकास के लिए घातक होगा। याचिकाकर्ता के अनुसार, 14 वर्षीय बच्चे के मजाक को आपराधिक मंशा मानकर स्कूल से निकालना अनुचित है।
हाईकोर्ट के सख्त संदेश पर SC का रुख
इससे पहले इंदौर हाईकोर्ट ने छात्र की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि समाज और छात्रों के बीच एक सख्त संदेश जाना चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अलग राय रखते हुए कहा कि अनुशासन जरूरी है, लेकिन वह इतना कठोर नहीं होना चाहिए कि छात्र का भविष्य ही दांव पर लग जाए।
13 फरवरी को अगली सुनवाई
छात्र का शैक्षणिक सत्र (Academic Session) बचाने के लिए कोर्ट ने अगली सुनवाई 13 फरवरी 2026 को तय की है। उस दिन यह तय होगा कि क्या छात्र उसी स्कूल में वापस लौटेगा या उसे किसी अन्य केंद्र से परीक्षा देने की विशेष अनुमति प्रदान की जाएगी।
Supreme Court, Indore Student Memes Case, Indore school teachers Memes Case, Indore news Indore student expulsion case | Little Wonders Convent School Indore not present in content
Supreme Court, Indore Student Memes Case, Indore school teachers Memes Case, Indore news
/bansal-news/media/agency_attachments/2025/12/01/2025-12-01t081847077z-new-bansal-logo-2025-12-01-13-48-47.png)
Follow Us