MP में डीपफेक ठगी का पहला केस: ठगों ने AI से बनाया लापता छात्र की किडनैपिंग का वीडियो, कत्ल की धमकी देकर माता-पिता से ठगे लाखों रुपए

इंदौर में एआई-डीपफेक तकनीक से ठगी का प्रदेश का पहला सनसनीखेज मामला सामने आया है। ठगों ने घर से लापता हुए 10वीं के छात्र का फर्जी किडनैपिंग वीडियो बनाया और मां से एक लाख रुपए से ज्यादा ठग लिए।

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Indore AI Deepfake Fraud Kidnapping Case: मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर अब साइबर अपराधियों की नई और खतरनाक तकनीक 'डीपफेक' (Deepfake) का केंद्र बनती दिख रही है। यहां एआई (AI) का इस्तेमाल कर एक मां को उसके बेटे की मार डालने का फर्जी वीडियो दिखाकर एक लाख से ज्यादा रुपए की चपत लगा दी गई। शातिर बदमाशों ने सोशल मीडिया पर अपलोड की गुमशुदगी की फोटो से फर्जी किडनैपिंग वीडियो बनाया था। यह मामला न केवल पुलिस के लिए चुनौती है, बल्कि उन अभिभावकों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है जो सोशल मीडिया पर अपने बच्चों की जानकारी साझा करते हैं।

एआई-डीपफेक ठगी का पहला मामला

मध्यप्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (artifical Intelligence) के दुरुपयोग से ठगी का पहला मामला इंदौर में दर्ज किया गया है। शहर के एमआईजी (MIG) थाना क्षेत्र में रहने वाला 10वीं का एक छात्र जब पिता की डांट से नाराज होकर घर से निकला, तो उसे क्या पता था कि उसकी एक फोटो उसकी मां की रातों की नींद उड़ा देगी। शातिर ठगों ने छात्र की सोशल मीडिया पर मौजूद फोटो को एआई तकनीक के जरिए एक खौफनाक किडनैपिंग वीडियो में बदल दिया।

ठगों ने कैसे बुना मौत का फर्जी जाल?

दरअसल, छात्र 2 फरवरी 2026 को घर में नाराज होकर राजस्थान स्थित सांवरिया सेठ मंदिर दर्शन के लिए निकल गया था। परिजनों ने घबराहट में उसकी गुमशुदगी की जानकारी और फोटो सोशल मीडिया पर साझा कर दी। इसी फोटो को उठाकर ठगों ने डीपफेक वीडियो तैयार किया। वीडियो में छात्र को एक कुर्सी पर बंधा हुआ दिखाया गया, जिसकी गर्दन पर चाकू रखकर बदमाश उसे जान से मारने की धमकी दे रहे थे।

ठगों ने यूके (UK) के नंबर से मां को कॉल किया और धमकी दी कि यदि तुरंत पैसे नहीं भेजे तो वे बच्चे की किडनी और लिवर बेचकर अपनी रकम वसूल लेंगे। डरी हुई मां ने बिना सोचे-समझे ठगों द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड पर 1.02 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

छात्र लौटा तो खुली पोल

अगले दिन जब छात्र सुरक्षित घर वापस आया, तो उसने बताया कि वह तो मंदिर गया था और उसका कोई अपहरण नहीं हुआ था। तब परिजनों को अहसास हुआ कि वे एक बड़े डिजिटल फ्रॉड का शिकार हो गए हैं। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अपराधी अब इतने शातिर हो गए हैं कि वे पैनिक स्थिति का फायदा उठाने के लिए व्हाट्सएप पर पहले से रिकॉर्ड किए गए एआई वीडियो प्ले कर देते हैं, जो बिल्कुल असली लगते हैं। Indore News

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