इंदौर HC में डेथ ऑडिट रिपोर्ट पेश: सरकार ने दूषित पानी से स्वीकारी 16 मौतें, कोर्ट ने कहा- ठोस वजह और मेडिकल साक्ष्य गायब

Indore Death Audit Report: इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को प्रदेश सरकार ने इंदौर हाईकोर्ट में डेथ ऑडिट रिपोर्ट पेश कीं।

Indore Death Audit Report

Indore Death Audit Report: इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को प्रदेश सरकार ने इंदौर हाईकोर्ट में डेथ ऑडिट रिपोर्ट पेश कीं।

इंदौर बेंच में दूषित पानी से हुई 24 मौतों के मामले में करीब ढाई घंटे तक मैराथन सुनवाई चली। नगर निगम और प्रशासन की ओर से पेश रिपोर्ट को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की अदालत ने आई वॉश बताया। रिपोर्ट को अपर्याप्त और भ्रामक बताते हुए कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

वर्बल अटॉप्सी मेडिकल शब्द है या सरकार का ईजाद ?

सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव अनुराग जैन वर्चुअली जुड़े। सरकार ने 23 मौतों की ऑडिट रिपोर्ट पेश की, जिसमें से 16 मौतों को दूषित पानी से होना स्वीकार किया। कोर्ट ने रिपोर्ट में उपयोग किए वर्बल अटॉप्सी शब्द पर सवाल उठाया और पूछा कि क्या यह मेडिकल शब्दावली है या सरकार द्वारा ईजाद की गई है ? कोर्ट ने संदेह जताते हुए रिपोर्ट में मौतों के ठोस कारण और सहायक मेडिकल साक्ष्य गायब बताए हैं।

पहले 34 मानक, त्रासदी बाद 8 मानकों पर ही जांच

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने निगम के दावों की पोल खोलते हुए कई तकनीकी तक रखते हुए बताया कि प्रदूषण बोर्ड ने पूर्व में इंदौर के पानी की 34 मानकों पर जांच की थी, लेकिन वर्तमान त्रासदी के बाद निगम केवल 8 मानकों पर खानापूर्ति कर रहा है।

याचिकाकर्ता की मांग 16 बोरिंग सील कर दिए जाए

सरकार ने दावा किया कि जनवरी 2026 तक 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। नगर निगम ने 16 बोरिंग बंद करने की बात कही। जिस पर कोर्ट ने पूछा कि यदि काम इतना पूरा था, तो दूषित पानी घरों तक पहुंचा कैसे ? याचिकाकर्ता ने बोरिंग को पूरी तरह सील करने की मांग की, ताकि अनजाने में उसका उपयोग न कर ले।

मृतकों के जीवन की कीमत कम आंकी गईं

याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि मृतकों के परिजनों को रेडक्रॉस सोसायटी से दो-दो लाख रुपए मिले हैं। तर्क दिया गया कि अन्य हादसों में सरकार चार-चार लाख देता है, लेकिन दूषित पानी की भेंट चढ़े नागरिकों के जीवन की वैसी कीमत नहीं आंकी गई।

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रिपोर्ट तथ्यों को स्पष्ट नहीं, गुमराह करने वाली

कोर्ट ने डेथ ऑडिट रिपोर्ट को पढ़ने के बाद टिप्पणी करते हुए कहा कि रिपोर्ट में ठोस दस्तावेजों को अभाव है और यह तथ्यों को स्पष्ट करने के बजाय गुमराह करने वाली लगती है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा सुझाए विश्वस्तरीय थ्री पैरामीटर्स टेस्टिंग के तरीकों पर गंभीरता से विचार करें।

लंबी बहस के बाद हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

कोर्ट ने भागीरथपुरा के अलावा न्यायालय परिसर में भी पानी की आपूर्ति और स्वच्छता की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते सुधार के निर्देश दिए। कोर्ट में चली लंबी बहस सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।

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