UGC के नए नियमों पर सपाक्स ने जताई आपत्ति: अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी बोले-सामान्य वर्ग के हितों की हुई अनदेखी, यह समानता के नाम पर भेदभाव

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देश भर में विवाद छिड़ गया है। मध्यप्रदेश की सपाक्स पार्टी ने इन नियमों को सामान्य वर्ग के लिए पक्षपाती और असुरक्षित बताया है।

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UGC New Rules 2026 Controversy: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा परिसरों में समानता को बढ़ावा देने के लिए पेश किए गए 'नियम 2026' विवादों के घेरे में आ गए हैं। जहां आयोग इसे समावेशिता और भेदभाव मिटाने वाला कदम बता रहा है, वहीं सवर्ण समाज और सपाक्स (SAPAKS) जैसी पार्टियाँ इसे एकतरफा करार दे रही हैं। मध्यप्रदेश सपाक्स पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी ने इन नियमों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है और स्पष्ट किया है कि इसमें सामान्य वर्ग के अधिकारों और सुरक्षा की पूरी तरह अनदेखी की गई है।

यूजीसी कानून पर गतिरोध जारी

उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए यूजीसी ने 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026' का ड्राफ्ट पेश किया है। लेकिन इस कानून ने देश भर के शिक्षाविदों और सामान्य वर्ग के संगठनों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। इस मामले में छात्रों, शिक्षकों और शिक्षाविदों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अब मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सपाक्स पार्टी ने इन नियमों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है। 

सपाक्स ने किया नए नियमों का विरोध

सपाक्स के प्रदेश अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी ने कड़े शब्दों में कहा कि सरकार समानता का दावा कर रही है, लेकिन ये नियम कतई समान नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी का नया ढांचा कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसर में सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के हितों की रक्षा करने में विफल रहा है। त्रिवेदी के अनुसार, यदि सामान्य वर्ग के किसी व्यक्ति के साथ मारपीट या उत्पीड़न होता है, तो नए नियमों में उनके लिए सुरक्षा का कोई स्पष्ट तंत्र नहीं है। आरोप है कि सामान्य वर्ग के साथ होने वाली हिंसा पर नियम मौन हैं।

झूठी शिकायतों का डर

विवाद का एक बड़ा मुख्य कारण 'दुर्भावनापूर्ण शिकायतों' पर स्पष्टता का अभाव है। हीरालाल त्रिवेदी ने चिंता जताई कि यदि कोई व्यक्ति व्यक्तिगत रंजिश या दुर्भावना के कारण सामान्य वर्ग के किसी छात्र या शिक्षक के खिलाफ शिकायत करता है, तो ऐसी स्थिति में आरोपी की रक्षा के लिए या शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई का कोई ठोस प्रावधान नहीं रखा गया है।

वापसी की मांग तेज

सपाक्स का मानना है कि ये नियम परिसरों में सौहार्द बढ़ाने के बजाय समुदायों के बीच दूरी पैदा कर सकते हैं। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि इन नियमों में संशोधन नहीं किया गया या इन्हें वापस नहीं लिया गया, तो देशभर में सवर्ण समाज सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगा। फिलहाल, इस मामले पर छात्रों और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है।

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