
Regional AI Impact Summit 2026: मध्यप्रदेश के भोपाल स्थित ताज होटल में गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को रीजनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन किया गया। जिसमें एआई से कुपोषण और कृषि समस्याओं के समाधान समेत प्रमुख ​विषयों पर चर्चा की गई।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मोबाइल एआई लैब कौशल रथ का अवलोकन किया। यह रथ सभी जिलों के सरकारी स्कूलों, आईटीआई और कॉलेजों में एआई की बुनियादी शिक्षा की ट्रेनिंग देगा। मध्यप्रदेश सरकार यह मानती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए तकनीक नहीं बल्कि शासन, उद्योग, समाज यह सबके लिए परिवर्तनकारी शक्ति है। इसलिए हमारा राज्य एआई नीति भी लाने वाला है और एआई मिशन पर भी काम करेगा।
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प्रदेश के आईटीआई, पॉलिटेक्नि कॉलेजों में 30 डेटा-एआई लैब्स
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार जल्द ही अपनी एआई नीति और एआई मिशन भी लांच करेगा। समग्र आईडी डेटा को एआई से जोड़कर पर्सनलाइज्ड गवर्नेंस पर काम किया जा रहा है। भारत सरकार के सहयोग से प्रदेश के विभिन्न जिलों में आईटीआई और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में 30 डेटा और एआई लैब्स स्थापित की जा रही है। मध्यप्रदेश साइबर सुरक्षा में काफी आगे निकल चुका है, जो केरल और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों को परमर्श दे रहा है।
94% एक्यूरेसी के साथ कुपोषितों का एनालिसिस कर रहे हैं
मध्यप्रदेश एसईडीसी एमडी आशीष वशिष्ठ ने कहा कि डब्ल्यूएचओ एआईएमएल बेस न्यूट्रिशन फॉरकास्टिंग कर अगले 3 महीने में कुपोषित होने वाले बच्चों के बारे में 94% एक्यूरेसी के साथ एनालिसिस कर रहे हैं। इसी तरह एग्रीकल्चर रेवेन्यू के क्षेत्र में फसल गिरदावरी में एआईएमएल का इस्तेमाल कर रहे हैं। सही फसल का आइडेंटिफिकेशन बारिश, ओलावृष्टि की स्थिति में क्रॉप लॉस का सही अनुमान और पीएम फसल बीमा योजना में सही बीमा की कैलकुलेशन भी की जा रही है। हम वेक्टर बॉन्ड डिजीज आउटब्रेक प्रेडिक्शन पर भी काम कर रहे हैं।
एआई में जरूरी डेटा सेट्स, इसका एई कोष प्लेटफॉर्म तैयार
विज्ञान व प्रौघोगिकी मुख्य प्रशासनिक सचिव संजय दुबे ने बताया​ कि एक रिक्वायरमेंट होती है डेटा सेट्स की। बिकॉज एआई का ट्रेनिंग करने के लिए डाटा सेट्स की जरुरत होती है। उसके लिए हमने एक एई कोष प्लेटफॉर्म बनाया है। इसमें लगभग 6000 से ज्यादा डाटा सेट्स सरकारी, पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर के उपलब्ध कराए गए हैं। जिससे कि उसका हम कॉमन यूज कर सकते हैं। उसमें भाषिनी के भी डेटा सेट्स हैं। भाष के माध्यम से हम सीमलेस ट्रांसलेशन कर सकते हैं।
चैट जीपीटी जैसे साइट्स हमारे कल्चर, भाषा में नहीं
उन्होंने आगे कहा कि हिंदी टू अंग्रेजी या फिर किसी भी भाषा में हम किसी भी दे सकते हैं। तीसरी जो एक रिक्वायरमेंट होती है। एआई समिट, एआई इंप्लीमेंटेशन के लिए फाउंडेशन मॉडल्स की। एलएलएम्स जो हम कहते हैं, आम भाषा में हम लोग चैट जीपीटी, जेमिनी, क्लॉट ग्रॉक, इसका इस्तेमाल करते हैं। ये सब विदेशों में बनी हुई मॉडल्स हैं। ये कई बार भारतीय भाषाओं में और भारतीय कॉन्टेक्स्ट में हमारे कल्चर, हमारे हेरिटेज के हिसाब से सही नहीं काम कर सकती, क्योंकि उनके इनपुट डाटा में हमारे देश के डेटा सेट्स नहीं है। तो इस दिशा में हम अपने इंडीजीनस इंडियन एलएलएम्स को लिए सपोर्ट दे रहे हैं। लगभग 12 प्रोजेक्ट्स और इनमें दो से तीन लगभग तैयार है।
विकसित भारत 2047 के लिए एआई बहुत जरूरी
मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग दुबे ने कहा कि यदि हमें अपने विकसित भारत 2047 जो, विजन प्रधानमंत्री ने दिया है। उसे अचीव करना है तो, जो कैलकुलेशंस दिखाती है हमें, 8 से 9% की सस्टेन ग्रोथ करनी है और उस ग्रोथ के लिए एआई बहुत महत्वपूर्ण है। जब एआई आएगी तो उसके साथ नई इंडस्ट्रीज आएंगी। नए जॉब रोल्स डिफाइन होंगे। तो जो एकिस्टिंग जॉब लॉस होंगे, वह नए जॉब्स क्रिएट हो रहे होंगे। पब्लिक पॉलिसी हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी हो जाती है कि हम स्किलिंग पर फोकस करें।
अब रेलेवेंट बने रहना होगा, वरना आउटडेटेड हो जाएंगे
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि जो यंग बच्चे आ रहे हैं, उनको इस प्रकार से स्किल करें कि वो, नए जॉब रोल्स बनने वाले हैं। उन नए जॉब रोल्स के लिए वो, लोग तैयार हो और दूसरा जो जॉब डिस्प्लेसमेंट होगा। आजकल कोई व्यक्ति ये नहीं सोच सकता कि मैंने पढ़ के अपना जॉब ज्वाइन कर लिया और अब मुझे कुछ नहीं करना। बस अब रोजमर्रा में जाना है और वापस आना है। अब ऐसा नहीं है, आपको हर रोज सीखते रहना पड़ेगा। आपको रेलेवेंट बने रहना है, नहीं तो दो से तीन साल में आप आउटडेटेड हो जाएंगे।
देश में 49 करोड़ मजदूरों पर विशेष ध्यान देने की जरुरत
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि नीति आयोग ने एक अभी रिपोर्ट बनाई है, जिसमें यह माना गया है कि हमारे लगभग देश में 49 करोड़ मजदूर ऐसे हैं, जिनके ऊपर हमें विशेष ध्यान देने की जरुरत होगी। एश्योर करना पड़ेगा कि वो लोग बराबरी से आगे बढ़ पाए, प्रीस्किलिंग हो पाए।
इनसें एमओयू साइन किए
समिट के दौरान विभिन्न वैश्विक और राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ समझौते किए गए। जिसमें मुख्य रूप से सरकारी विभागों में क्लाउड और एआई एडॉप्शन के लिए गूगल, बहुभाषी यानी हिंदी के अलावा अन्य भाषाओं के एआई टूल्स से एकीकरण के लिए भाषिनी, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस संचालित करने NASSCOM और डेटा लैब व नेशनल एआई मिशन के सहयोग के लिए इंडिया एआई से समझौता साइन किया गया है।
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