मैहर में बांग्लादेशी घुसपैठ: मदरसा में पढ़ाने की आड़ में बंगाल से एमपी पहुंचा घुसपैठिया, फर्जी आईडी से लिया सरकारी फायदा, ऐसे खुली पोल

मध्यप्रदेश के मैहर में एक मदरसे में रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक का खुलासा हुआ है। वह 6 साल से फर्जी दस्तावेजों के जरिए स्थानीय निवासी बनकर रह रहा था और सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहा था।

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सांकेतिक फोटो।

Maihar Illegal Immigrant Bangladeshi Youth: मध्यप्रदेश के मैहर जिले से बड़ा मामला सामने आया है। यहां मुकुंदपुर के एक मदरसे में पढ़ाई और शिक्षण के नाम पर रह रहे एक संदिग्ध व्यक्ति की पहचान बांग्लादेशी घुसपैठिए के रूप में हुई है। कौसल आलम नाम का यह व्यक्ति पश्चिम बंगाल के रास्ते अवैध रूप से घुसपैठ कर पिछले 6 सालों से एमपी में रह रहा था। वह फर्जी आधार, वोटर आईडी और समग्र आईडी के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहा था। SIR (Special Intensive Revision) की जांच के दौरान उसकी फर्जी पहचान का भंडाफोड़ हुआ। पुलिस आरोपी को हिरासत में लेकर उसके स्थानीय मददगारों की तलाश कर रही है।

मैहर में बांग्लादेशी घुसपैठ का खुलासा

देशभर में बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर जारी बहस के बीच मध्यप्रदेश के मैहर जिले में प्रशासन ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। मुकुंदपुर इलाके में स्थित एक मदरसे से संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद जब जांच की गई, तो वहां रह रहे एक व्यक्ति के विदेशी होने का प्रमाण मिला। आरोपी कौसल आलम न केवल अवैध रूप से यहां रह रहा था, बल्कि उसने भारतीय नागरिक होने के तमाम फर्जी दस्तावेज भी तैयार कर लिए थे।

फर्जी आईडी से रह रहा था कौसल आलम

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कौसल आलम पिछले 6 वर्षों से मुकुंदपुर में रह रहा था। उसने स्थानीय स्तर पर फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और समग्र आईडी बनवा ली थी। इतना ही नहीं, उसने खुद को गरीबी रेखा के नीचे (BPL) का हितग्राही भी दर्ज करा लिया था और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का मुफ्त लाभ उठा रहा था।

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बंगाल के रास्ते मदरसा में पढ़ाने आया बांग्लादेशी

शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि आरोपी पश्चिम बंगाल की सीमा के रास्ते बांग्लादेश से भारत में दाखिल हुआ और भटकते हुए मध्यप्रदेश के मैहर पहुंचा। मतदाता सूची के शुद्धिकरण (SIR) और सत्यापन कार्य के दौरान जब दस्तावेजों की गहन जांच की गई, तो उसकी असलियत सामने आ गई। अधिकारियों को उसके दस्तावेजों में विसंगतियां मिलीं, जिसके बाद कड़ी पूछताछ में उसने बांग्लादेशी होने की बात सामने आई, जांच में सामने आया कि वह और खुद को स्थानीय निवासी बताकर लंबे समय से इलाके में रह रहा था।

एक्शन में प्रशासन, फर्जी आईडी निरस्त

मामला उजागर होते ही जनपद पंचायत अमरपाटन के सीईओ ने तत्काल प्रभाव से युवक कौसल कालम की फर्जी समग्र आईडी निरस्त कर दी है। पूरे मामले की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर भोपाल मुख्यालय भेजी गई है। तहसीलदार को भी निर्देश दिए गए हैं कि उसके द्वारा लिए गए सरकारी लाभों की जांच की जाए। वर्तमान में पुलिस ने आरोपी को कस्टडी में ले लिया है, और उससे उसके संपर्कों और मददगारों के बारे में पूछताछ की जा रही है।

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