MP कृषि कैबिनेट की तैयारी: पशुपालन की एडवांस ट्रेनिंग के लिए चुनिंदा किसानों को ब्राजील भेजेगी सरकार, अगले महीने यहां होगी पहली कृषि कैबिनेट

मोहन सरकार मार्च से कृषि कैबिनेट की शुरुआत करेगी। इसकी पहली बैठक निमाड़ अंचल के खरगोन या खंडवा जिले में हो सकती है। इसके बाद कृषि कैबिनेट मालवा, महाकौशल, विंध्य, ग्वालियर, चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र के किसी जिले में होगी।

MP Krishi Cabinet

MP Krishi Cabinet: साल 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया गया है। इसी को लेकर मोहन सरकार मार्च से कृषि कैबिनेट की शुरुआत करेगी। इसकी पहली बैठक निमाड़ अंचल के खरगोन या खंडवा जिले में हो सकती है। इसके बाद कृषि कैबिनेट मालवा, महाकौशल, विंध्य, ग्वालियर, चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र के किसी जिले में होगी। पहली कृषि कैबिनेट प्रदेश के पशुपालक किसानों को ब्राजील में ट्रेनिंग के लिए प्रस्तावित योजना को भी हरी झंडी दी जाएगी।

ब्राजील ट्रेनिंग के लिए जाएंगे पशुपालक किसान

कृषि कैबिनेट को लेकर सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक भी हो चुकी है। संभावित एजेंडा के अनुसार पहली कृषि कैबिनेट में मप्र के पशुपालक किसानों ब्राजील में ट्रेनिंग दिलाने वाली प्रस्तावित योजना को भी हरी झंडी दी जाएगी। इस योजना के तहत मप्र सरकार प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्नत पशुपालन की ट्रेनिंग लेने ब्राजील भेजेगी। इसके लिए विभाग के अफसर और हर जिले से चुनिंदा किसानों का चयन होगा।

यहां बता दें, राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को कृषि उद्योग वर्ष के रूप में मनाने का फैसला लिया है। इसके तहत लागू होने वाली योजनाओं के लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसलिए सरकार सभी किसानों के बैंक खातों को समग्र आईडी से जोड़ने की तैयारी कर रही है।

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मोबाइल- क्यूआर कोड से मिलेगी किसानों को जानकारी

इसके साथ ही मोबाइल नंबर और क्यूआर कोड के जरिए किसानों को कृषि उपकरणों की उपलब्धता की जानकारी देने का सिस्टम तैयार किया जाएगा। 
जिन किसानों का अब तक किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) नहीं बना है, राजस्व विभाग उन्हें चिन्हित कर नजदीकी प्राथमिक सहकारी साख समितियों (पैक्स) को उसकी जानकारी देगा। इसके बाद पैक्स समितियां किसानों से संपर्क कर उन्हें पात्रता के हिसाब से KCC मंजूर कराने में मदद करेंगी।

 इसके साथ ही पैक्स सोसाइटियां शिविर लगाकर भी केसीसी वितरित करेंगी। प्रदेश में वर्तमान में 4500 से अधिक पैक्स समितियां कार्यरत हैं और करीब 23 लाख से अधिक किसान इन पैक्स समितियों से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।

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