Bhopal Rape Murder Case Atul Nihale Triple Death Penalty: भोपाल में दहला देने वाले शाहजहांनाबाद मासूम रेप- मर्डर केस में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दोषी अतुल निहाले की फांसी (तिहरा मृत्युदंड) को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी अतुल को दी गई फांसी की सजा पर अपनी मुहर लगा दी है। भोपाल पॉक्सो कोर्ट द्वारा 10 मार्च 2025 को सुनाए गए "तिहरे मृत्युदंड" के फैसले के खिलाफ दोषी के परिजनों ने अपील की थी, जिसे हाईकोर्ट ने अपराध की जघन्यता को देखते हुए सिरे से खारिज कर दिया। 24 सितंबर 2024 को लापता हुई मासूम का शव पड़ोसी अतुल के घर की टंकी में मिला था।
भोपाल पॉक्सो कोर्ट का फैसला बरकरार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शाहजहांनाबाद इलाके में हुई 5 वर्षीय मासूम की हत्या और बलात्कार के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए निचली अदालत के फैसले को यथावत रखा है। 30 वर्षीय दोषी अतुल निहाले, जो पेशे से मजदूर था, उसने न केवल एक मासूम का अपहरण किया, बल्कि उसके साथ दरिंदगी कर उसकी हत्या कर दी थी।
यह मामला मध्यप्रदेश के कानूनी इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत "तिहरा मृत्युदंड" (Triple Death Penalty) सुनाए जाने का पहला प्रकरण है। कोर्ट ने उसे अपहरण, बलात्कार और हत्या, इन तीनों अलग-अलग अपराधों के लिए अलग-अलग मृत्युदंड की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट ने दोषी अतुल की फांसी की सजा के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर सजा बरकरार रखी।
क्या था शाहजहांनाबाद हत्याकांड?
घटना 24 सितंबर 2024 की है, जब शाहजहांनाबाद इलाके में रहने वाली मासूम बच्ची अपने चाचा के फ्लैट के बाहर खेलते समय अचानक लापता हो गई थी। बच्ची की तलाश में राजधानी के 5 थानों की पुलिस और 100 से अधिक जवानों ने मोर्चा संभाला था। लगभग 1000 फ्लैट्स, नालों और झाड़ियों की तलाशी ली गई। दो दिनों की गहन सर्चिंग के बाद 26 सितंबर को बच्ची का शव आरोपी अतुल निहाले के घर में रखी पानी की टंकी से बरामद हुआ था।
साक्ष्य छिपाने में मां और बहन भी शामिल
इस जघन्य अपराध में केवल अतुल ही नहीं, बल्कि उसके परिवार की संलिप्तता भी पाई गई थी। कोर्ट ने दोषी की मां बसंती निहाले और बहन चंचल को अपराध के साक्ष्य (सबूत) छिपाने का दोषी पाते हुए दो-दो साल की कैद की सजा सुनाई थी।
'विरलतम से विरल' श्रेणी का मामला
विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल ने पूर्व में फैसला सुनाते समय इस मामले को "रारेस्ट ऑफ रेयर" करार दिया था। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यह अपराध मानवता पर कलंक है और यदि मृत्युदंड से भी कठोर कोई सजा कानून में होती, तो वह अतुल निहाले को दी जानी चाहिए थी। हाईकोर्ट ने भी इस टिप्पणी और साक्ष्यों को आधार मानते हुए फांसी की सजा को अनिवार्य माना है।
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