MP के स्कूलों में टीचर्स की कमी: 1.15 लाख शिक्षकों के पद खाली, एक 'गुरुजी' के भरोसे 1968 स्कूल, जानें शिक्षा मंत्री का जवाब

मध्यप्रदेश विधानसभा में शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्वीकार किया कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 1,15,678 पद खाली हैं, जो कुल स्वीकृत पदों का 40% है। साथ ही हज़ारों स्कूल बुनियादी सुविधाओं के बिना संचालित हो रहे हैं।

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MP Teacher Vacancy: मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रदेश की चरमराई शिक्षा व्यवस्था का काला चिट्ठा सामने आया है। कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल का जवाब देते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने जो आंकड़े पेश किए, वे डराने वाले हैं। प्रदेश के स्कूल न केवल शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं, बल्कि हजारों स्कूलों के पास सुरक्षित भवन और छात्र-छात्राओं के लिए अलग शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। खासकर आदिवासी बहुल जिलों जैसे धार और झाबुआ में हालात और भी बदतर हैं।

शिक्षकों के पदों का गणित: 40% कुर्सियां खाली

विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों के कुल 2,89,005 पद स्वीकृत हैं। इनमें से वर्तमान में केवल 1,74,419 शिक्षक ही कार्यरत हैं, जबकि 1,15,678 पद रिक्त पड़े हैं। रिक्त पदों का ब्यौरा कुछ इस प्रकार है:

  • प्राथमिक विद्यालय: 1,33,576 पदों में से 55,626 पद खाली।
  • माध्यमिक विद्यालय: 1,10,883 पदों में से 44,546 पद खाली।
  • उच्च माध्यमिक विद्यालय: 44,546 पदों में से 15,506 पद खाली।

एक शिक्षक के भरोसे 1968 स्कूल

मंत्री ने बताया कि प्रदेश में कुल 83,514 विद्यालयों में से 1,968 स्कूल ऐसे हैं जहाँ केवल एक शिक्षक है। वहीं 46,417 स्कूलों में केवल दो शिक्षकों के भरोसे हज़ारों बच्चों का भविष्य टिका है। एक शिक्षकीय विद्यालयों की सबसे खराब स्थिति धार जिले में है, जहाँ 144 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।

जर्जर भवन और शौचालय का अभाव

शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ बुनियादी ढांचा भी ध्वस्त नजर आ रहा है। विधानसभा में बताया गया कि प्रदेश के 5,735 प्राथमिक विद्यालय जीर्ण-शीर्ण (जर्जर) अवस्था में हैं। इनमें सबसे ज्यादा जर्जर स्कूल झाबुआ (618) और धार (550) में हैं।

इतना ही नहीं, स्वच्छता अभियान के दावों के बीच 1,725 स्कूलों में बालक शौचालय और 1,784 स्कूलों में बालिका शौचालय तक उपलब्ध नहीं हैं। उच्च माध्यमिक विद्यालयों में भी दर्जनों स्कूलों में यह बुनियादी सुविधा गायब है।

कम नामांकन वाले स्कूलों की बढ़ती संख्या

मंत्री उदय प्रताप सिंह के मुताबिक, प्रदेश में 11,889 स्कूल ऐसे हैं जहाँ विद्यार्थियों की संख्या 20 से भी कम है। इन स्कूलों में औसतन प्रति विद्यालय मात्र 13 छात्र हैं, जबकि वहां दो अध्यापक तैनात हैं। कम नामांकन वाले स्कूलों में सिवनी (639), रायसेन (624) और रीवा (558) सबसे ऊपर हैं।

15 हजार शिक्षकों की होगी भर्ती

विधानसभा में जहाँ एक ओर स्कूलों की बदहाली और शिक्षकों की कमी का मुद्दा गरमाया, वहीं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बजट पेश करते हुए प्रदेश के युवाओं और शिक्षा जगत के लिए उम्मीदों का पिटारा खोल दिया। सरकार ने शिक्षकों की भारी कमी को दूर करने के लिए 15,000 नए शिक्षकों की भर्ती का बड़ा लक्ष्य रखा है।

शिक्षा विभाग के लिए बजट की बड़ी घोषणाएं

  • 15 हजार शिक्षकों की भर्ती: प्रदेश के स्कूलों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए सरकार ने 15,000 नई भर्तियों का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही जनजातीय कार्य विभाग (ST वर्ग) के शैक्षणिक संस्थानों में 4,000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पहले से ही जारी है।
  • 294 सांदीपनि स्कूल: शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए राज्य भर में 294 नए 'सांदीपनि स्कूल' खोले जाएंगे, जो आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे।
  • छात्रवृत्ति और पीएम श्री योजना: छात्रों की पढ़ाई में आर्थिक बाधा न आए, इसके लिए छात्रवृत्ति हेतु 986 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। साथ ही, 530 करोड़ रुपये पीएम श्री योजना के विकास के लिए प्रस्तावित किए गए हैं।

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