बागेश्वर धाम में गूंजी शहनाई: 305 गरीब बेटियों का विवाह, हर दुल्हन को FD, आशीर्वाद देकर भावुक हुए धीरेंद्र शास्त्री, 9 देशों के राजदूत हुए शामिल

छतरपुर के बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि पर 305 कन्याओं का भव्य सामूहिक विवाह संपन्न हुआ। जगद्गुरु रामभद्राचार्य और धीरेंद्र शास्त्री की मौजूदगी में हुए इस समारोह में 9 देशों के राजदूत शामिल हुए।

Bageshwar Dham Mass Wedding

Bageshwar Dham Samoohik Vivah Samaroh: मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले का गड़ा गांव एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर बागेश्वर धाम में आयोजित तीन दिवसीय सामूहिक विवाह समारोह का भव्य समापन हुआ। धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की देखरेख में 305 बेटियों ने वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। इस आयोजन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां संतों के आशीर्वाद के साथ-साथ 9 देशों के राजदूत भी साक्षी बने।

बागेश्वर धाम में 305 बेटियों का सामूहिक विवाह

छतरपुर के बागेश्वर धाम (गड़ा गांव) में इस साल महाशिवरात्रि का पर्व खुशियों की सौगात लेकर आया। यहाँ 305 निर्धन बेटियों का भव्य सामूहिक विवाह संपन्न हुआ। रविवार को 305 जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और सात फेरे लिए। इस खास मौके पर न केवल देशभर से श्रद्धालु उमड़े, बल्कि विदेशी मेहमानों ने भी शिरकत की। फूलों और रोशनी से सजा पूरा धाम उत्सव के रंग में डूबा नजर आया, जहाँ हर तरफ बस आनंद और आशीर्वाद की गूंज थी।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य की भविष्यवाणी और गुरु पूजा

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने समारोह में पहुंचे जगद्गुरु रामभद्राचार्य के चरण पखारकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान जगद्गुरु ने मंच से बड़ी बात कहते हुए कहा, "इस बार मैं 305 बेटियों की शादी में आया हूँ, लेकिन 29 जून से 13 जनवरी तक एकांतवास के बाद, लगता है अगली बार मैं धीरेंद्र शास्त्री की शादी में आऊँगा।" इस बयान के बाद पूरे धाम में उत्साह की लहर दौड़ गई।

Bageshwar Dham Vivah

विदाई की रस्में, भावुक हुए बाबा बागेश्वर

बागेश्वर धाम के आंगन में जब वैदिक मंत्रों की गूँज के बीच दूल्हा-दुल्हन ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। विवाह की रस्मों के बाद जब सभी नवविवाहित जोड़ों ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया, तो भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। विदाई के क्षणों में एक दुल्हन अपने आंसुओं को रोक न सकी और पिता तुल्य धीरेंद्र शास्त्री से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगी। इस भावुक दृश्य ने सभी को झकझोर दिया, वहीं धीरेंद्र शास्त्री ने भी बड़े भाई और पिता का फर्ज निभाते हुए दूल्हों को गले लगाया।

पंडित शास्त्री ने भी भावुक होकर कहा कि जिन बेटियों के सिर से पिता का साया उठ चुका है, उनके लिए बागेश्वर धाम हमेशा परिवार बनकर खड़ा रहेगा। उन्होंने दूल्हों को गले लगाकर बेटियों का ख्याल रखने का वचन भी लिया। धीरेंद्र शास्त्री ने सभी नवविवाहित कन्याओं को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखमय, सुरक्षित और सम्मानपूर्ण भविष्य की कामना की।

सुरक्षा के रूप में 30 हजार की FD

श्री बागेश्वर जन सेवा समिति ने नवविवाहित जोड़ों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सराहनीय कदम उठाया। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के माध्यम से प्रत्येक बच्ची के नाम पर 30 हजार रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराई गई है। समिति के यतेंद्र गुप्ता ने बताया कि दस्तावेजों के मिलान के बाद सीधे खातों में राशि ट्रांसफर की जा रही है।

भारत-नेपाल का सांस्कृतिक संगम

इस विवाह समारोह की एक खास बात यह रही कि इसमें एक नेपाली जोड़े ने भी विवाह किया। नेपाल से आए 50 बारातियों और पुजारियों की मौजूदगी में भारतीय और नेपाली, दोनों ही रीति-रिवाजों से रस्में पूरी की गईं। नेपाल के संत आरुण आनंद ने धीरेंद्र शास्त्री की तुलना 'दुनिया के 8वें अजूबे' से की।

साधु- संत और 9 देशों के राजदूत हुए शामिल

बागेश्वर धाम में आयोजित 7वें कन्या विवाह महोत्सव की भव्यता तब और बढ़ गई जब महाशिवरात्रि के मौके पर देश के दिग्गज संतों के साथ 9 देशों के राजदूत भी आशीर्वाद देने पहुँचे। समारोह में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के चरण धोकर उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान अनिरुद्धाचार्य जी महाराज और हनुमानगढ़ी के राजूदास जी जैसे प्रतिष्ठित संत भी मौजूद रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस आयोजन की चमक तब दिखी जब अर्जेंटीना, चिली, पेरू और पनामा जैसे 9 देशों के राजदूत (Diplomats) अपनी संस्कृति और परंपराओं से अलग इस अनोखे विवाह उत्सव के साक्षी बने।

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