खंडवा जल संरक्षण अभियान फर्जीवाड़ा: AI से बनाई वाटर हार्वेस्टिंग की फर्जी तस्वीरें, पोर्टल पर डाली, जीता राष्ट्रपति अवॉर्ड, 4 शिक्षक सस्पेंड

खंडवा में जल संरक्षण अभियान के फर्जी आंकड़ों और AI से तैयार फोटो के जरिए नेशनल अवॉर्ड जीतने का खुलासा हुआ है। कलेक्टर ने इस मामले में 4 शिक्षकों को निलंबित कर दिया है और कई की वेतन वृद्धि रोक दी है।

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खंडवा ने राष्ट्रपति से देश के नंबर-1 जल संरक्षण जिले का खिताब जीता था।

Khandwa Water Harvesting System National Award Fraud: मध्यप्रदेश के खंडवा जिले से भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस 'जल संचयन अभियान' के लिए खंडवा को देश में नंबर-1 घोषित कर राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया था, उसकी बुनियाद ही फर्जी आंकड़ों और एडिटेड तस्वीरों पर टिकी निकली। जांच में खुलासा हुआ है कि घर पर सिस्टम लगाए बिना ही फर्जी फोटो पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए थे। अब मामले में कलेक्टर ने कार्रवाई करते हुए 4 शिक्षकों को निलंबित किया है, जबकि अन्य के खिलाफ वेतन कटौती और वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई है।

नेशनल अवॉर्ड और आंकड़ों का खेल

खंडवा जिले में 'कैच द रेन' अभियान के तहत हुए भ्रष्टाचार ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। भोपाल की हाईलेवल टीम की जांच में पाया गया कि जिले के जिन आंकड़ों के दम पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने खंडवा को सम्मानित किया था, वे आंकड़े केवल कागजों और पोर्टल पर ही सीमित थे। जमीन पर न तो तालाबों का काम पूरा हुआ और न ही घरों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे।

AI और फोटो एडिटिंग का गजब खेल

जांच में यह बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई कि ओंकारेश्वर संकुल केंद्र के कुछ शिक्षकों ने आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग किया। उन्होंने अपने घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाया था, लेकिन AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और फोटो एडिटिंग के जरिए फर्जी तस्वीरें तैयार कीं। कुछ ने तो पड़ोसी के मकान की पानी निकासी वाली पाइपलाइन की फोटो खींचकर उसे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बताकर सरकारी पोर्टल पर अपलोड कर दिया।

मामले में शिक्षकों के खिलाफ कलेक्टर का एक्शन

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर ने 4 शिक्षकों को सस्पेंड किया और कई की वेतन वृद्धि रोकने के आदेश दिए हैं। माध्यमिक शिक्षक विद्या दुबे और संध्या राजपूत को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही प्राचार्य जगदीश मुनेवर और शिक्षिका रमावती कनेन के निलंबन का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। अतिथि शिक्षकों का 2 माह का वेतन काटा गया है और व्यवसायिक प्रशिक्षक सचिन यादव की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।

एमपी बना था जल संरक्षण में अव्वल

गौरतलब है कि इसी अभियान के आधार पर खंडवा को देश में प्रथम स्थान मिला था और ₹2 करोड़ का नकद पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कलेक्टर ऋषव गुप्ता और जिला पंचायत सीईओ डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा को सम्मानित किया था। हालांकि, अब सवाल यह उठ रहा है कि जब छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई हो रही है, तो उन बड़े अधिकारियों (DEO, DPC, BEO) का क्या, जिनके घरों में भी हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं है?

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