/bansal-news/media/media_files/2026/02/26/indore-kisan-protest-2026-02-26-16-41-22.jpg)
Indore Kisan Protest: मध्यप्रदेश के इंदौर में रिंग रोड के खिलाफ किसान प्रदर्शन कर रहे हैं।
अर्धनग्न होकर किसान जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। कुछ किसान मेडल-शील्ड की माला पहन प्रदर्शन पर बैठें। यहां प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की जा रही है। प्रदर्शनकारी किसान कहते हैं कि हमारे के लिए ये मेडल और शील्ड जैसे सम्मान इतने महत्वपूर्ण नहीं, जितनी हमारी जमीनें हैं। खेती हमारी आत्मा है। जब हमारे पास खेती की जमीन ही नहीं बचेगी तो हम क्या करेंगे? अन्नदाता हैं तो दो वक्त का भोजन नसीब है। हम एक इंच भी जमीन नहीं देंगे।
मुआवजा, पुनर्वास, सर्वे प्रोसेस की स्थिति स्पष्ट नहीं
प्रदर्शनकारियों का कहना है ​कि ईस्ट आउटर में जहां से रिंग रोड प्रस्तावित हैं। यहां की जमीन के बदले मुआवजा राशि, पुनर्वास और सर्वे प्रोसेस को लेकर प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। किसानों की ओर से जो आपत्तियां पेश की गई, उस पर भी एक तरफा निर्णय लिया गया है। प्रशासन जल्दबाजी में अधिग्रहण प्रोसेस आगे बढ़ा रहा है।
मंत्री हमारे साथ हैं या कुर्सी के?, उनका जवाब दोहरा
प्रदर्शनकारी किसान संतोष सोनतिया के मुताबिक, जब वे जन प्रतिनिधियों के पास गुहार लगाने जाते हैं, तो उन्हें दोहरा जवाब मिलता है। मंत्री कहते हैं कि वे हमारे साथ हैं, लेकिन सरकार के खिलाफ नहीं जा सकते। ऐसे में सवाल यह है कि एक जन प्रतिनिधि को किसानों के हितों का संरक्षण करना चाहिए या केवल सत्ता के अनुशासन का पालन?
ये भी पढ़ें: मध्यप्रदेश के अतिथि शिक्षकों को राहत: सात दिन गैर-हाजिरी पर नहीं हटाएंगे, स्कूल शिक्षा विभाग ने वापस लिया आदेश
प्रशासन का पक्ष- संवाद से निकलेगा समाधान
इस मामले पर एडीएम (ADM) रोशन राय का कहना है कि प्रशासन पिछले छह महीनों से निरंतर किसानों के संपर्क में है। उनकी मुख्य मांगें अलाइनमेंट बदलने और गाइडलाइन से अधिक मुआवजे को लेकर हैं। जिस तरह हमने 'वेस्टर्न रिंग रोड' के विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाया था, उसी तर्ज पर इस मामले का भी समाधान निकाला जा रहा है।
किसानों की ये रहीं मांगें
- किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
- अधिग्रहण की जा रही जमीन का दाम बाजार की वर्तमान दरों (Market Rate) के अनुसार तय हो।
- सर्वे की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए ताकि कोई विसंगति न रहे।
- विस्थापित होने वाले परिवारों के लिए पुनर्वास की नीति पूरी तरह स्पष्ट और लिखित में हो।
- किसानों की आपत्तियों को सामूहिक रूप से खारिज करने के बजाय हर किसान की बात व्यक्तिगत तौर पर सुनी जाए।
/bansal-news/media/agency_attachments/2025/12/01/2025-12-01t081847077z-new-bansal-logo-2025-12-01-13-48-47.png)
Follow Us