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Bhopal Kajlikheda New Police Station: राजधानी भोपाल के सबसे व्यस्त इलाकों में शुमार कोलार क्षेत्र की पुलिसिंग व्यवस्था में बड़ा फेरबदल हुआ है। लंबे समय से लंबित कजलीखेड़ा पुलिस चौकी को अब पूर्ण थाने का दर्जा दे दिया गया है। मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के साथ ही यह प्रभावी हो गया है। लेकिन इस नए थाने के गठन के साथ ही क्षेत्रफल के असंतुलन ने रहवासियों की चिंता बढ़ा दी है। जहाँ कोलार थाना क्षेत्र अब सिमट कर छोटा हो गया है, वहीं कजलीखेड़ा थाने के पास एक विशाल और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र आ गया है। सीमांकन को लेकर रहवासियों की मुश्किलें बढ़ गई है।
असंतुलित सीमांकन ने बढ़ाई टेंशन
भोपाल जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने कोलार रोड थाने पर बढ़ते अपराध और आबादी के दबाव को कम करने के लिए कजलीखेड़ा थाने को बना दिया है। शुक्रवार को जारी आदेश के मुताबिक, कोलार थाने से करीब 40 गांव और मोहल्लों को काटकर कजलीखेड़ा में जोड़ा गया है।
जानकारी के अनुसार नए थाने के बनने से यहां के रहने वालों की मुसीबत कम होने के बजाय बढ़ गई है। दरअसल, डी-मार्ट के आगे का पूरा इलाका अब कजलीखेड़ा थाने के अंदर आएगा। ऐसे में अगर किसी को पुलिस के पास जाना हो या रिपोर्ट लिखवानी हो, तो उन्हें अपने घर से काफी दूर चलकर नए थाने तक पहुंचना होगा।
कजलीखेड़ा को मिला 52 वर्ग किमी क्षेत्र
बंटवारे से पहले कोलार थाना 72 वर्ग किमी के विशाल क्षेत्र में फैला था, जिसकी सीमाएं सीहोर और रायसेन जिले तक लगती थीं। नए आदेश के बाद कजलीखेड़ा थाने को 52 वर्ग किमी का भारी-भरकम दायरा मिला है, जबकि कोलार थाना अब मात्र 20 वर्ग किमी के दायरे में सिमट गया है। जानकारों का मानना है कि इससे पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम और जनता की पहुंच पर बुरा असर पड़ सकता है।
2 किमी की जगह तय करना होगा 8 किमी का सफर
सीमांकन के दोबारा प्रस्ताव में गेहूंखेड़ा, प्रियंका नगर, फेथकला, बैरागढ़ चीचली और सोहागपुर जैसी कॉलोनियों को कोलार थाने में ही रखने की बात कही गई थी, क्योंकि ये वहां से महज 1-2 किमी दूर हैं। लेकिन अंतिम आदेश में ये सभी कजलीखेड़ा थाने का हिस्सा बन गई हैं। अब इन कॉलोनियों के रहवासियों को थाने जाने के लिए 6 से 8 किमी का लंबा सफर तय करना होगा।
5 लाख आबादी और अपराध का दबाव
पुराने कोलार थाने के आंकड़े बताते हैं कि यहाँ सालाना 900 से अधिक गंभीर (संज्ञेय) और 1500 से अधिक साधारण (असंज्ञेय) अपराध दर्ज होते थे। 5 लाख की आबादी का बोझ अकेले एक थाने पर था। इसी दबाव को बांटने के लिए नया थाना जरूरी था, लेकिन पुलिस अधिकारियों द्वारा दिया गया 'समान सीमांकन' (6-6 किमी का दायरा) का सुझाव दरकिनार कर दिया गया। बंटवारे से पहले कोलार थाना करीब 72 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला था। इसकी सीमाएं भोपाल के साथ सीहोर (बिलकिसगंज) और रायसेन (मंडीदीप) जिले से लगती थीं।
थानों का नया भौगोलिक ढांचा
- कजलीखेड़ा थाना: डी-मार्ट चौराहा से गोल जोड़ तक 8 किमी लंबी पट्टी और 40 ग्राम/मोहल्ले। इन्हें आधिकारिक बंदोबस्त नंबर के साथ आवंटित किया गया है।
- कोलार थाना: अब यह थाना सर्वधर्म पुल से डी-मार्ट चौराहा तक मात्र 3.5 किलोमीटर के मुख्य शहरी क्षेत्र तक सीमित रह गया है।
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