भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल 2026: 'औकात' शब्द अपमान नहीं, खुद का सच स्वीकारने की चुनौती है- गीतकार पीयूष मिश्रा

Bhopal Literature Festival 2026: झीलों की नगरी में शब्द, विचार और कला के भव्य संगम भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल के आठवें संस्करण का शानदार आगाज हुआ। 

Bhopal Literature Festival 2026

Bhopal Literature Festival 2026: झीलों की नगरी में शब्द, विचार और कला के भव्य संगम भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल के आठवें संस्करण का शानदार आगाज हुआ। 

भारत भवन में आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव के पहले दिन प्रसिद्ध थिएटर आर्टिस्ट, अभिनेता, गीतकार और कवि पीयूष मिश्रा ने अपनी चर्चित पुस्तक ‘तुम्हारी क्या औकात है’ पर खुलकर और बेबाक अंदाज में लाइफ के कुछ अनछुए पहलूओं पर चर्चा की। 

पीयूष मिश्रा ने स्पष्ट किया कि ‘औकात’ शब्द यहां अपमान या चुनौती नहीं, बल्कि स्वयं से पूछे जाने वाले उस प्रश्न का प्रतीक है, जो इंसान को अपनी सीमाओं, डर और सच से रूबरू कराता है। उनकी रचनाएं व्यवस्था, सत्ता, समाज और व्यक्ति के भीतर चल रहे द्वंद्व को उजागर करती हैं।

शब्दों को गढ़ने से अधिक उन्हें सुनते हैं

पीयूष मिश्रा ने कविता लिखने की अपनी प्रोसेस पर बात करते हुए कहा कि कविता उनके लिए एक पूर्व नियोजित रचना नहीं, बल्कि परिस्थितियों और अनुभवों से उपजा स्वाभाविक भाव है। उन्होंने कहा कि वे शब्दों को गढ़ने से अधिक उन्हें सुनते हैं। जो पीड़ा, आक्रोश या संवेदना भीतर उमड़ती है, वही कविता का रूप ले लेती है। उनकी रचनाओं में आम आदमी की आवाज़, उसके संघर्ष और उसकी बेचैनी साफ़ दिखाई देती है।

piyush mishra

अभिव्यक्ति के तीन रास्ते, भाव सच कहना

पीयूष मिश्रा ने बताया कि रंगमंच, सिनेमा और कविता तीनों माध्यम उनके लिए अभिव्यक्ति के अलग-अलग रास्ते हैं, लेकिन उनका मूल भाव एक ही है सच कहना। जीवन में भगवान और अध्यात्म से जुड़े रहना कितना जरूरी है, इसका वास्तविक महत्व उन्हें वर्ष 2010 में समझ आया, जब वे विपश्यना से जुड़े। 

मेरे लिए थिएटर पैशन है, प्रोफेशन नहीं

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए थिएटर पैशन है, प्रोफेशन नहीं। ग्वालियर से दिल्ली जाना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि के साथ-साथ कठिन चुनौती भी थी। अभिनय को पेशा बनाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने 1980 से 1985 तक खुद को पूरी तरह थिएटर के लिए समर्पित कर दिया।

ब्रेन स्ट्रोक के बाद विपश्यना से दोबारा खड़े हैं

उन्होंने कहा साल 2009 में उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया। डॉक्टरों ने कह दिया था कि आगे की जिंदगी व्हीलचेयर पर बीतेगी और वे अब अभिनय नहीं कर पाएंगे। उसी समय विशाल भारद्वाज ने उन्हें एक डॉक्टर का पता दिया, जिसके बाद मेडिटेशन और हीलिंग से जुड़े। विपश्यना से दोबारा सबके सामने खड़े हैं।

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