झरनेश्वर बैंक घोटाला: मर चुके आरोपियों के वारिस भी अब आरोपी, कोर्ट ने दिए वसूली के आदेश; एक महीने का अल्टीमेटम, वरना संपत्ति होगी कुर्क

भोपाल के झरनेश्वर नागरिक सहकारी बैंक घोटाले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मृत संचालकों के वारिसों को आरोपी बनाते हुए 27.34 लाख रुपए की वसूली के आदेश दिए हैं। 

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Bhopal Jharneshwar Cooperative Bank Scam: भोपाल के झरनेश्वर नागरिक सहकारी बैंक में हुए बड़े के फर्जीवाड़े में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आया है। नियमों के खिलाफ नियुक्तियों और फर्जी भत्तों के मामले में कोर्ट ने अब उन आरोपियों के वारिसों (Legal Heirs) को भी घेरे में ले लिया है जिनकी मौत हो चुकी है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि घोटाले की रकम हर हाल में वसूल की जाएगी, चाहे इसके लिए वारिसों की संपत्ति ही क्यों न कुर्क करनी पड़े। दोषियों से कुल 27.34 लाख रुपए वसूलने का आदेश है, जिसमें 12% ब्याज भी जुड़ेगा। वसूली के लिए एक महीने का समय दिया गया है, अन्यथा संपत्ति नीलाम होगी।

झरनेश्वर सहकारी बैंक फर्जीवाड़ा

भोपाल के चर्चित झरनेश्वर नागरिक सहकारी बैंक में हुए भ्रष्टाचार के मामले में संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाओं की अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। बैंक में 2015 से 2023 के बीच नियमों को ताक पर रखकर की गई नियुक्तियों, फर्जी भर्तियों और अवैध भत्तों के वितरण के मामले में तत्कालीन बोर्ड को दोषी पाया गया है।

वारिसों से रिकवरी के आदेश

इस मामले की सबसे बड़ी बात यह है कि जिन संचालकों की मृत्यु हो चुकी है, कोर्ट ने उनके कानूनी वारिसों को आरोपी बनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि तत्कालीन अध्यक्ष कमल अजवानी समेत 10 संचालकों से 27.34 लाख रुपए की वसूली की जाए। इस राशि पर 12% सालाना ब्याज भी देना होगा। यदि एक महीने के भीतर यह रकम जमा नहीं की गई, तो दोषियों और उनके वारिसों की चल-अचल संपत्ति बेचकर वसूली की जाएगी।

इन दिग्गजों पर गिरी गाज

अदालत ने बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष कमल अजवानी, उपाध्यक्ष रजनी मालवीय, अनीता अजवानी और अन्य संचालकों जिनमें हरीश मीरचंदानी, मनमोहन कुरापा, बीएच अंबवानी, राजीव तिवारी, लाल वासवानी, पुरुषोत्तम पंजवानी, सुरेश वाधवानी और राजेंद्र राठी शामिल हैं, इन लोगों घोटाले में दोषी ठहराया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से चार लोग अभी भी बैंक के वर्तमान बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में सक्रिय हैं।

क्यों बनाया गया वारिसों को आरोपी?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 64 और 58 बी में यह स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी पदाधिकारी या कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो बैंक को हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई उनके वारिसों से की जा सकती है। इसी आधार पर कोर्ट ने मृतक संचालकों के बच्चों या कानूनी उत्तराधिकारियों को मामले में पक्षकार बनाते हुए वसूली का आदेश दिया है।

आठ साल तक प्रशासक के भरोसे रहा बैंक

घोटाले और अनियमितताओं के चलते यह बैंक साल 2015 से 2023 तक प्रशासक के अधीन रहा। लंबी जांच के बाद 2023 में चुनाव हुए और नई टीम ने कमान संभाली, लेकिन पुराने पापों का हिसाब अब कोर्ट ने बराबर करना शुरू कर दिया है।

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