MP Drug Ban: प्रदेश के अस्पतालों में खराब गुणवत्ता के लाइफ सेविंग ड्रग्स का हो रहा था इस्तेमाल, 9 इंजेक्शन पर लगा बैन

MP Drug Ban: मध्य प्रदेश में इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट के बाद 9 जीवन रक्षक इंजेक्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

MP Drug Ban: प्रदेश के अस्पतालों में खराब गुणवत्ता के लाइफ सेविंग ड्रग्स का हो रहा था इस्तेमाल, 9 इंजेक्शन पर लगा बैन

MP Drug Ban: मध्य प्रदेश में इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट के बाद 9 जीवन रक्षक इंजेक्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इनमें से दो दवाओं की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी, जिनमें वडोदरा-गुजरात की Adraid Inj. और हिमाचल प्रदेश की एक कंपनी की Adrenaline Inj. शामिल हैं। इन दवाओं का इस्तेमाल रक्तचाप को बढ़ाने और स्थिर करने के लिए किया जाता था। इनकी खराब गुणवत्ता के कारण राज्य भर में मेडिकल कम्युनिटी को सतर्क कर दिया गया है। तीन अन्य दवाओं की जांच अभी भी अधूरी है, और ड्रग प्रशासन ने संबंधित कंपनियों को पत्र भेजकर पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा है।

दो दवाओं की गुणवत्ता खरी नहीं उतरी

दो दवाओं की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरने की वजह से एमजीएम कॉलेज की रिपोर्ट में इन दवाओं को गैर-मानक गुणवत्ता वाला घोषित किया गया है। इनमें वडोदरा-गुजरात की और हिमाचल प्रदेश की एक कंपनी की शामिल हैं। इन दवाओं के सैंपल को कोलकाता की सेंट्रल ड्रग्स लैब भेजा गया था, जहां से इनकी जांच रिपोर्ट में इनकी गुणवत्ता मानकों के अनुसार नहीं पाई गई। इन इंजेक्शनों का इस्तेमाल रक्तचाप को बढ़ाने और स्थिर करने के लिए किया जाता था.

इन दवाओं की क्वालिटी भी निकली खराब

इन जीवन रक्षक दवाओं की खराब गुणवत्ता की जांच में पाई गई दवाओं में हेपरिन, एट्रोपिन, डोपामाइन, नाइट्रोग्लिसरीन और फेंटानिल जैसी महत्वपूर्ण दवाएं शामिल थीं। इन दवाओं का इस्तेमाल इमरजेंसी की स्थिति में किया जाता है, इसलिए यह बेहद चिंताजनक है कि इन दवाओं की गुणवत्ता मानकों के अनुसार नहीं पाई गई। इस मामले ने राज्य भर में मेडिकल कम्युनिटी को सतर्क कर दिया है और अब इन दवाओं का इस्तेमाल पूरी तरह से रोक दिया गया है।

तीन अन्य दवाओं की जांच जारी

तीन दवाओं की जांच अधूरी है क्योंकि जांच के लिए जरूरी जानकारी पूरी नहीं थी। ड्रग प्रशासन ने संबंधित कंपनियों को पत्र भेजकर पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा है। जब तक कोलकाता की सेंट्रल ड्रग्स लैब को पूरी जानकारी नहीं मिलती, तब तक इन दवाओं की जांच आगे नहीं बढ़ सकेगी। इन दवाओं में एट्रोपिन सेंट, पोटेशियम क्लोराइड, हेपरिन कैल्शियम ग्लूकोनेट और नाइट्रोग्लिसरीन शामिल हैं।

सभी अस्पतालों और कॉलेजों को दिए निर्देश

एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे इन इंजेक्शनों के बैच का इस्तेमाल रोके और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अन्य दवाओं की गुणवत्ता की भी जांच करें। इस निर्देश का उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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