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Shahdol Infants Death: बच्चों की मौत पर चौकन्नी सरकार, आज शहडोल का दौरा करेंगे स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी

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Sonu Singh
Shahdol Infants Death: बच्चों की मौत पर चौकन्नी सरकार, आज शहडोल का दौरा करेंगे स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी

Image Source: Twitter@Dr. Prabhuram Choudhary

MP Health Minister Prabhuram Choudhary Shahdol Visit: शहडोल जिला अस्पताल (Shahdol District Hospital) में 26 नवंबर से अब तक 13 नवजात बच्चों की मौत हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि इस मामले को लेकर अब सरकार भी चौकन्नी हो गई है। इसी के चलते मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी आज शहडोल का दौरा करेंगे। स्वास्थ्य मंत्री आज रात शहडोल पहुंचेंगे और अगले दिन शहडोल संभाग के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।

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शहडोल के कुशाभाऊ ठाकरे अस्पताल में हो रही नवजातों की मौत के मामले पर प्रशासन भी नजर बनाए हुए हैं। तीन नए बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों को शहडोल जिला अस्पताल में पदस्थ किया गया है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी राजेश पांडे ने जयसिंहनगर में तैनात डॉ. राजेश तिवारी और मेडिकल कॉलेज, शहडोल के डॉक्टर मनीष सिंह को जिला अस्पताल में तैनात किया गया है। सेवानिवृत्त बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. उमेश नामदेव को भी पुनर्नियुक्ति देकर जिला अस्पताल में पदस्थ किया गया है।

औसतन रोजाना एक बच्चे की मौत
जिला चिकित्सलय में 13 बच्चों की मौत को लेकर पूरे प्रदेश में मचे हड़कंप के बीच जांच और समीक्षाओं के दौर भी तेज हो गए हैं। इन्हीं समीक्षाओं व जांचों के बीच चौंकाने वाला सच सामने आया है। जिला अस्पताल में औसतन हर दिन एक बच्चे की मौत हो रही है।

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पिछले आठ महीने (अप्रैल से नवंबर) के भीतर 362 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा 262 बच्चों की मौत नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) में हुई तो 100 से ज्यादा बच्चों ने बाल गहन चिकित्सा इकाई (पीआईसीयू) में इलाज के दौरान जान गंवाई।

इनमें से किसी एक बच्चे की भी मौत की जिम्मेदारी किसी चिकित्सक व जिला चिकित्सालय प्रबंधन ने नहीं ली। जिम्मेदारी डाली गई हालातों व परिजनों पर, जागरुकता के अभाव व विलंब से गंभीर अवस्था में लाने के कारण के रूप में। जबकि यह चिकित्सक भी जानते हैं कि यदि कोई गंभीर रूप से बीमार नहीं तो चिकित्सालय आएगा ही क्यों। वही हैरत की बात यह है कि जिस जिला अस्पताल में औसतन रोजाना एक बच्चे की मौत हो रही वहां एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है।

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