हाइलाइट्स
- एमपी में कारतूस फर्जीवाड़ा मामले में 10 से ज्यादा शूटर्स की पेशी
- अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बहनों ने कार्रवाई की सराहना की
- एसडीएम ऑफिस में लाइसेंस और हथियारों की पूरी जांच
MP Cartridge Fraud: मध्यप्रदेश में कारतूसों के फर्जीवाड़े के मामले ने नई करवट ले ली है। जिले में शूटर्स को जारी लाखों कारतूसों का गलत इस्तेमाल होने के खुलासे के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। शुक्रवार को चौथे दिन 10 से अधिक शूटर्स बैरागढ़ एसडीएम कार्यालय में पेश हुए और अपने लाइसेंस, हथियार, कारतूस और अन्य दस्तावेज लेकर वैरिफिकेशन कराए।
बंद कमरे में हुआ वेरिफिकेशन
एसडीएम कार्यालय के एक बंद कमरे में सभी दस्तावेजों और हथियारों की जांच की गई। इस दौरान शूटर्स ने बताया कि जिला प्रशासन की यह कार्रवाई बिल्कुल जरूरी और सही है। पेशी के दौरान शूटर्स ने अपने हथियारों, लाइसेंस और कारतूसों के संबंध में पूरी जानकारी दी। प्रशासन ने सभी से पूछा कि कौन सा मॉडल है, इसे कहां से इम्पोर्ट किया गया, कब खरीदा गया और पिछले 5 से 10 सालों में कब-कब और कितने कारतूस का इस्तेमाल किया गया।
इंटरनेशनल मैच खेल चुकी बहनों ने क्या कहा
इस मामले में विशेष रूप से ध्यान खींचा इंटरनेशनल शूटर बहनों सृष्टि और खुशी मिश्रा ने। सृष्टि ने बताया कि वे पिछले दस साल से शूटिंग कर रही हैं और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। उनकी बहन खुशी भी नेशनल लेवल तक पिस्टल शूटिंग में खेल चुकी हैं। दोनों बहनों ने कहा कि जिला प्रशासन की कार्रवाई बेहद जरूरी है और वे हर तरह की जांच में पूरा सहयोग देंगी।
सृष्टि ने कहा कि ऐसे समय पर जब कुछ लोग हथियारों और कारतूसों का गलत इस्तेमाल करते हैं, तो पेशी और वैरिफिकेशन जैसी कार्रवाई पूरी तरह से सही है। उन्हें और अन्य प्रोफेशनल शूटर्स को भी इसी वजह से कई बार परेशानी झेलनी पड़ी है। खुशी मिश्रा ने भी इस बात की पुष्टि की कि नियमों का पालन होना जरूरी है और यह कार्रवाई भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने में मदद करेगी।
दोनों बहनों के लाइसेंस 2023 में हुए जारी
दोनों बहनों ने बताया कि उनके लाइसेंस 2023 में जारी हुए थे। उन्होंने कहा कि पेशी के दौरान अधिकारी ने उनके सभी दस्तावेजों और हथियारों की पूरी जांच की। अधिकारियों ने मॉडल, खरीद की तारीख, इम्पोर्ट की प्रक्रिया, शूटिंग की शुरुआत और कारतूस के इस्तेमाल के बारे में सवाल किए। प्रशासन ने पिछले 10 सालों का हिसाब मांगा ताकि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आ सके।
मुकाबले से बाहर रह रहे खिलाड़ियों ने नहीं लौटाया हथियार
पेशी के दौरान यह भी पता चला कि कई शूटर्स का मूल लाइसेंस सेल्फ डिफेंस के लिए था, लेकिन बाद में उन्होंने स्पोर्ट्स कैटेगरी में प्रतियोगिता के लिए अतिरिक्त हथियार भी अपने पास रख लिए। इसके साथ ही एम्युनेशन का कोटा (केवल स्पोर्ट्स कैटेगरी के लिए) उसे भी सेल्फ डिफेंस के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। कई ऐसे शूटर्स थे जिन्होंने लंबे समय से प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया, फिर भी स्पोर्ट्स कैटेगरी के तहत हथियार और कारतूस अपने पास रखे हुए थे।
कारतूस खरीद को रिकॉर्ड नहीं
इसके अलावा, कुछ शूटर्स ने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बावजूद कारतूस की खरीद का रिकॉर्ड नहीं दिखाया। इसका मतलब यह है कि उन्होंने या तो कारतूस का इस्तेमाल किया और रिकॉर्ड नहीं बनाया या फिर नियमों का पालन नहीं किया। प्रशासन ने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम कार्यालय में सुबह से ही लगभग 10 शूटर्स आ चुके थे और शुक्रवार को पेशी का आखिरी दिन था।
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