Lumpy Virus Cases: हजारों गायों को निगल रहा खतरनाक वायरस, अब तक 16 राज्यों में बीमारी ने दी दस्तक, जानें खबर

लंपी वायरस जैसे खतरनाक वायरस ने देशभर में मवेशियों को चपेट में ले लिया है जिसमे 58 हजार से ज्यादा गायों (Cows) की जान चली गई तो वही हालात मवेशियों के लिए खराब हो गए है।

Lumpy Virus Cases: हजारों गायों को निगल रहा खतरनाक वायरस, अब तक 16 राज्यों में बीमारी ने दी दस्तक, जानें खबर

Lumpy Virus Cases: कोरोना ने जहां पर इंसान को परेशान किया है वहीं पर लंपी वायरस जैसे खतरनाक वायरस ने देशभर में मवेशियों को चपेट में ले लिया है जिसमे 58 हजार से ज्यादा गायों (Cows) की जान चली गई तो वही हालात मवेशियों के लिए खराब हो गए है। यह वायरस ने 16 राज्यों में दस्तक दे दी है तो वहीं पर राजस्थान में मवेशियों के मरने की संख्या सबसे ज्यादा है।

केंद्रीय मंत्री का बयान

आपको बताते चलें कि, केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा कि बीमारी से निपटने के लिए सभी राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने के लिए दिल्ली में कंट्रोल रूम शुरू कर दिया गया है. इसके जरिये अधिकारी राज्य के अधिकारियों के साथ सलाह-मशविरा कर रहे हैं। यहां पर खबर में सामने आ रहा है कि, मवेशियों के बीमारी से पीड़ित होने की खबर लगातार सामने आ रही जिसमें इनको दफनाने की जगह कम पड़ गई है।

दूध के संग्रह पर क्या पड़ेगा असर

आपको बताते चलें कि, आपको बताते चलें कि, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैक्सीन उत्पादन को बढ़ाने की कोशिशों को लेकर इसके निर्माता से बातचीत की गई है। इस वायरस से सामने आ रहा था कि, दूध का कलेक्शन पर असर तो नहीं पड़ेगा स्पष्ट किया गया कि, दूध का सबसे ज्यादा संकलन गुजरात से होता है. वहां लंपी वायरस लगभग शांत होने की स्थिति में आ गया है। इसलिए संकट नहीं बढ़ेगा।

जानें कैसी होती है ये बीमारी

आपको लंपी वायरस मवेशियों को होने वाली एक संक्रामक बीमारी है. इसे कैपरी पॉक्स वायरस भी कहते हैं. मच्छर, मक्खियां, जूं और ततैया आदि कीट इस बीमारी के रोगवाहक के रूप में काम करते हैं. यह भी कहा जा रहा है कि दूषित भोजन-पानी के सेवन से भी लंपी वायरस का संक्रमण फैलता है. इस वायरस से संक्रमित पशुओं की खाल पर गाठें पड़ जाती हैं फिर उनमें घाव हो जाते हैं. मवेशियों को बुखार आना, नाक बहना, अधिक लार बहना और आंख आना इसके अन्य लक्षण दिखाई देते है। वहीं पर इस वायरस के उपचार को लेकर बात कही गई तो, कोई विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है लेकिन गोट पॉक्स वैक्सीन इसके निदान के रूप में इस्तेमाल की जा रही है।

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