Lord Sri Krishna Born : अंधेरी काली रात में ही क्यों पैदा हुए थे भगवान श्रीकृष्ण

Lord Sri Krishna Born : अंधेरी काली रात में ही क्यों पैदा हुए थे भगवान श्रीकृष्ण Lord Sri Krishna Born Why was Lord Krishna born only in the dark black night vkj

Lord Sri Krishna Born : अंधेरी काली रात में ही क्यों पैदा हुए थे भगवान श्रीकृष्ण

Lord Sri Krishna Born : भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण लड्डू गोपाल का जन्म रोहिणी नक्षत्र में भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। इस साल लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव 18 अगस्त को मानाया जाएगा। भगवान कृष्ण जन्म से ही सिद्धियां लेकर पैदा हुए थे। श्री कृष्ण के पिता वसुदेव और उनकी माता देवकी के विवाह के समय जब मामा कंस अपनी बहन देवकी को ससुराल छोड़ने जा रहे थें तभी एक आकाशवाणी हुई थी। जिसमें कहा गया था कि देवकी जी की आठवी संतान के हाथों मामा कंस का वध निश्चित है। आकाशवाणी के बाद मामा कंस ने वसुदेव और देवकी को कारागार में डाल दिया था। लेकिन अष्टमी की रात के करीब 12 बजे कारागार के सभी ताले टूट गए वही कंस के सैनिक गहरी निंद में सो गए। आकाश में घने बादल छा गए और भयंकर बारिश होने लगी। इसके बाद कृष्णजी का जन्म हुआ। लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने आधी रात में ही क्यों जन्म लिया, आइए जानते है।

क्यों लिया आधी रात में जन्म

दरअसल, अष्टमी की रात में जन्म लेने का कारण चंद्रवंशी होना है। भगवान श्री राम सूर्यवंशी हैं, उन्होंने सुबह के समय जन्म लिया था। ऐसे ही भगवान कृष्ण चंद्रवंशी हैं इसलिए उनका जन्म रात्रि में हुआ था। श्रीकृष्ण चंद्रवंशी हैं और चंद्रदेव उनके पूर्वज। वही चंद्रदेव के पुत्र बुध हैं, इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने बुधवार के दिन ही जन्म लिया था। वहीं रोहिणी चंद्रमा की पत्नी व नक्षत्र हैं, इसी कारण रोहिणी नक्षत्र में भगवान ने जन्म लिया। वहीं अष्टमी तिथि शक्ति का प्रतीक मानी जाती है और भगवान विष्णु इसी शक्ति के कारण पूरे ब्रह्मांड का संचालन करते हैं। इसलिए बुधवार के दिन रोहिणी नक्षत्र में अष्टमी तिथि को भगवान कृष्ण का जन्म हुआ, जिस समय उनके सभी पूर्वज उपस्थित थे।

यह भी थी वजह

भगवान कृष्ण ने कंस के कारागार से निकलने के लिए भी आधी रात का समय चुना। ताकि उनके पिता सुरक्षित स्थान पर भेज सकें। इसलिए जब कृष्ण का जन्म हुआ, तभी सबी कारागार के द्वार खुल गए और सैनिक गहरी नींद में सो गए। तब उनके पिता वसुदेव गोकुल में सुरक्षित पहुंचा सके और वापस जेल में अपनी पत्नी के पास आ गए।

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