चीतों के लिए बनाये गये बाड़े में घुसे तेंदुए, पिंजड़े में पकड़कर निकाले गए बाहर

MADHYAPRADESH WILDLIFE: चीतों के लिए बनाये गये बाड़े में घुसे तेंदुए, पिंजड़े में पकड़कर निकाले गए बाहर

 MADHYAPRADESH WILDLIFE: मध्य प्रदेश के श्योपुर जिला स्थित कुनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में दक्षिण अफ्रीका से लाए जाने वाले चीतों को रखने के लिए बनाए गए बाड़े में छह तेंदुए घुस गये। इनमें से दो तेंदुए को पिंजड़े में पकड़कर वहां से बाहर निकाल लिया गया, जबकि चार अन्य को बाहर निकालने के प्रयास किए जा रहे।
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिला स्थित कुनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में दक्षिण अफ्रीका से लाए जाने वाले चीतों को रखने के लिए बनाए गए बाड़े में छह तेंदुए घुस गये। इनमें से दो तेंदुए को पिंजड़े में पकड़कर वहां से बाहर निकाल लिया गया, जबकि चार अन्य को बाहर निकालने के प्रयास किए जा रहे।वन अधिकारियों ने बताया कि दुनिया के सबसे तेज दौड़ने वाले चीतों को रखने के लिए पांच वर्ग किलोमीटर के दायरे में बनाये गये बाड़े में छह तेंदुए घुस गये। कुनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान ने 12 से 15 चीतों को बसाने के लिए तैयारी कर ली है और दक्षिण अफ्रीका से लाये जाने वाले चीतों को खुले जंगल में छोड़ने से पहले इस बाड़े में दो-तीन महीनों तक रखा जाएगा। इनमें मादा चीते भी हैं।
इससे करीब 70 साल बाद, देश में बिलुप्त हुए चीते की दहाड़ फिर से सुनाई देगी। इन चीतों को दक्षिण अफ्रीका से भारत लाने के लिए करीब 10 साल से चर्चा हो रही थी। देश में इस प्रजाति का अंतिम चीता 1947 में अविभाजित मध्य प्रदेश के कोरिया इलाके में देखा गया था, जो अब छत्तीसगढ़ में आता है। बाद में 1952 में इस जानवर को देश में विलुप्त घोषित कर दिया गया। इस प्रजाति के चीते की रफ्तार 80 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है।
मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) जे एस चौहान ने कहा, ‘‘हम पांच वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले ‘सॉफ्ट रिलीज बाड़े’ में विदेश से लाये जाने वाले चीतों को जल्द छोड़ने जा रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि चीतों को खुले जंगल में छोड़ने से पहले संभवतः दो से तीन महीने के लिए बाड़े में रखा जाएगा। जब वे एक बार यहां के वातावरण में घुल-मिल जाएंगे, तब उन्हें बाड़े से बाहर खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।
चौहान ने स्वीकार किया कि छह तेंदुए इन चीतों को रखने के लिए बनाये गये बाड़े में घुस आए। उन्होंने बताया कि दो तेंदुओं को बाड़े से बाहर निकाल लिया गया और शेष चार को हटाने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि इन तेंदुओं को पकड़ने के लिए चारा के साथ पिंजरे लगाए गए हैं। चौहान ने कहा कि कुनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में बड़ी संख्या में तेंदुए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि जिस बाड़े में चीतों को रखा जाना है, उसमें तेंदुए रहे तो चीतों के जीवन पर खतरा हो सकता है। इसको देखते हुए वन विभाग ने तेंदुओं को बाड़े से बाहर करने का अभियान तेज कर दिया है।
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