Lasoda Fruit Benefits: छोटे से जंगली फल के फायदे सुन चौंक जाएगें आप, सिर्फ साल में दो महीने का मेहमान

लसोड़ा पेड़ को इसकी ठोस लकड़ी के लिए अत्यधिक महत्व दिया जाता है, जो दीमक के खिलाफ फायदेमंद है और माना जाता है कि इसे घर के अंदर रखने पर शांति मिलती है।

Lasoda Fruit Benefits: छोटे से जंगली फल के फायदे सुन चौंक जाएगें आप, सिर्फ साल में दो महीने का मेहमान

Lasoda Fruit Benefits: सेहत के नजरिए से हर प्रकार की सब्जियां खास होती है लेकिन कई सब्जियों के फायदे हमें कम ही पता होते है। ऐसे में आपने कभी जंगली फलों में से एक लसोड़ा फल के बारे में सुना है, जो दिखने में भलें ही छोटा होता है लेकिन इसके फायदे बड़े होते है। इतना ही नहीं इसका लाभ हमें केवल साल में दो महीने में ही मिलता है।

जानिए क्या होता है लसोड़ा फल

यहां पर हम एक प्रकार के लसोड़ा फल की बात करें तो, एक जंगली फल है जो गर्म और रेतीले क्षेत्रों में उगता है। यह राजस्थान और गुजरात जैसे क्षेत्रों में पाया जाता है। इस चिपचिपे फल में रक्तचाप को कम करने और शरीर में एलर्जी प्रतिक्रियाओं को कम करने का अनूठा गुण है। इसके इतिहास की बात की जाए तो, यह एक प्रकार से हज़ार साल पुराना जंगली फल माना जाता है। यह फल प्राचीन काल के जमाने का है जो हिमालय, नेपाल, म्यांमार, ताइवान, थाईलैंड, मलेशिया, चीन, पोलिनेशिया और ऑस्ट्रेलिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में पाया गया है।

बता दें कि, औषधीय गुणों का वर्णन आयुर्वेदिक ग्रंथों जैसे 'चरकसंहिता' में किया गया है, जो 7वीं-8वीं ईसा पूर्व में भारत में लिखा गया था और इसे पिचहिल के रूप में संदर्भित किया गया है।

जानिए कौन से है दो महीने

आपको बताते चलें कि, इस अनोखे फल का फायदा आपको साल के 2 महीने में मिलता है मई और जून के महीने में बस 2 महीने के लिए यह फल खाने को मिलता है। इसीलिए लसोड़ा का फल दुर्लभ फलों की श्रेणी में आता है। इसे कच्चा खाने के साथ ही पकाकर भी खाया जा सकता है। कच्चा लसोड़ा जहां कसैला होता है और आपके मुंह का स्वाद बिगाड़ सकता है, वहीं पके हुए लसोड़े मीठे होते हैं, जो काफी स्वादिष्ट लगते हैं।

जानिए क्या होता है इसका आयुर्वेदिक फायदें

आपको बताते चलें, माना जाता है कि लसोड़ा में मौजूद पोषक तत्वों की उचित मात्रा इसे शरीर के लिए फायदेमंद बनाती है। फल की छाल और पत्तियों को सुखाकर पाउडर बनाया जाता है, जिसका इस्ताम आयुर्वेदिक इलाज के रूप में जोड़ों के दर्द और सूजन सहित विभिन्न बीमारियों से राहत दिलाने के लिए किया जाता है। दांत में दर्द होने पर इसकी छाल को पानी में उबालकर ठंडा करने के बाद इसका काढ़ा बनाकर पीने से राहत मिल सकती है।लसोड़ा फल एक मीडियम साइज बेर के आकार का होता है। जब यह कच्चा होता है, तो इसका रंग हरा होता है, वहीं पकने के बाद यह कुछ हद तक पीला हो जाता है। यह पेड़ पर गुच्छों में उगता है और इसका स्वाद थोड़ा कसैला होता है। कच्चे लिसोड़े का उपयोग सब्जी बनाने में किया जा सकता है।

वास्तु में महत्व रखता है लसोड़ा फल

यहां लसोड़ा फल जहां पर स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है तो वहीं पर प्राचीन होने के साथ इस फल का महत्व वास्तु शास्त्र में होता है। लसोड़ा पेड़ को इसकी ठोस लकड़ी के लिए अत्यधिक महत्व दिया जाता है, जो दीमक के खिलाफ फायदेमंद है और माना जाता है कि इसे घर के अंदर रखने पर शांति मिलती है। ग्रामीण इलाकों में कभी-कभी पान के पत्ते की जगह पेड़ की छाल चबायी जाती है और इसका मुंह और जीभ पर लाली जैसा असर होता है।

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