क्या है पश्मीना मार्च, सोनम वांगचुक के 'पश्मीना मार्च' से क्यों डरा प्रशासन? लद्दाख में लगाई धारा 144

Sonam Wangchuk Pashmina March: लद्दाख उस समय सुर्खियों में आ गया जब कारगिल और लद्दाख में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए .

क्या है पश्मीना मार्च, सोनम वांगचुक के 'पश्मीना मार्च' से क्यों डरा प्रशासन? लद्दाख में लगाई धारा 144

   हाइलाइट्स

  • लेह में लगाई धारा- 144
  • इकट्ठा होने पर कार्रवाई 
  • 10 KM  में इंटरनेट बैन

Sonam Wangchuk Pashmina March: 3 फरवरी, 2024 को लद्दाख उस समय सुर्खियों में आ गया जब कारगिल और लद्दाख में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और अपनी मांगों के लिए आवाज बुलंद की। बीते साल से ही कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) और एपक्स बाडी लेह (ABL) पूर्ण राज्य की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं।

   क्या है पश्मीना मार्च ?

आपको बता दें कि महात्मा गांधी की दांडी मार्च के तर्ज पर क्लाइमिट ऐक्टिविस्ट सोनम वांगचुक लेह में पश्मीना मार्च करेंगे। यह मार्च कल यानि 7 अप्रैल को वास्तविक नियंत्रण रेखा ( Actual Line of Control) के पास के क्षेत्रों में होगा। सोनम वांगचुक अपनी मांगों को लेकर यह मार्च निकालेंगे ।

यह मार्च लेह से शुरू करके करीब 300 किमी दूर चीन सीमा तक जाएगा।  इसे देखते हुए प्रशासन ने लेह में धारा- 144 लागू कर 5 से ज्यादा लोगों के इकट्ठे होने पर बैन लगा दिया है।

   अब कल से शुरू होगा आंदोलन का दूसरा दौर

इस आंदोलन के पहले चरण की सफलता को देखते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि वे 7 अप्रैल को सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत करेंगे।  इसके तहत गांधी जी के दांडी मार्च की तरह चांगथांग (चीन के साथ सीमा पर लेह के पूर्व में) तक एक मार्च शुरू करेंगे।

उनका आरोप है कि इस चारागाह भूमि पर बड़े भारतीय उद्योगपतियों और चीनियों की ओर से कब्जा किया जा रहा है। लेह से लगभग 300 किमी दूर स्थित चांगथांग, 4,700 मीटर की औसत ऊंचाई पर स्थित है।  इस क्षेत्र में सर्दियों में तापमान -35 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है।

   प्रशासन के रवैये पर भड़के वांगचुक

वांगचुक ने X परआदेश  एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें दावा किया कि शांतिपूर्ण मार्च की योजना के बावजूद, प्रशासन आंदोलन में भाग लेने वाले लोगों को डराने और बान्ड साइन करने के लिए दबाव डाल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि चूंकि लद्दाख एक केंद्र शासित प्रदेश है इसलिए प्रशासन को दिल्ली से निर्देश मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा- शायद प्रशासन को किसी भी कीमत पर शांति बनाए रखने के लिए कहा गया है। 31 दिनों से अनशन चल रहा है और कोई घटना नहीं हुई है। फिर भी लोगों को पुलिस स्टेशनों में ले जाया जा रहा है और शांति भंग होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है, मुझे डर है कि इससे वास्तव में शांति भंग हो सकती है।

यह भी पढ़ें
Here are a few more articles:
Read the Next Article