कोविड-19 महामारी ने सभी के जीवन पर एक अलग छाप छोड़ी है: न्यायमूर्ति हिमा कोहली

नयी दिल्ली, चार जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश हिमा कोहली ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 महामारी ने सभी के जीवन पर एक अलग तरह से छाप छोड़ी है।

न्यायमूर्ति कोहली दिल्ली उच्च न्यायालय से अपने विदाई कार्यक्रम में बोल रही थीं। न्यायमूर्ति कोहली को तेलंगाना उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश के पद पर पदोन्नत किया गया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय कोविड​​-19 महामारी के कारण पिछले साल मार्च से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से काम कर रहा है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपनी वरिष्ठ न्यायाधीश के लिए एक आनलाइन विदाई कार्यक्रम का आयोजन किया।

दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल, अन्य न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं ने 61 वर्षीय न्यायमूर्ति कोहली को विदाई दी जो मई 2006 में न्यायधीश बनी थीं। न्यायमूर्ति कोहली तेलंगाना उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश होंगी।

न्यायमूर्ति कोहली ने कोविड​​-19 महामारी को मुश्किल समय बताया और न्यायमूर्ति पटेल को उनके बहुमूल्य मार्गदर्शन और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी से हममें से प्रत्येक को हर तरीके से विकसित होने में मदद मिली है और इससे हमें यह अहसास हुआ कि हमने अपने जीवन को कैसे जटिल बना लिया है और इसे कैसे सरल बनाया जा सकता है। इसने हमें हमारे परिवारों के साथ भी करीब ला दिया है, जिनके साथ हम घर से काम करते हुए अच्छा समय बिता रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इन कठिन समय में हम खुद में बदलाव लाये हैं और कोविड-19 ने हम सभी पर अलग-अलग तरीके से छाप छोड़ी है।’’

न्यायमूर्ति कोहली ने अपने विदाई कार्यक्रम में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह 1984 में जब बार की सदस्य बनी थीं तब उच्च न्यायालय में बहुत कम महिला वकील थीं और स्वतंत्र रूप से काम करना कठिन था और मुवक्किल अधिकतर पुरुष वकीलों की मदद लेते थे।

उन्होंने कहा कि कितनी अच्छी महिला वकील क्यों न हो , उसे अपना रास्ता खुद बनाना होता है।

भाषा अमित उमा

उमा

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