knowledge : मात्र 52 सैकेंड में गाते हैं राष्ट्रगान, जानिए कहां बनी थी राष्ट्रगान की धुन, राष्ट्रगान से जुड़ी कुछ रोचक बातें।

नई दिल्ली। राष्ट्रगान की धुन के बारे में तो आप सभी जानते हैं।  इसे कई अवसरों पर बजाया जाता है। यह राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है। 15 अगस्त 26 जनवरी के अलावा जब कभी भी भारत के गौरव की बात आती है ,  इसे गाया जाता है। पर क्या आप इस बात से बाकिफ है कि ये कहां बना था और इसे कितनी देर तक गाया जाता है। अगर नहीं तो आइए आज हम आपको बताते हैं।

जाने राष्ट्रगान से जुड़ी बातें —
1 — राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की धुन रविंद्रनाथ टैगोर ने आंध्र प्रदेश के मदनापल्ली में तैयार की थी।
2 — पूरा राष्ट्रगान गाने में एक मिनिट से भी कम करीब 52 सेकेंड का समय लगता है।
3 — पहली और अंतिम पंक्ति गाने में 20 सेकेंड का समय लगता है।

4 — राष्ट्रगान को लेकर बनाए गए नियमों का अनुपालन करना जरूरी है।

राष्ट्रगान को लेकर हैं ये नियम
राष्ट्रगान को लेकर कुछ नियम बनाए गए हैं जिनका अनुपालन करना जरूरी होता है। अगर कोई व्यक्ति इन नियमों की अवहेलना करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। फिल्म के किसी हिस्से में अगर राष्ट्रगान बजता है तो खड़ा होना या गाना जरूरी होता है। देश आजाद होने के बाद 14 अगस्त 1947 की रात पहली बार संविधान सभा की बैठक हुई और अंत में इस सभा का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। इसके अलावा अगर कहीं राह चलते या घर पर भी इसकी धुन सुनाई दे तो आपको इसके सम्मान में खड़े होना जरूरी है।

राष्ट्रगान के रोचक तथ्य —
वर्ष 1911 में रविंद्रनाथ टैगोर ने बंगाली में 5 पदों की एक कविता लिखी थी। जिसके पहले पद को राष्ट्रगान के रूप में लिया गया। इसमें बंगाली के साथ—साथ संस्कृत के शब्दों का भी उपयोग किया गया। स्वर्गीय कवि रविंद्रनाथ टैगोर ने ‘जन गण मन’ धुन के साथ जिस धुन की रचना की थी उसे ही भारत के राष्ट्रगान का नाम दिया गया।

इस प्रकार पढ़ते हैं संक्षिप्त संस्करण —
कुछ अवसरों पर राष्ट्र गान की पहली और अंतिम पंक्तियों के साथ एक संक्षिप्त संस्करण भी बजाया जाता है. इसे इस प्रकार पढ़ा जाता है-

जन-गण-मन-अधिनायक जय हे
भारत-भाग्‍य-विधाता
जय हे, जय हे, जय हे
जय जय जय जय हे

पहली बार यहां गाया गया था राष्ट्रगान
राष्ट्रगान को पहली बार 27 दिसंबर, 1911 को कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था। रविन्द्र नाथ टैगोर के द्वारा लिए इस संगीत को 24 जनवरी 1950 में पहली बार आधिकारिक तौर पर राष्ट्रगान के रूप में अपनाया।

इस समय हुई थी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की आधिकारिक घोषणा
1947 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय प्रतिनिधिमंडल से राष्ट्रगान के बारे में जानकारी मांगी जाने पर महासभा को ‘जन गण मन’ की रिकॉर्डिंग दी गई। उस दिन दुनिया भर के प्रतिनिधियों के सामने राष्ट्रगान गूंजा। सभी देशों ने इसके धुन की सराहना की। जिसके 3 वर्ष बाद 24 जनवरी, 1950 को जब भारत के संविधान पर हस्‍ताक्षर करने के लिए सभा हुई तो देश के प्रथम राष्‍ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने आधिकारिक रूप से ‘जन गण मन’ को राष्‍ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ को राष्‍ट्रगीत घोषित किया।

भारत का राष्‍ट्रगान
जन-गण-मन अधिनायक जय हे
भारत भाग्‍य विधाता
पंजाब-सिंधु-गुजरात-मराठा
द्राविड़-उत्‍कल-बंग
विंध्य हिमाचल यमुना गंगा
उच्‍छल जलधि तरंग
तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मांगे
गाहे तव जय-गाथा
जन-गण-मंगलदायक जय हे भारत भाग्‍य विधाता
जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे

मन की बात में की थी चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 25 जुलाई को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में आजादी का अमृत महोत्सव के एक भाग के रूप में इस पहल की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि “संस्कृति मंत्रालय की ओर से यह प्रयास है कि अधिक से अधिक संख्या में भारतीय एक साथ राष्ट्रगान गाएं। इसके लिए एक वेबसाइट भी बनाई गई है। राष्ट्रगानडॉटइन (Rashtragan.in) इसकी मदद से आप राष्ट्रगान को प्रस्तुत कर रिकॉर्ड कर सकते हैं।

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