लोग आवारा कुत्तों को भगाने के लिए घर के बाहर रंगीन पानी क्यों रखते हैं, जानिए इसके पीछे की वजह

rangin pani

नई दिल्ली। आवारा कुत्तों को भगाने के लिए हम देखते हैं कि कुछ लोग अपने घरों के बाहर या दरवाजों पर किसी ट्रांसपरेंट बोतल में लाल, नीले या हरे रंग का पानी भरकर रखते हैं। आखिर ऐसा क्यों किया जाता है, इसके पीछे कोई विज्ञान है या फिर टोटका और सबसे बड़ी बात, क्या इससे आवारा कुत्ते भाग जाते हैं। इन्हीं सभी सवालों के जवाब आज हम इस आर्टिकल में जानने की कोशिश करेंगे।

कुत्ते कलर ब्लाइंड होते हैं

मालूम हो कि इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ बारी के वैज्ञानिकों ने कुत्तों के आंखों की जांच के लिए एक तरीका विकसित किया था। जिसमें सामने आया कि जिस तरह कुछ मनुष्य कलर ब्लाइंड होतें हैं उसी तरह कुत्तों को नीले, हरे और लाल रंग में अंतर करने में परेशानी होती है। इसलिए जो जंगल में कुत्ते रहते हैं वो या तो सुबह निकलते हैं या फिर शाम ढलने के बाद सक्रिय होते होते हैं।

परेशान होकर जगह छोड़ देते हैं

ठीक यही प्रक्रिया आवारा कुत्तों पर भी लागू होती है। जब उनके सामने लाल, नीला या हरा रंग आता है तो उन्हें वो रंग दिखाई नहीं देता है। इस कारण से वो परेशान हो जाते हैं और उस स्थान को छोड़ने में ही अपनी भलाई समझते हैं। यानी कुल मिलाकर कहें तो जो लोग अपने घरों के बाहर बोतल में लाल, नीले या हरे रंग का पानी भरकर रखते हैं। उसके पीछे कोई टोटका नहीं, बल्कि साइंस है।

क्या होता है कलर ब्लाइंडनेस ?

कलर ब्लाइंड को हिंदी में वर्णांधता कहते हैं। यह आंखो का एक रोग है जिसमें लाल, हरे और नीले रंग में अंतर पता नहीं चल पाता। इसका मतलब ये नहीं कि ये कोई अंधापन है बल्कि ये आंखों के रेटिना में पाए जाने वाले दो प्रकार की कोशिकाओं की बीमारी है। जो प्रकाश के प्रति संवेदनशील होते है। इन दोनों कोशिकाओं को रोडस और कोन्स कहते हैं। ये दोनों कोशिकाएं हमें रंग का बोध कराती हैं।

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