जानिए क्यों मामूली संक्रमण भी हो जाता है खतरनाक, कभी न करें ये गलतियां

corona virus

नई दिल्ली। देश में कोरोना की दूसरी लहर ने कोहराम मचाया हुआ है। एक्सपर्ट कहते हैं कि कोरोना से संक्रमित होने वाले 90% लोग घर पर ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन हालिया रिपोर्ट को देखें तो हल्के लक्षण वाले लोग भी अचानक से गंभीर हो जा रहे हैं। ऐसे में जानना जरूरी है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?

लापरवाही के कारण गंभीर हो जा रहे हैं लोग

दरअसल, कोरोनो वायरस के संक्रमण में बीमारी का जल्द पता लगाने और समय पर इलाज मिलने की सख्त आवश्यकता होती है। वहीं कई बार कोविड-19 टेस्ट की रिपोर्ट आने में देरी के चलते मामले गंभीर होते चले जाते हैं। ऐसे में जरा सी लापरवाही के चलते हल्के लक्षण अचानक से गंभीर हो सकते हैं। इसलिए लक्षणों में मामूली बदलाव को ट्रैक या मॉनिटर करना और एहतियात बरतना बहुत महत्वपूर्ण है। कोविड-19 के अधिकांश मामले हल्के लक्षणों से शुरू होते हैं। लेकिन अगर थोड़ी सी भी इसमें लापरवाही की जाती है तो पहले से मरीज को घेर बैठा कोरोना गंभीर रूप ले लेता है और इसके बाद मरीज को अस्पताल में भर्ती करना की नौबत आ जाती है।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

एक्सपर्ट कहते हैं कि कोविड-19 में साइकोटाइन, हैप्पी हाइपोक्सिया भी एक गंभीर वजह हो सकती है, जो बेहद कम समय में हाल बदतर कर सकती है। डॉक्टर्स कहते हैं कि मरीजों को भी पहले दिन से ही इसे कंट्रोल करने के लिए एहतियात बरतना चाहिए। जैसे ही कोविड-19 के लक्षण उभरने शुरू हो जाएं, लोगों को इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए। सामान्य, असामान्य या गंभीर लक्षणों की निगरानी करना संक्रमण में बेहद महत्वपूर्ण है। लोगों को कभी भी इसका इलाज एलेर्जिक रिएक्शन या वायरल समझकर नहीं करना चाहिए। ज्यादातर लोग शुरूआती लक्षण दिखने के बाद वायरल समझकर इसका इलाज करने लगते हैं।

डॉक्टर्स की सलाह पर करें दवाओं का इस्तेमाल

अगर आपके शरीर में हल्के से भी लक्षण दिखते है तो तुरंत कोविड टेस्ट करवाना चाहिए। इससे समय पर इंफेक्शन का पता लगाया जा सकता है और इलाज शुरू किया जा सकता है। इसके अलावा कई मामलों में देखा गया है कि होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीज अपने मन मुताबिक कई दवाइयां लेने लगते हैं। इससे गंभीर लक्षण का खतरा बढ़ जाता है। कोरोना से जूझ रहे मरीज को हमेशा डॉक्टर्स की सलाह पर ही दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए। डॉक्टर्स कहते हैं कि जो लोग होम आइसोलेशन में हैं उन्हें घर पर स्टेरॉयड का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए इससे कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। एस्कपर्ट्स मानते हैं कि म्यूकोमाइकोसिस या ब्लैक फंगस इंफेक्शन भी स्टेरॉयड के गलत इस्तेमाल के कारण हो सकते हैं।

इन चीजों को भी देखें

इन चीजों के अलावा मरीजों को हमेशा SP02 के लेवल और बुखार से लेकर सभी जरूरी बातों को मॉनिटर करना चाहिए। यदि आपकी बॉडी में ऑक्सीजन लेवल 92 प्रतिशत से नीचे जा रहा है। या यदि किसी इंसान का बुखार लगातार सातवें दिन तक नीचे नहीं आ रहा है तो ये भी खतरे की घंटी है। साथ ही हाई बीपी या डायबिटीज के मरीजों को भी इसके लक्षण नजरअंदाज नहीं करने चाहिए।

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