जानिए कौन है मुल्ला अब्दुल गनी बरादरी, जिसे तालिबान बना सकता है अफगानिस्तान प्रमुख

जानिए कौन है मुल्ला अब्दुल गनी बरादरी, जिसे तालिबान बना सकता है अफगानिस्तान प्रमुख

नई दिल्ली। अफगानिस्तान पर अब तालिबान का कब्जा हो चुका है। 15 अगस्त को तालिबान के लड़ाकों ने काबुल में प्रवेश किया और राष्ट्रपति महल पर कब्जा कर लिया। तालिबान के कब्जे से पहले अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने भी देश छोड़ दिया। गनी अपने परिवार के साथ ताजिकिस्तान चले गए। ऐसे में अब सवाल उठता है कि जब राष्ट्रपति देश छोड़ चुके हैं तो फिर अफगानिस्तान का प्रमुख कौन होगा? जानकार मान रहे हैं कि तालिबान मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को अपना प्रमुख बना सकता है। ऐसे में आईए जानते हैं कौन है ये मुल्ला बरादर?

तालिबान के संस्थापक सदस्यों में से एक

मुल्ला अब्दुल गनी बरादरी उन 4 लोगों में से एक है। जिन्होंने 1994 में तालिबान का गठन किया था। साल 2001 में अमेरिकी फौज की कार्रवाई के बाद मुल्ला पाकिस्तान भाग गया था। फरवरी 2010 में अमेरिका ने उसे पाकिस्तान के कराची से गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन अफगानिस्तान सरकार और तालिबान के बीच शांति वार्ता को बढ़ावा देने के लिए उसे सितंबर 2013 में रिहा कर दिया गया।

बरादरी इसलामी नजरिए वाला है

मुल्ला अब्दुल गनी बरादरी को तालिबान के कभी प्रमुख रहे मुल्ला मोहम्मद उमर का करीबी माना जाता है। 90 के दशक में जब तालिबान बना था तब अब्दुल बरादरी ना केवल मोहम्मद उमर का खास था बल्कि उसका नजदीकी रिश्तेदार भी था। 90 के दशक में उसे तालिबान का दूसरा बड़ा नेता माना जाता था। बरादरी के बारे में जानकार कहते हैं कि वह एक कठोर रवैये वाला इंसान है। लोकतंत्र, महिलाओं, खुले विचारों और बेहतर देश को लेकर उसके ख्याल इस्लामी नजरिए वाले हैं।

बरादरी का निजी जीवन

हालांकि, मुल्ला बरादरी तालिबान में एक अकेला ऐसा शख्स है जिससे अमेरिकी सरकार भी बातचीत करती है। ऐसे में कहा जा रहा है कि अमेरिका और मुल्ला बरादर के बीच कुछ समझौता हुआ है। जिसके कारण ही तालिबान अफगानिस्तान में खुलकर खेल रहा है। मुल्ला बरादर के निजी जिंदगी की बात करें तो उसका जन्म उरूज़गान प्रांत के देहरावुड जिले के वीटमाक गांव में 1968 में हुआ था। उसका संबंध दुर्रानी कबीले से है। अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई भी दुर्रानी कबीले के ही थे। बरादर 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान में तालिबान राज के दौरान कई पदों पर रहा। उसे तालिबान ने हेरात और निमरूज प्रांत का गर्वनर बनाया था। इसके साथ ही वो पश्चिम अफगानिस्तान की सेनाओं का भी कमांडर था। इंटरपोल ने तो उसे अफगानिस्तान का रक्षा मंत्री भी माना था।

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