KM Mammen Mappillai : गुब्बारे ले लो, गुब्बारे ले लो से MRF टायर तक का सफर

KM Mammen Mappillai : गुब्बारे ले लो, गुब्बारे ले लो से MRF टायर तक का सफर

KM Mammen Mappillai : एमआरएफ कंपनी वाहनों के टायर बनाने वाली दु​निया की सबसे बड़ी कंपनी बन चुकी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस कंपनी का मालिक कौन है? एमआरएफ का फुलफॉर्म क्या है? बहुत ही कम लोग होंगे जिन्हें इन सवालों का जबाव पता होगा। MRF का पूरा नाम है- मद्रास रबर फैक्ट्री। टायर उद्योग में यह नाम लिस्ट में सबसे टॉप पर है। एमआरएफ कंपनी साइकिल से लेकर ट्रक के टायर बनाती है।

कौन है कंपनी का मालिक

देश की सबसे बड़ी टायर कंपनियों में शुमार एमआरएफ के मालिक केएम मैम्मेन मप्पिल्लई है। जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम पाया है। एक समय था जब मप्पिल्लई सड़कों पर गुब्बारे बेचते थे। लेकिन आज उनकी कंपनी भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में सबसे बड़ी कंपनी बन चुकी है। एमआरएफ कंपनी में टायर्स के अलावा भी कई प्रोडक्ट्स बनाए जाते हैं जैसे ट्रेड्स, ट्यूब्स, पेंट्स, बेल्ट्स और टॉयज।

6 साल तक बेचे गुब्बारे

केएम मैम्मेन मप्पिल्लई का जन्म केरल में एक सीरियाई ईसाई परिवार में हुआ था। मैम्मेन के पिता स्वतंत्रता सेनानी थे। एक बार उनके पिता को गिरफ्तार कर लिया गया था तब, मैम्मेन उस वक्त स्नातक की पढ़ाई कर रहे थें। पिता के जेल जाने के चलते घर की जिम्मेदाी उनपर आ गई थी। इसके बाद वह सड़कों पर गुब्बारे बेचने का काम करने लगे। करीब 6 साल तक गुब्बारे बेचने के बाद उन्होंने रबर का व्यापार करना शुरू कर दिया। उस समय वह केवल 24 साल के थे। वह कमने में बच्चों के खिलौने बनाया करते थे। उन्होंने चीता स्ट्रीट मद्रास में अपना पहला ऑफिस खोला। धीरे-धीरे मैम्मेन ने रबड़ के उत्पाद बेचने शुरू किए। साल 1956 के आते-आते उनकी कंपनी रबड़ के कारोबार में एक बड़ा नाम बन चुकी थी। वर्ष 1960 में उन्होंने रबर और टायरों की एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई।

अमेरिकी कंपनी से की डील

मपमप्पिलई ने मैन्सफील्ड टायर एंड रबर कंपनी ऑफ अमेरिका के साथ टायर बनाने के लिए एक समझौता किया। कंपनी ने 1973 में देश में पहला नायलॉन टायर लॉन्च किया। 1979 तक कंपनी का नाम विदेशों में फैल चुका था, लेकिन उसी साल अमेरिकी कंपनी मैन्सफील्ड ने एमआरएफ में अपनी हिस्सेदारी बेच दी। इसके बाद कंपनी का नाम एमआरएफ लिमिटेड हो गया। इसके बाद से मपमप्पिलई रूके नहीं, और आज देश के नामी लोगों में उनका नाम आता है।

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