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Khandwa Loksabha Upchunav 2021: 41 साल बाद होगा खंडवा लोकसभा सीट पर उपचुनाव, इन नेताओं के नामों पर चर्चा...

Khandwa Loksabha Upchunav 2021: 41 साल बाद होगा खंडवा लोकसभा सीट पर उपचुनाव, इन नेताओं के नामों पर चर्चा... Khandwa Lok Sabha seat to be held after 41 years, names of these leaders discussed

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Bansal News
Khandwa Loksabha Upchunav 2021: 41 साल बाद होगा खंडवा लोकसभा सीट पर उपचुनाव, इन नेताओं के नामों पर चर्चा...

खंडवा। भाजपा सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के निधन के बाद से खंडवा लोकसभा सीट खाली पड़ी है। इस सीट के लिए चुनाव आयोग ने भले ही अब तक तारीख निर्धारित नहीं की हो लेकिन क्षेत्र में दोनों पार्टियों के दावेदार सक्रिय हो गए हैं। साल 1980 से यानी 41 साल बाद इस सीट पर एक बार फिर उपचुनाव की स्थिति बनी है। यहां कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों के दावेदार अपने- पने मतदाताओं को लुभाने में जुट गए हैं। यहां अभी किसी भी पार्टी ने अपने संभावित नेताओं के नाम नहीं बताए हैं। वहीं सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री अरुण यादव के नाम के कयास लगाए जा रहे हैं। यादव खुद भी इस सीट से अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं।

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यादव ने इस क्षेत्र में अघोषित प्रत्याशी के तौर पर चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है। हालांकि अरुण को 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था। इस सीट से नंदकुमार सिंह चौहान कई बार चुनाव जीते हैं। यह सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है। अब नंदकुमार चौहान के बाद यहां से भाजपा में भी कुछ बड़े नामों पर चर्चा की जा रही है। सूत्रों की मानें तो भाजपा के पूर्व प्रदेश संगठन महामंत्री कृष्णमुरारी मोघे और पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस के नामों पर चर्चा तेज है। भाजपा के नेता भी मैदानी तौर पर सक्रिय हो गए हैं।

खंडवा लोकसभा सीट का गणित
दरअसल, खंडवा लोकसभा क्षेत्र में आठ विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें खंडवा, बुरहानपुर, नेपानगर, पंधाना, मांधाता, बड़वाह, भीकनगांव और बागली शामिल है। इन 8 विधानसभा सीटों में से 3 पर भाजपा, 4 पर कांग्रेस और 1 सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी का कब्जा है। 1980 के बाद यहां पहली बार उपचुनाव कराए जाएंगे। इससे पहले 1979 में यहां उपचुनाव कराया गया था। जिसमें जनता पार्टी के कुशाभाऊ ठाकरे ने कांग्रेस के एस.एन ठाकुर को हराया था। कुशाभाऊ बाद में बीजेपी के अध्यक्ष भी बने थे।

क्या है इस सीट का इतिहास
इस सीट से सबसे ज्यादा बीजेपी के नंदकुमार सिंह चौहान जीतने वाले सांसद हैं। यहां की जनता ने उन्हें 6 बार चुनकर संसद तक पहुंचाया था। खंडवा लोकसभा सीट पर सबसे पहला चुनाव साल 1962 में हुआ था। जिसमें कांग्रेस के महेश दत्ता ने जीत हासिल की थी। इसके बाद 1967 और 1971 में भी कांग्रेस ने कब्जा जमाए रखा। लेकिन साल 1977 में भारतीय लोकदल ने इस सीट पर कांग्रेस को हरा दिया। 1980 में कांग्रेस ने फिर से वापसी की और शिवकुमार सिंह सांसद बनें। आगला चुनाव भी कांग्रेस ने ही जीता। पहली बार इस सीट पर 1989 में बीजेपी ने जीत हासिल की। हालांकि बीजेपी ज्यादा दिनों तक यहां टिक नहीं पाई और साल 1991 में कांग्रेस ने फिर से इस सीट पर अपना कब्जा जमा लिया।

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