Kark Sankranti Dakshidayan Surya 2022 : आखिर क्या है कर्क संक्रांति का वैज्ञानिक और धार्मिक कारण, जो आज से आप पर डालेंगी सीधा असर

Kark Sankranti Dakshidayan Surya 2022 : आखिर क्या है कर्क संक्रांति का वैज्ञानिक और धार्मिक कारण, जो आज से आप पर डालेंगी सीधा असर

नई दिल्ली। करीब एक महीने Kark Sankranti Dakshidayan Surya 2022 बाद सूर्य एक बार फिर surya rashi parivartan 2022 अपना राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। जिसमें वे मिथुन राशि में कर्क में प्रवेश करेंगे। ​इसी के साथ सूर्र्य का दक्षिणायन शुरू हो जाएगा। पर क्या आप जानते हैं ये आयन surya ka gochar 2022 क्या होते हैं। और इनका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। यदि नहीं तो चलिए जानते हैं पंडित अनिल पांडे से।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक वर्ष में दो अयन होते हैं। अयन का अर्थ परिवर्तन से है। अर्थात साल में दो बार सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होता है। सूर्य 6 महीने उत्तरायण और 6 महीने दक्षिणायन में रहता है। यानि उत्तरायण के दौरान सूर्य देव हमारे भारतवर्ष में पूर्व से पश्चिम थोड़ा उत्तर होकर जाते हुए दिखते हैं। इसके विपरीत जब सूर्य देव दक्षिणायन होते हैं तो वे पूर्व से पश्चिम की तरफ थोड़ा दक्षिण होकर जाते हुए प्रतीत होते हैं। हम सभी जानते हैं की पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है परंतु हम को ऐसा लगता है कि सूर्य पूर्व से निकलते हैं और पश्चिम में जाकर के डूबते हैं। अनिल पांडे से जानते हैं कि सूर्य के दक्षिणायन का आप पर क्या प्रभाव होगा।

कर्क संक्रांति से होती है दक्षिणायन की शुरूआत —
पंडित अनिल पांडे के अनुसार कर्क संक्रांति से दक्षिणायन की शुरूआत होती है। जिसकी अवधि छह माह तक होती है। सूर्य देव एक राशि में एक माह तक विराजमान रहते हैं। इस प्रकार कर्क, सिंह, कन्या, तुला वृश्चिक और धनु राशि यानि छह माह तक दक्षिणायन की अवधि रहती है।

एक वर्ष में दो आयन —
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक वर्ष में दो अयन होते हैं। अयन का अर्थ परिवर्तन से है। यानि साल में दो बार सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होता है। सूर्य 6 महीने उत्तरायण और 6 महीने दक्षिणायन में रहता है।

इन राशियों में प्रवेश पर होते हैं उत्तरायाण—दक्षिणायन —
सूर्य का प्रवेश जब मकर राशि में होता है तो इसको मकर संक्रांति कहते हैं और इस समय सूर्य उत्तरायण होते हैं। इसके विपरीत जब सूर्य का प्रवेश कर्क राशि में होता है तो उस समय को कर्क संक्रांति कहते हैं। सूर्य को दक्षिणायन कहा जाता है।

आज के इस लेख में जानते हैं कि कर्क संक्रांति क्या है ? इसका वैज्ञानिक और धार्मिक कारण क्या है? 2022 में यह कब से प्रभावशाली हो रही है।

कब होगी कर्क संक्रांति 16 या 17 जुलाई —

  • इस वर्ष कुछ पंचांग 16 जुलाई को और कुछ पंचांग 17 जुलाई को कर्क संक्रांति को मानते हैं।
  • इस वर्ष भुवन विजय पंचांग के अनुसार 17 जुलाई को सूर्य दिन में 10:08 पर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे।
  • चिंताहरण जंत्री के अनुसार सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश 16 जुलाई को रात्रि में 22:56 पर हो रहा है। तो वहीं कर्क संक्रांति का पुण्यकाल अगले दिन 9:10 बजे तक रहेगा।
  • पुष्पांजलि पंचांग के अनुसार सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश 16 जुलाई को 11:17 रात्रि से होगा। इसका पुण्य काल अगले दिन रात्रि 12:10 तक रहेगा।
  • लाला रामस्वरूप पंचांग के अनुसार 17 जुलाई को 10:10 से सूर्य देव कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इनका पुण्य काल अगले दिन 11:05 तक रहेगा। पुण्य काल की अवधि में दान करने से स्नान करने से पुर्ण लाभ प्राप्त होता है।

कर्क संक्रांति के दिन से कई घटनाएं प्रारंभ होती हैं:-
1-सूर्य मिथुन राशि में से कर्क राशि में प्रवेश करते हैं।
2-सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन हो जाते हैं।
3- दिन के घटने की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है।
4- देवताओं की रात और राक्षसों का दिन प्रारंभ हो जाती है।
5-देवता शयन में हो जाते हैं और सभी शुभ कार्य जैसे शादी ब्याह मुंडन जनेऊ नामकरण आदि बन्द हो जाते हैं।

कर्क संक्रांति का वैज्ञानिक कारण —

  • खगोल विज्ञान के हिसाब से, उत्तरी गोलार्द्ध में कर्क संक्रान्ति को सर्दी की शुरुआत होती है, जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध में इस दिन से गर्मी की शुरुआत हो जाती है। यह दिन उत्तरी गोलार्द्ध का सबसे लंबा दिन होता है।
  • कर्क संक्रांति को किसी भी शुभ और नए कार्य के प्रारंभ के लिए शुभ नहीं माना जाता है।
  • इस दिन सूर्यदेव को जल अर्पित करें।
  • संक्रांति में की गई सूर्य उपासना से दोषों का शमन होता है।
  • सूर्य संक्रांति पर आदित्य हृदय स्तोत्र एवं सूर्य मंत्र का पाठ करें।
  • इस समय में शहद का प्रयोग लाभकारी माना जाता है।
  • कर्क संक्रांति पर वस्त्र एवं खाने की चीजों और विशेषकर तेल के दान का विशेष महत्व है।

कर्क सं​क्रांति का राशियों पर असर —
सूर्य के इस परिवर्तन का प्रत्येक राशि पर प्रभाव होगा कुछ राशि पर यह प्रभाव धनात्मक होगा तथा कुछ राशियों पर यह प्रभाव ऋणात्मक होगा। राशियों पर प्रभाव का वर्णन संक्षेप में निम्नानुसार है।

मेष राशि —
मेष राशि में सूर्य सुख भाव में रहेगा और सुख की वृद्धि करेगा। संतान से आपको सुख मिलेगा और कार्यालय में आपको परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

वृष राशि —
वृष राशि के जातकों के क्रोध में वृद्धि होगी। भाग्य में कमी आएगी तथा सुख में वृद्धि हो सकती है।

मिथुन राशि —
मिथुन राशि के जातकों के पास धन की वृद्धि होगी। छोटी मोटी दुर्घटना का योग है। क्रोध में भी वृद्धि की संभावना है।

कर्क राशि —
कर्क राशि के जातकों के स्वास्थ्य में सुधार होगा। उनके जीवन साथी के स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। धन में थोड़ी बहुत वृद्धि हो सकती है।

सिंह राशि —
सिंह राशि के जातकों को कचहरी के कार्यों में सफलता का योग है। शत्रुओं में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य ठीक रहेगा।

कन्या राशि —
कन्या राशि वालों के लिए भरपूर धन आने का योग है। संतान को कष्ट होगा।

तुला राशि —
तुला राशि के व्यक्तियों को अपने कार्यालय में प्रशंसा प्राप्त होगी। माताजी को कष्ट हो सकता है। धन में थोड़ी-बहुत वृद्धि संभव है।

वृश्चिक राशि —
वृश्चिक राशि के लोगों के लिए भाग्य में वृद्धि होगी। क्रोध में कमी आएगी। भाइयों से क्लेश होगा। कार्यालय में सहयोग प्राप्त होगा।

धनु राशि —
धनु राशि के जातकों के लिए दुर्घटनाओं से संभालने की आवश्यकता है। धन में कमी आएगी। भाग्य में वृद्धि होगी।

मकर राशि —

मकर राशि के जीवन साथी को सुख प्राप्त होगा। स्वयं के स्वास्थ्य में कमी आएगी। दुर्घटना हो सकती है।

कुंभ राशि —
कुंभ राशि के शत्रुओं में कमी होगी। कचहरी के कार्यों में असफलता हो सकती है। जीवनसाथी का स्वास्थ्य ठीक रहने की उम्मीद है।

मीन राशि —
मीन राशि के जातकों को अपने संतान से सहयोग प्राप्त होगा। धन की उपलब्धता बढ़ेगी। स्वास्थ्य में गिरावट हो सकती है।

anil kumar 2

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