दिखने लगा दीपावली का साइड इफेक्ट: कानपुर में पटाखों की चपेट में आईं 51 आंखें, 9 लोगों की रोशनी हमेशा के लिए छिनी

Kanpur Firecracker Accident: यह त्रासदी न केवल प्रभावित परिवारों के लिए दुखद है, बल्कि पूरे शहर में पटाखों के दुरुपयोग को लेकर चिंता बढ़ा रही है। स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे

दिखने लगा दीपावली का साइड इफेक्ट: कानपुर में पटाखों की चपेट में आईं 51 आंखें, 9 लोगों की रोशनी हमेशा के लिए छिनी

रिपोर्ट : अनुराग श्रीवास्तव - कानपुर

Kanpur Firecracker Accident: कानपुर में त्योहार के जोश में अंधाधुंध चलाए गए पटाखों ने कई जिंदगियों को अंधेरे में धकेल दिया है। कहने को तो ये पर्व रोशनी बिखेरने का पर्व था लेकिन इस रोशनी के पर्व ने कई जीवन मे अंधेरा कायम कर दिया । बताते चले दीवाली के बाद से पिछले 48 घंटों में कानपुर मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल में आंखों की गंभीर चोटों के साथ 51 मरीज पहुंचे, जिनमें से 9 की आंखों की रोशनी पूरी तरह खत्म हो चुकी है। इनमें बच्चे और युवा शामिल हैं, जिनकी आंखों की पुतलियां फट गईं, कॉर्निया झुलस गया और आंखों की आंतरिक संरचना बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। यह आंकड़ा केवल एक सरकारी अस्पताल का है, जो इस त्रासदी की भयावहता को दर्शाता है।.
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पटाखों का कहर: कॉर्निया में घाव, बारूद से नुकसान

हैलट अस्पताल के नेत्र विभाग की प्रमुख डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि ज्यादातर मामले कार्बाइड वाले पटाखों, बमों और बंदूकनुमा खिलौनों से जुड़े हैं। कई मरीजों की आंखों में बारूद के कण घुस गए, जिससे कॉर्निया में गहरे घाव हो गए। कुछ बच्चों के मामलों में कॉर्निया इतना झुलस गया है कि उसे बचाना अब असंभव है। सिलिकॉन और प्लास्टिक के कण भी आंखों में मिले, जो चश्मों के टूटने या बम फटने से आंखों में प्रवेश कर गए। 13 मरीजों की आंखों में गहरे जख्म हैं, जिनमें से कई की उम्र 8 से 16 साल के बीच है।
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तीन दिल दहलाने वाली घटनाएं

  1. विनायकपुर का दर्दनाक हादसा: विनायकपुर न्यू सिविल लाइंस निवासी 21 वर्षीय दिव्यांश ओमर अपनी गली में पटाखे चला रहे थे। अचानक एक बम फट गया, जिसके कारण उनके चश्मे का लेंस टूटकर आंख में घुस गया। इससे उनकी पुतली फट गई। डॉक्टरों ने सर्जरी कर कांच के टुकड़े निकाल दिए, लेकिन रोशनी कितनी लौटेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।  
  2. 11 साल के बच्चे की आंख झुलसी: फतेहपुर निवासी 11 वर्षीय विपिन घर के बाहर खड़ा था, तभी किसी ने पीछे से कार्बाइड गन छोड़ दी। इससे उसकी एक आंख पूरी तरह झुलस गई और अब केवल 10% रोशनी बची है।  
  3. 15 साल की मुस्कान की जिंदगी में अंधेरा: पनकी सुजानपुर की 15 वर्षीय मुस्कान घर के बाहर खड़ी थी, जब पास से उड़ी एक पटाखे की चिंगारी उसकी आंख में जा गिरी। इससे उसकी पुतली पूरी तरह जल गई। डॉक्टरों का कहना है कि रोशनी बचाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन घाव बहुत गहरा है।  


डॉक्टरों की चेतावनी और सलाह

डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि पटाखों से होने वाली चोटें जानलेवा हो सकती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि पटाखे छोड़ने के बाद हाथों को अच्छी तरह धोएं, ताकि बारूद आंखों तक न पहुंचे। उन्होंने सुरक्षा के लिए ये सुझाव दिए: 

  • आंख में चोट लगने पर तुरंत ठंडे पानी से धोएं, लेकिन रगड़ें नहीं।  
  • तत्काल नजदीकी नेत्र अस्पताल जाएं। 
  • बच्चों को अकेले पटाखे चलाने की अनुमति न दें।  
  • धमाकेदार बमों को जलाते समय चेहरा दूर रखें।  
  • स्थानीय लोगों में दहशत, प्रशासन से सख्ती की मांग

यह त्रासदी न केवल प्रभावित परिवारों के लिए दुखद है, बल्कि पूरे शहर में पटाखों के दुरुपयोग को लेकर चिंता बढ़ा रही है। स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि खतरनाक पटाखों की बिक्री और उपयोग पर सख्ती की जाए। हैलट अस्पताल में मरीजों की भीड़ और डॉक्टरों की मेहनत इस बात की गवाही दे रही है कि त्योहारों के नाम पर लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। ऐसे में  वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मोहन ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सावधानी न बरती गई, तो ऐसी घटनाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं। उन्होंने लोगों से सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाने और बच्चों को खतरनाक पटाखों से दूर रखने की अपील की। यह घटना एक बार फिर समाज को आगाह करती है कि उत्सव की आड़ में लापरवाही जिंदगी को हमेशा के लिए बदल सकती है।

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