अब नही काटने होंगे सरकारी दफ्तरों के चक्कर: 300 करोड़ से बनेंगे 'CBD सेंटर' एक ही छत के नीचे मिलेंगे 43 मंडलीय कार्यालय

Kanpur CBD Centre: कानपुर में जल्द ही सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से मिलेगी राहत। 300 करोड़ की लागत से म्योर मिल परिसर में बनने जा रहा ‘CBD सेंटर’ एक ही छत के नीचे 43 मंडलीय कार्यालयों को जोड़ेगा।

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हाइलाइट्स

  • कानपुर में 300 करोड़ की लागत से बनेगा 'CBD सेंटर'
  • 43 मंडलीय कार्यालय होंगे एक ही छत के नीचे
  • म्योर मिल की 15 हेक्टेयर जमीन पर बनेगा आधुनिक परिसर

रिपोर्ट- अनुराग श्रीवास्तव 

Kanpur CBD Centre: उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में नागरिकों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से जल्द मुक्ति मिलने वाली है। कानपुर की ऐतिहासिक म्योर मिल की 15 हेक्टेयर जमीन पर सरकार 300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से एक भव्य सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (सीबीडी) सेंटर विकसित करने जा रही है।

कानपुर में बनने जा रहे इस आधुनिक परिसर में 43 मंडलीय विभागों के कार्यालय एक ही छत के नीचे स्थापित किए जाएंगे, जिससे आम जनता को सभी जरूरी सरकारी सेवाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी और सरकारी कामकाज में लगने वाले समय की बचत होगी, जोकि जनता के लिए वरदान साबित होगी ।

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सभागार में हुई उच्चस्तरीय बैठक

इस दौरान शुक्रवार देर शाम मंडलायुक्त शिविर कार्यालय के सभागार में हुई उच्चस्तरीय बैठक में परियोजना के प्रारूप को अंतिम रूप दिया गया। बैठक की अध्यक्षता मंडलायुक्त के. विजयेन्द्र पांडियन ने की, इस दौरान कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) के सचिव अभय पांडेय ने परियोजना का विस्तृत ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किया, और उच्चाधिकारियों के सामने रखा, बैठक में केडीए उपाध्यक्ष मदन सिंह गर्ब्याल और एडीएम (वित्त एवं राजस्व) विवेक चतुर्वेदी भी उपस्थित रहे। वहीं अधिकारियों ने बताया कि निर्माण के लिए तकनीकी निविदाएं पहले ही जारी की जा चुकी हैं, जिनमें तीन प्रतिष्ठित कंपनियों ने हिस्सा लिया है। अब एक सप्ताह के भीतर वित्तीय बोली प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, जिसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को अंतिम मंजूरी दी जाएगी। डीपीआर तैयार होने के बाद चयनित कार्यदायी संस्था तत्काल निर्माण कार्य शुरू करेगी। केडीए इस परियोजना पर लगभग 300 करोड़ रुपये का बजट व्यय करेगा।

 क्या बनेगा सीबीडी सेंटर में ?  

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सीबीडी सेंटर में आधुनिक कार्यालय भवन, उच्च क्षमता वाले मीटिंग हॉल और कॉन्फ्रेंस रूम, बहु-स्तरीय पार्किंग व्यवस्था, नागरिक सुविधा केंद्र (जन सुविधा काउंटर), पूर्ण डिजिटलाइज्ड रिकॉर्ड मैनेजमेंट सिस्टम और हरित क्षेत्र एवं उद्यान की व्यवस्था होगी। मंडलायुक्त के. विजयेन्द्र पांडियन ने कहा, “म्योर मिल परिसर शहर के बीचों-बीच स्थित है, जो प्रशासनिक दृष्टिकोण से अत्यंत रणनीतिक और सुविधाजनक है। सभी मंडलीय कार्यालयों का एकीकरण न केवल जनता की परेशानी कम करेगा, बल्कि विभागों के बीच समन्वय को मजबूत कर सरकारी कामकाज में गति और पारदर्शिता लाएगा।”

1.5 लाख वर्गमीटर में बनेगा सेंटर  

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सिविल लाइंस क्षेत्र में फैले लगभग 1.5 लाख वर्गमीटर (15 हेक्टेयर) क्षेत्र की इस जमीन पर प्रशासन ने औपचारिक कब्जा प्रक्रिया पिछले सप्ताह पूरी कर ली है। एडीएम (वित्त) विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि नजूल अभिलेखों के अनुसार यह भूमि 1861 में द कानपुर म्योर मिल कंपनी को लीज पर दी गई थी। 1930 में लीज का अंतिम नवीनीकरण हुआ, लेकिन उसके बाद न तो किराया जमा किया गया और न ही भूमि का उपयोग मूल उद्देश्य (कपड़ा उत्पादन) के लिए हुआ।

सत्यापन समिति की रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि भूमि अब औद्योगिक उपयोग में नहीं है। उत्तर प्रदेश शासन ने 8 अक्टूबर 2025 को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी कर इसे नजूल रिकॉर्ड में दर्ज करने की मंजूरी दी। इसके बाद कब्जा प्रक्रिया पूरी की गई। परिसर में अवैध रूप से रह रहे परिवारों को नोटिस जारी कर खाली कराने की कार्रवाई चल रही है।

म्योर मिल की स्थापना

म्योर मिल की स्थापना 1886 में हुई थी और यह कानपुर की सबसे बड़ी टेक्सटाइल मिलों में गिनी जाती थी। बंदी से पहले यहां 6,300 से अधिक कर्मचारी कार्यरत थे। 2012 में मिल पूर्ण रूप से बंद हो गई, जिसके बाद अधिकांश कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) दी गई। मिल की अधिकांश मशीनरी बिक चुकी है और वर्तमान में परिसर में केवल सुरक्षा गार्ड तैनात हैं।

आने वाली यह CBD परियोजना न केवल कानपुर की प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, बल्कि शहर के केंद्रीय क्षेत्र में एक नया लैंडमार्क भी स्थापित करेगी। सभी सरकारी सेवाएं एक परिसर में उपलब्ध होने से जनता को सुविधा, विभागों को समन्वय और प्रशासन को कार्यक्षमता में वृद्धि मिलेगी। निर्माण शुरू होने के बाद यह उत्तर भारत का सबसे बड़ा एकीकृत सरकारी सेवा परिसर बनने की दिशा में अग्रसर होगा।

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