Kamal Nath Story: कमलनाथ से जुड़ी अहम बातें, जानिए कैसे बने थे इंदिरा गांधी के तीसरे बेटे

Kamal Nath Story

Image Source- @OfficeOfKNath

भोपाल। मध्य प्रदेश में कमलनाथ (Kamal Nath) को कौन नहीं जानता है। वो प्रदेश में किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमिटी (Madhya Pradesh Congress Committee) के अध्यक्ष के साथ वे पूर्व मुख्यमंत्री है। लेकिन क्या आपको पता है कि जिनका मध्य प्रदेश में इतना बड़ा राजनीतिक कद है वो यहां के मूल निवासी नहीं हैं। जी हां सही सुना आपने। कमलनाथ मूल रूप से एमपी के रहने वाले नहीं हैं। उनका जन्म 18 नवंबर 1946 को उत्तरप्रदेश के कानपुर में हुआ था। उनकी पढ़ाई देहरादून के दून स्कूल से हुई है और हायर एजुकेशन उन्होंने कोलकाता के सेंट जेवियर कॉलेज से प्राप्त किया है। आज हम आपको कमलनाथ से जुड़ी कुछ ऐसी अहम बातें बताएंगे जिसे कम ही लोग जानते हैं।

कई कंपनियों के मालिक हैं कमलनाथ
जितना बड़ा कद कमलनाथ का राजनीति में है उतना ही बड़ा कद उनका बिजनेस में भी है। कमलाथ को बिजनेस टायकून (Business tycoon) भी कहा जाता है। वो 23 कंपनियों के मालिक हैं। जिन्हें उनके दोनों बेटे नकुलनाथ (Nakul Nath) और बकुलनाथ (Bakul Nath) संभालते हैं। यही कारण है कि 2007 में FDI मैगजीन और फाइनेंशियल टाइम्स बिजनेस ने उन्हें ‘पर्सनैलिटी ऑफ द ईयर’ से भी नवाजा था। ये सम्मान उन्हें व्यापार के क्षेत्र में विदेशी व्यापारियों को हिंदुस्तान की तरफ खींचने, निवेश और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए दिया था।

9 बार सांसद रह चुके हैं कमलनाथ
कमलनाथ मुख्यमंत्री बनने से पहले छिंदवाड़ा से 9 बार सांसद चुके हैं। सबसे पहले वे 1980 में 34 साल की उम्र में संसद भवन पहुंचे थे। इसके बाद वो लगातार यहां से सांसद बनते रहे हैं। हालांकि एक बार उन्हें उपचुनाव में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने हरा दिया था। लेकिन फिर से वो अगले चुनाव में जीत कर वापस दिल्ली पहुंच गए। कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में काफी काम किया है। उन्होंने यहां आदिवासियों के उत्थान और लोगों को रोजगार के लिए हरसंभव प्रयास किया है। यही कारण है कि आज छिंदवाड़ा जैसे आदिवासी बहुल्य और पिछड़ा क्षेत्र विकास की राह पर चल रहा है। वर्तमान में वहां से उनके बेटे नकुलनाथ लोकसभा सांसद हैं।

कमलनाथ कैसे बने इंदिरा गांधी के तीसरे बेटे
कमलनाथ का गांधी परिवार से रिश्ता काफी पुराना है। सबसे पहले उनकी मुलाकात संजय गांधी (Sanjay Gandhi) से हुई थी। जब वे देहरादून में पढ़ाई करते थे। उस वक्त संजय गांधी भी दून स्कूल में पढ़ाई करने पहुंचे थे। दोनों की दोस्ती काफी गहरी थी। दोनों ने मारूति कार बनाने का सपना देखा और यहां से वो युवा कांग्रेस की राजनीति तक जा पहुंचे। कमलनाथ ने संजय गांधी को दुख हो या सुख हर टाइम में साथ दिया। यही कारण है कि जब संजय इमरजेंसी (Emergency) के बाद गिरफ्तार किए गए तो कमलनाथ ने भी जज से बदतमीजी करके तिहाड़ जेल (Tihar Jail) पहुंच गए। ताकि वहां संजय गांधी को कोई दिक्कत ना हो। इन्हीं वजहों से कमलनाथ इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) की नजरों में आ गए। 1980 के चुनाव में उन्हें पहली बार छिंदवाड़ा से टिकट दिया गया। जब चुनाव प्रचार के लिए इंदिरा गांधी छिंदवाड़ा पहुंचीं तो उन्होंने अपने भाषण में कहा कि आप कांग्रेस नेता कमलनाथ को वोट मत किजिए, आप मेरे तीसरे बेटे कमलनाथ को वोट दिजिए।

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