Kamakhya Devi Mandir : मां कामाख्या देवी मंदिर का गुप्त रहस्य, जिसे सुनकर उड़ जाएंगे होश

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Kamakhya Devi Mandir : मां कामाख्या देवी मंदिर का गुप्त रहस्य, जिसे सुनकर उड़ जाएंगे होश

नई दिल्ली। मां के 51 शक्तिपीठों में से एक Kamakhya Devi mandir Facts आसाम स्थित मां कामाख्या देवी navratri 2022 के रहस्य से शायद आप परिचित हों। hindi ऐसी मान्यता है कि असम के गोवाहाटी में स्थित इस कामाख्या मंदिर को kamakhya mandir एक विशेष समय में तीन दिन के लिए बंद Janna Jaruri Hai रखा जाता है। आम भक्तों के लिए shardiya navratri 2022 date खोल दिया है। आपको बता दें इस कामाख्या शक्तिपीठ की गिनती 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ के रूप में होती है। तो चलिए जानते हैं इससे जुड़े कुछ रहस्य। साथ ही हम आपको बताएंगे आप इस मंदिर तक कैसे पहुंच सकते हैं।

जानिए मां कामाख्या मंदिर की खासियत
51 शक्तिपीठों में से है एक
इस कामाख्या शक्तिपीठ की गिनती 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ के रूप में होती है। यह बहुत ही प्रसिद्ध और चमत्कारी है। इस मंदिर को अघोरियों और तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। असम की राजधानी दिसपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर नीलांचल पर्वत से 10 किलोमीटर दूर स्थित है। सभी शक्तिपीठों के महापीठ के रूप में इसे जाना जाता है।

मंदिर में नहीं है कोई प्रतिमा
इस मंदिर में मां अम्बे की मूर्ति, प्रतिमा या चित्र Kamakhya Devi Temple Facts  नहीं है। यहां मात्र एक कुंड बना है जो हमेशा फूलों से ढ़का रहता है। जिससे हमेशा ही जल का बहाव होता है। चमत्कारों से भरे इस मंदिर में देवी की योनि की पूजा होती है। यहां योनी भाग के होने से कारण मां यहां रजस्वला होती हैं।

इसलिए पड़ा नाम कामाख्या मंदिर
धर्म पुराणों मंदिर के नाम के पीछे की भी अलग Kamakhya Devi Temple Facts ही कहानी है। शक्तिपीठ का नाम कामाख्या इसलिए पड़ा क्योंकि इस जगह मां सती के प्रति शिव जी का मोह भंग करने के लिए विष्णु जी ने अपने चक्र से मां के 51 भाग कर दिए थे। जहां—जहां ये भाग गिरे वहां—वहां माता के शक्तिपीठ बन गए। इस स्थान पर माता की योनी गिरी थी। इस पीठ को सबसे शक्तिशाली पीठों में गिना जाता है। वैसे तो सालभर यहां भक्तों की भीड़ रहती है परन्तु दुर्गा पूजा, पोहान बिया, दुर्गादेऊल, वसंती पूजा, मदानदेऊल, अम्बुवासी और मनासा पूजा आदि अवसरों पर मंदिर की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है।

पानी हो जाता है लाल

प्रतिवर्ष यहां अम्बुबाची मेला लगता है। जिसमें इसके पास स्थित ब्रह्मपुत्र का पानी तीन दिन के लिए लाल हो जाता है। ऐसी मान्यता है कि पानी का यह लाल रंग कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण होता है। इन तीन दिनों के बाद दर्शन के लिए यहां भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है।

प्रसाद में मिलता है लाल कपड़ा
भक्तों को बहुत ही अलग रूप का प्रसाद दिया जाता है। दूसरे शक्तिपीठों की अपेक्षा इस मंदिर में प्रसाद के रूप में लाल रंग का गीला कपड़ा देते हैं। मां के तीन दिन के रजस्वला के दौरान तो सफेद रंग का कपडा मंदिर के अंदर बिछा दिया जाता है। तीन दिन बाद मंदिर के दरवाजे खुलने पर वह वस्त्र माता के रज से लाल रंग से भीग जाता है। इस कपड़ें को अम्बुवाची वस्त्र कहते है। यही वस्त्र भक्तों को प्रसाद के रूप में मिलता है।

हर मन्नत होती है पूरी –

  •  मनोकामना पूरी करने के लिए इस मंदिर में कन्या पूजन व भंडारा कराया जाता है। इसके अलावा पशुओं की बलि दिए जाने की भी परंपरा है। पर वो भी नर जानवरों की न की मादा।
  • काली और त्रिपुर सुंदरी देवी के बाद कामाख्या माता तांत्रिकों की सबसे महत्वपूर्ण देवी है। इनकी पूजा शिवजी की नव वधू के रूप में की जाती है। कामाख्या देवी को सभी इच्छाएं पूर्ण करने वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है।
  • यहां आने वाले हर भक्त की मुराद जरूर पूरी होती है। मंदिर के बाजू में स्थित एक मंदिर में मां की मूर्ति विराजित है। जिसे कामादेव मंदिर कहा जाता है।
  • बुरी शक्तियों को दूर करने में यहां के तांत्रिक निपुण माने जाते हैं। कई लोग विवाह, संतान और धन संपत्ति संबंधी इच्छाओं की पूर्ति के लिए कामाख्या की तीर्थयात्रा पर जाते हैं।
  • यह मंदिर तीन हिस्सों में बना है। पहले सबसे बड़े हिस्से में हर किसी को नहीं की इजाजत नहीं है। दूसरे हिस्से में मां के दर्शन होते हैं। यही वो स्थान है जहां एक पत्थर से हर वक्त पानी निकलता रहता है। माता के रजस्वला के दौरान वाले तीन दिनो के लिए मंदिर के पट बंद रहते है। तीन दिन बाद दुबारा बड़े ही धूमधाम से मंदिर के पट खोले जाते है।
  • तंत्र साधना के लिए यह स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए साधु और अघोरियों का यहां पर तांता रहता है। अधिक मात्रा में काला जादू भी किया जाता है। साथ ही काला जादू से ग्रसित व्यक्ति यहां आकर इस समस्या से निजात पा सकता है।

कैसे पहुंचें कामाख्या मंदिर? (How to reach Kamakhya Temple)
हवाई यात्रा —
कामाख्या देवी मंदिर से सबसे नजदीक में गुवाहाटी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जहां से कामाख्या मंदिर की दूरी करीब 20 किमी. है।

रेल यात्रा-
कामाख्या देवी मंदिर के नजदीक में स्थित रेलवे स्टेशन कामाख्या ही है, जो कामाख्या मंदिर परिसर से मात्र 6 किमी. की दूरी पर स्थित है।

बस सेवा –
गुवाहाटी के लिए डायरेक्ट बस नहीं मिलती है, तो आप सबसे पहले पश्चिम बंगाल जा सकते हैं। पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध शहर कोलकाता, मालदा, नई जलपाईगुड़ी और हावड़ा आदि से गुवाहाटी के लिए आसानी से बस मिल जाएगी।

नोट: इस लेख में दी गई सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। बंसल न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करती।

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