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Kalavantin Dangerous Fort : भारत अपने इतिहास को लेकर जाना जाता है। हमारे देश में ऐसे कई किलें है जो आज अपने आप में अपनी अलग पहचान रखते है। तो कई किले ऐसे है जो अपनी बनावट के लिए जाने जाते है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे किले (Kalavantin Fort) के बारे में बताने जा रहे है, जो खतरनाक बताया जाता है। जिसमें बेहद कम लोग ही आते है। लेकिन जो लोग आते है तो वह शाम होने से पहले वापस लौट जाते है। इस किले (Kalavantin Fort) में आने वाले लोग शाम से पहले वापस लौटना ही सही समझते है।
कहा है ये किला!
हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के माथेरान और पनवेल के बीच स्थित प्रबलगढ़ किले के बारे में। यह किला कलावंती किला (Kalavantin Fort) के नाम से पूरे भारत में जाना जाता है। यह किला 2300 फीट ऊंची खड़ी पहाड़ी पर बना है। इस किले (Kalavantin Fort) के बारे में कहा जाता है कि यहां बेहद कम लोग आते हैं और जो घूमने आते भी हैं वे लोग सूरज ढलने से पहले यहां से लौट जाते हैं।
इसलिए खतरनाक है ये किला?
कलावंती का यह किला (Kalavantin Fort) इसलिए खतरनाक माना जाता है। क्योंकि यहां ट्रैकर्स जब पहाड़ियों और नुकीली सीढ़ियों से ट्रैक करते हैं तो उन्हें पकड़ने के लिए कोई रस्सी या कोई रेलिंग नहीं होती है। यानी चढ़ाई करते समय अगर पैर फिसल जाए तो आप 2300 फीट नीचे खाई में जा गिरेंगे। यह पहाड़ी खतरनाक होने के बाद भी यहां कई लोग ट्रैकिंग करने के लिए आते हैं। कुछ लोग इस ट्रैकिंग को सफलतापूर्वक पूरा कर लेते है। तो कुछ देखकर ही वापस लौट जाते है।
कलावंती किले (Kalavantin Fort) का क्या है इतिहास
बताया जाता है कि इस किले (Kalavantin Fort) पर से कई लोगों की गिरकर मौत हो चुकी है। पहले इस किले (Kalavantin Fort) का नाम मुरंजन किला था, लेकिन छत्रपति शिवाजी महाराज के राज में इसका नाम बदल दिया गया। शिवाजी महाराज ने रानी कलावंती (Kalavantin Fort) के नाम पर ही इस किले (Kalavantin Fort) का नाम रखा गया था। इस किले (Kalavantin Fort) को देखने के लिए देशभर से कई लोग आते है। लेकिन सबसे ज्यादा यहां ट्रैकर्स आते है। लेकिन याद रहे बारिश के मौसम में यहां आना खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि इस दौरान किले (Kalavantin Fort) पर जाने का रास्ता फिसलन भरा हो जाता है और गिरने की संभावना बढ़ जाती है।
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