Jhulan Goswami: लड़कों के साथ खेलकर भारतीय महिला क्रिकेट टीम में पहुंची और बनी दुनिया की दूसरी सबसे तेज गेंदबाज

Jhulan Goswami

नई दिल्ली। आज के समय में पुरूष क्रिकेट हो या महिला क्रिकेट भारत में दोनों ही पॉपुलर है। लेकिन एक समय था जब भारत में महिला क्रिकेट को ज्यादा तवज्जो नहीं दिया जाता था। लोग महिला क्रिकेटरों का मजाक उड़ाया करते थे। लेकिन महिला क्रिकेटरों ने अपनी कड़ी मेहनत और काबिलियत के दम पर लोगों की धारणा को बदलकर रख दिया। आज देश में कई ऐसी महिला क्रिकेटर हैं जिन्हें लोग उनके खेल की वजह से जानते हैं। इन्हीं में से एक क्रिकेटर हैं, तेज गेंदबाज ‘झूलन गोस्वामी’ (Jhulan Goswami) झूलन का आज अपना 39वां जन्मदिन मना रही हैं।

2002 में की थी अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरूआत

बता दें कि, झूलन ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरूआत साल 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे मैच से की थी। बीते 19 वर्षों में, उन्होंने कई कीर्तिमान स्थापित किए है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम को एक अलग पहचान दिलाने में उनका योगदान काफी सराहनीय है। झूलन गोस्वामी का जन्म 25 नवंबर 1982 को पश्चिम बंगाल के नादिया में हुआ था। उनके पिता निसिथ गोस्वामी इंडियन एयरलाइंस मं काम करते हैं जबकि उनकी मां झरना गोस्वामी हाउसवाइफ हैं।

क्रिकेट खेलना ऐसे शुरू किया

बतादें कि पश्चिम बंगाल के नादिया में फुटबॉल काफी खेला जाता है। यही कारण है कि बचपन में झूलन फूटबॉल खेला करती थी। लेकिन 1992 के क्रिकेट विश्व कप को देखने के बाद उनका मन क्रिकेट की तरफ चला गया। शुरू में उन्होंने टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलना शुरू किया। जब वो गली क्रिकेट खेलती थी, तो लड़के उनका मजाक उड़ाते थे कि वो लड़की होकर क्रिकेट खेल रही है। हालांकि, उन्होंने अपने ऊपर किए जा रहे कमिट्स पर कभी ध्यान नहीं दिया और लड़कों के साथ ही क्रिकेट खेलती रहीं।

पहले काफी धीमी गेंदबाजी करती थीं

शुरुआती दिनों में झूलन काफी धीमी गेंदबाजी करती थीं। इस वजह से कोई भी लड़का उनकी गेंदों पर आसानी से रन बना लेता था। इस कारण से उन्हें कई बार खेलने नहीं दिया जाता था। ऐसे में उन्होंने फैसला किया कि वह लड़कों के बराबर गति से बॉलिंग करेगी और फिर कड़ी मेहनत करनी शुरू कर दी। झूलन धीरे-धीरे इसमें कामयाब होती गई। 1997 में हुए महिला विश्व कप के फाइनल मैच ने उनकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया।

क्रिकेट को ही अपना जीवन बनाने का फैसला किया

दरअसल, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए इस मैच के दौरान, झूलन ‘बॉल गर्ल’ के रूप में अपनी भूमिका निभा रही थीं। इस दौरान, उन्होंने बेलिंडा क्लार्क, डेबी हॉकी और कैथरीन फिट्जपैट्रिक जैसी दिग्गज खिलाड़ियों को काफी करीब से देखा। 15 साल की झूलन को एक नई प्रेरणा मिली और उन्होंने क्रिकेट को ही अपना जीवन बनाने का फैसला कर लिया।

प्रैक्टिस के लिए रोजाना सुबह 4 बजे जागती थीं

उन्हें पेशेवर क्रिकेट खेलने के लिए प्रशिक्षण की जरूरत थी। लेकिन उनके शहर में कोई सुविधा नहीं थी। ऐसे में उन्हें घर से काफी दूर, घंटों सफर कर कोलकाता के विवेकानंद पार्क जाना पड़ता था। वह सुबह चार बजे जाग जाती थी और ट्रेन या बस के जरिए 7:30 बजे प्रैक्टिस के लिए पहुंचती थीं। झूलन अकेले यात्रा करने से डरती थी, इस कारण कभी मां तो कभी पिता उसके साथ कोलकाता जाते थे। बाद में उन्हें अहसास हुआ कि इससे उनके पिताजी को नौकरी पर जाने और मां को घर संभालने में दिक्कत होती। बाद में उन्होंने हिम्मत जुटाई और अकेले सफर करने लगीं। आज झूलन गोस्वामी दुनिया की सबसे सफल महिला क्रिकेटरों में से एक हैं।

शानदार करियर के लिए पुरस्कार

उनके शानदार करियर के लिए, भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2010 में अर्जुन पुरस्कार और 2012 में पद्म श्री से सम्मानित किया। झूलन 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के साथ भारत की पहली और दुनिया में पूर्व आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी कैथरीन फिट्जपैट्रिक (125 किमी/घंटा) के बाद, दूसरी सबसे तेज गेंदबाज हैं। उन्होंने अतंरराष्ट्रीय क्रिकेट में 600 से भी ज्यादा विकेट लिए हैं।

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